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रामनगर में दिखा दुर्लभ स्पॉट बैलिड ईगल आउल
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रामनगर के सीतावनी रोड पर पेड़ बैठ दिखाई दिया दुलर्भ स्पॉट बैलिड ईगल आउल।
- फोटो : RAMNAGAR
रामनगर (नैनीताल)। सीतावनी रोड स्थित बांगाझाला टंकी के पास दुर्लभ स्पॉट बैलिड ईगल आउल दिखा है। इस दुर्लभ प्राणी की फोटो वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने खींची है। रजवार का दावा है कि अब तक कोई इसकी फोटो नहीं खींच पाया था।
बृहस्पतिवार की शाम वाइल्ड लाइफफोटोग्राफर दीप रजवार ने इस दुर्लभ आउल को अपने कैमरे में कैद किया और इसका यहां होना पक्षी प्रेमियों के लिए एक अच्छा संकेत है। इस दुर्लभ आउल का यहां पर दिखना यहां की मजबूत जैव विविधिता को दर्शाता है। उल्लू की इस प्रजाति का आकार बड़ा होता है। यह जंगलों में पाया जाने वाला बड़ा शिकारी पक्षी है, जो रात में सक्रिय रहता है।
इसे फॉरेस्ट ईगल आउल के नाम से भी जाना जाता है।
दीप बताते हैं कि दिन के समय यह घने जगलों में पेड़ों के पत्तों में छुपा रहता है। कभी-कभी यह दिन के समय भी शिकार कर लेता है। यह एक शक्तिशाली पक्षी है, जो आकार में अपने से कई गुना बड़े जीवों को शिकार बना लेता है।
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यह गीदड़ का भी शिकार कर सकता है। इसके अलावा, जंगली मुर्गों, क्लीज फीजेंट, मोर, खरगोश, सीवट, बड़ी गिलहरी तथा कभी-कभी सांपों और बड़ी छिपकलियों का भी शिकार कर लेता है। इस पक्षी के प्रजनन का समय दिसंबर से मार्च तक होता है। इसका घोंसला बड़े पेड़ों के खोल में होता है। यह गिद्ध और चील के पुराने घोंसलों का भी प्रयोग कर लेता है। यह पहाड़ों में पत्थरों की दरारों में भी अपना घोंसला बना लेता है। मादा एक अंडा देती है तथा नर-मादा मिलकर चूजों को पालते हैं।
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बृहस्पतिवार की शाम वाइल्ड लाइफफोटोग्राफर दीप रजवार ने इस दुर्लभ आउल को अपने कैमरे में कैद किया और इसका यहां होना पक्षी प्रेमियों के लिए एक अच्छा संकेत है। इस दुर्लभ आउल का यहां पर दिखना यहां की मजबूत जैव विविधिता को दर्शाता है। उल्लू की इस प्रजाति का आकार बड़ा होता है। यह जंगलों में पाया जाने वाला बड़ा शिकारी पक्षी है, जो रात में सक्रिय रहता है।
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इसे फॉरेस्ट ईगल आउल के नाम से भी जाना जाता है।
दीप बताते हैं कि दिन के समय यह घने जगलों में पेड़ों के पत्तों में छुपा रहता है। कभी-कभी यह दिन के समय भी शिकार कर लेता है। यह एक शक्तिशाली पक्षी है, जो आकार में अपने से कई गुना बड़े जीवों को शिकार बना लेता है।
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यह गीदड़ का भी शिकार कर सकता है। इसके अलावा, जंगली मुर्गों, क्लीज फीजेंट, मोर, खरगोश, सीवट, बड़ी गिलहरी तथा कभी-कभी सांपों और बड़ी छिपकलियों का भी शिकार कर लेता है। इस पक्षी के प्रजनन का समय दिसंबर से मार्च तक होता है। इसका घोंसला बड़े पेड़ों के खोल में होता है। यह गिद्ध और चील के पुराने घोंसलों का भी प्रयोग कर लेता है। यह पहाड़ों में पत्थरों की दरारों में भी अपना घोंसला बना लेता है। मादा एक अंडा देती है तथा नर-मादा मिलकर चूजों को पालते हैं।