{"_id":"620d5f46567d3720cb739ef0","slug":"reply-sought-from-central-and-state-government-for-not-providing-basic-facilities-haldwani-news-hld45392787","type":"story","status":"publish","title_hn":"मूलभूत सुविधाएं न देने पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मूलभूत सुविधाएं न देने पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नैनीताल। रामनगर के आमडंडा खत्ता निवासियों को बिजली, पानी और स्कूल आदि मूलभूत सुविधाएं दिलाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने भारत सरकार के वन सचिव, सदस्य सचिव नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड, प्रमुख वन्यजीव संरक्षक उत्तराखंड, निदेशक कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, अधिशासी अभियंता यूपीसीएल रामनगर, अधिशासी अभियंता जल संस्थान रामनगर, जिलाधिकारी नैनीताल, मुख्य विकास अधिकारी नैनीताल को छह सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। वत्सल फाउंडेशन की सचिव श्वेता मासीवाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि आमडंडा क्षेत्र में विद्युतीकरण के लिए 2015 में धनराशि आवंटित हुई थी। अधिकारियों की उदासीनता के कारण 2015 से आज तक विद्युतीकरण नहीं हो पाया है। इसी तरह आमडंडा में पेयजल को लेकर भी वर्ष 2012 से आज तक कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है। याचिकाकर्ता का कहना था कि आमडंडा खत्ता के ग्रामीण बिजली, पानी और शिक्षा के अभाव में कष्टमय जीवन जी रहे हैं। याचिका में कहा गया कि अधिकारियों ने लगातार उनके अधिकारों की अनदेखी की है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार व राज्य सरकार सहित अन्य को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
विज्ञापन
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। वत्सल फाउंडेशन की सचिव श्वेता मासीवाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि आमडंडा क्षेत्र में विद्युतीकरण के लिए 2015 में धनराशि आवंटित हुई थी। अधिकारियों की उदासीनता के कारण 2015 से आज तक विद्युतीकरण नहीं हो पाया है। इसी तरह आमडंडा में पेयजल को लेकर भी वर्ष 2012 से आज तक कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है। याचिकाकर्ता का कहना था कि आमडंडा खत्ता के ग्रामीण बिजली, पानी और शिक्षा के अभाव में कष्टमय जीवन जी रहे हैं। याचिका में कहा गया कि अधिकारियों ने लगातार उनके अधिकारों की अनदेखी की है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार व राज्य सरकार सहित अन्य को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
विज्ञापन