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राकेश के सपनों ने भरी उड़ान
अभिजात कांडपाल
Updated Thu, 29 Dec 2016 01:55 AM IST
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Indian Airforce
- फोटो : File Photo
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जीत की खातिर बस जुनून चाहिए, जिसमें उबाल हो ऐसा खून चाहिए, ये आसमां भी आएगा जमीं पर, बस इरादों में जीत की गूंज चाहिए। किसी शायर की यह पंक्तियां तीनपानी एकता विहार निवासी हेम चंद्र गौला के पुत्र राकेश कुमार गौला पर सटीक बैठती हैं। राकेश का चयन वायुसेना में बतौर फ्लाइंग ऑफिसर हुआ है। उनका चयन सीडीएस परीक्षा के जरिये हुआ है।
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बागेश्वर जिले के कांडा क्षेत्र स्थित जल्थाकोट गांव के मूल निवासी राकेश ने बताया कि बचपन से ही उनकी दिली तमन्ना थी की वह फाइटर प्लेन से उड़ान भरें। इसी के चलते उन्होंने एमएनसी छोड़ वायुसेना में जाने का मन बनाया। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि उनकी इंटर तक की शिक्षा सेंट थेरेसा स्कूल से हुई है।
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इसके बाद उन्होंने विपिन त्रिपाठी कुमाऊं इंजीनियरिंग कॉलेज द्वाराहाट से ईसीई ट्रेड में बीटेक की डिग्री प्राप्त की। बताया कि उनका चयन बतौर असिस्टेंट सिस्टम इंजीनियर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) बंगलूरू में चार लाख रुपए प्रति वर्ष के पैकेज पर हो गया था। टीसीएस में एक साल काम करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और सीडीएस की तैयारी की।
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कई बार सीडीएस की लिखित परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन इंटरव्यू में चयन नहीं हो सका, उन्होंने कभी हार नहीं मानी। बताया कि उनके पिता कोटेक कंपनी में डीएमए के पद पर कार्यरत हैं जबकि मां प्रभा गौला गृहणी हैं।
सूरज ने पायलट बनने का पहला पायदान चढ़ा
अल्मोड़ा जिले के लमगड़ा क्षेत्र के निरई गांव निवासी सूरज रावत ने पायलट बनने का पहला पायदान पार कर लिया है। उन्होंने एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट की लिखित परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है।सूरज ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उनके पिता मोहन सिंह रावत भारतीय सेना के सूबेदार पद से सेवानिवृत हैं।
उनका परिवार वर्तमान में हल्द्वानी के ही दमुवाढूंगा क्षेत्र में रहता है। सूरज के अनुसार बचपन से ही फौज के अनुशासन और जिम्मेदारी के भाव ने उन्हें इसके लिए प्रेरित किया। बताया कि समूह में काम करने की भावना और साहसिक कार्यों के प्रति झुकाव भी इस पेशे के चुनने का एक कारण रहा। उन्होंने दिल्ली विवि से वनस्पति विज्ञान में बीएससी ऑनर्स किया है। सूरज ने बताया कि वह वायुसेना की प्रशासनिक विंग में काम करने के इच्छुक हैं। ब्यूरो