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रामलीला के मंच से सियासी महाभारत
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Thu, 04 Aug 2016 01:25 AM IST
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श्री रामलीला कमेटी के आय एवं व्यय घोटाले के गढ़े मुर्दे उखड़ने के साथ राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। मौजूदा कमेटी पदाधिकारियों का कार्यकाल खत्म हो चुका है। कमेटी की नई कार्यकारिणी के चुनाव से पहले शुरू हुए सियासी महाभारत की कमान दो बड़े कांग्रेसी नेताओं के हाथ में है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दोनों ही बड़े नेता कमेटी की नई कार्यकारिणी में अपने-अपने चहेतों को काबिज करना चाहते हैं, ताकि विधानसभा चुनाव में धार्मिक मंच का फायदा मिल सके।
श्री रामलीला कमेटी 130 साल पुरानी धार्मिक संस्था है। विगत कुछ सालों से बड़े नेताओं के वर्चस्व की लड़ाई में कमेटी में पूरी तरह राजनीतिक दखल हो गया है। बड़े नेता ही नफे और नुकसान के लिए धार्मिक मंच का इस्तेमाल करते आए हैं। धार्मिक आस्था से जुड़े लोग अब कमेटी कार्यकारिणी चुनाव में भागीदारी करने से कतराते हैं। मौजूदा कमेटी का कार्यकाल 31 मार्च को खत्म हो चुका है। 21 सदस्यीय कमेटी में दो फाड़ हैं। इनमें अध्यक्ष और महामंत्री दोनों ही क्षेत्र के दो बड़े कांग्रेसी नेताओं के करीबी हैं।
नियमानुसार मौजूदा कमेटी का कार्यकाल खत्म होने के साथ नई कार्यकारिणी का निर्वाचन हो जाना चाहिए था, जो नहीं हुए। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अब कमेटी की नई कार्यकारिणी के चुनाव होने हैं। कार्यकारिणी भले ही निर्वाचित होगी, लेकिन अध्यक्ष और महामंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा यह दो बड़े नेता ही तय करेंगे। मौजूदा कार्यकारिणी महामंत्री अमित कबडवाल के अनशन को इसी राजनीतिक कड़ी से जोड़ा जा रहा है। अमित कबड़वाल ने साल भर पुराना मुद्दा उठाकर रामलीला कमेटी की नई कार्यकारिणी के लिए खुद की दावेदारी भी ठोक दी है।
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ये हैं गबन के आरोप
- 2015 नवंबर में रामलीला मैदान में दीपावली पर आतिशबाजी की 91 दुकानों और फड़ व्यापारियों से 15 लाख रुपए की आमदनी हुई। लेकिन कमेटी के बैंक खाते में सिर्फ पांच लाख 60 हजार जमा कराए गए।
- 2015 में रामलीला आयोजन के लिए बाजार क्षेत्र से 8 से 10 लाख रुपए चंदे के रूप में आमदनी। इसमें से मात्र 40 हजार रुपये कमेटी के बैंक खाते में जमा।
- रामलीला मैदान में होने वाली वाहन पार्किंग की आमदनी में गड़बड़ी।
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श्री रामलीला कमेटी 130 साल पुरानी धार्मिक संस्था है। विगत कुछ सालों से बड़े नेताओं के वर्चस्व की लड़ाई में कमेटी में पूरी तरह राजनीतिक दखल हो गया है। बड़े नेता ही नफे और नुकसान के लिए धार्मिक मंच का इस्तेमाल करते आए हैं। धार्मिक आस्था से जुड़े लोग अब कमेटी कार्यकारिणी चुनाव में भागीदारी करने से कतराते हैं। मौजूदा कमेटी का कार्यकाल 31 मार्च को खत्म हो चुका है। 21 सदस्यीय कमेटी में दो फाड़ हैं। इनमें अध्यक्ष और महामंत्री दोनों ही क्षेत्र के दो बड़े कांग्रेसी नेताओं के करीबी हैं।
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नियमानुसार मौजूदा कमेटी का कार्यकाल खत्म होने के साथ नई कार्यकारिणी का निर्वाचन हो जाना चाहिए था, जो नहीं हुए। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अब कमेटी की नई कार्यकारिणी के चुनाव होने हैं। कार्यकारिणी भले ही निर्वाचित होगी, लेकिन अध्यक्ष और महामंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा यह दो बड़े नेता ही तय करेंगे। मौजूदा कार्यकारिणी महामंत्री अमित कबडवाल के अनशन को इसी राजनीतिक कड़ी से जोड़ा जा रहा है। अमित कबड़वाल ने साल भर पुराना मुद्दा उठाकर रामलीला कमेटी की नई कार्यकारिणी के लिए खुद की दावेदारी भी ठोक दी है।
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ये हैं गबन के आरोप
- 2015 नवंबर में रामलीला मैदान में दीपावली पर आतिशबाजी की 91 दुकानों और फड़ व्यापारियों से 15 लाख रुपए की आमदनी हुई। लेकिन कमेटी के बैंक खाते में सिर्फ पांच लाख 60 हजार जमा कराए गए।
- 2015 में रामलीला आयोजन के लिए बाजार क्षेत्र से 8 से 10 लाख रुपए चंदे के रूप में आमदनी। इसमें से मात्र 40 हजार रुपये कमेटी के बैंक खाते में जमा।
- रामलीला मैदान में होने वाली वाहन पार्किंग की आमदनी में गड़बड़ी।