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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   President's Rule in the state High Court challenge

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन को हाईकोर्ट में चुनौती

Mon, 28 Mar 2016 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल Updated Mon, 28 Mar 2016 11:40 PM IST
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने हाईकोर्ट में सोमवार को याचिका दायर कर 27 मार्च को प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने को चुनौती दी। साथ ही उसे खत्म करने की भी गुजारिश की। इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता राकेश थपलियाल ने कहा कि इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भी पक्ष रखेंगे। इस आधार पर कोर्ट ने उन्हें एक दिन का समय देते हुए मंगलवार को सुनवाई के लिए तिथि नियत की है। 
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न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। पूर्व सीएम हरीश रावत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 27 मार्च 2016 को राष्ट्रपति शासन लागू करने को चुनौती देते हुए उसे समाप्त करने की मांग की। याचिकाकर्ता की ओर से विश्वासमत हासिल करने के लिए पूर्व में निर्धारित तिथि 28 मार्च को बहुमत सिद्ध करने की याचना की गई। राज्यपाल तथा केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से की गई संस्तुति को निरस्त करने की मांग गई। 
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याचिका में कहा कि राष्ट्रपति शासन राजनैतिक आधारों पर नहीं लगाया जा सकता है, जबकि सत्ताधारी पार्टी का सदन में बहुमत है। कहा कि भाजपा कुछ असंतुष्टों की मदद को लेकर स्वयं सरकार बनाने का षड्यंत्र कर रही है। राज्यपाल ने पहले 28 मार्च को सदन में बहुमत सिद्घ करने को कहा था, लेकिन बिना बहुमत साबित करने का अवसर दिए राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया तथा बिना सुनवाई व जांच के रातों रात अधिसूचना जारी कर राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया, जो गलत है।
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 याचिका में कहा गया कि राष्ट्रपति शासन की घोषणा को निरस्त किया जाए और केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश का पूरा रिकार्ड तलब किया जाए तथा प्रदेश की सरकार को बहाल किया जाए। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि संविधान का अनुच्छेद 356 तभी लगाया जा सकता है, जब कोई इमरजेंसी आ जाए, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट से पैरवी करने आए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की ओर से राष्ट्रपति शासन को राजनीति से प्रेरित बताया और निरस्त करने की मांग की।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से झारखंड, उत्तराखंड आदि राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला दिया गया, जिसमें एसआर बाम्बे, रघुवर प्रसाद, जगदंबिका पाल सहित कई निर्णयों की कॉपी कोर्ट में पेश की। केंद्र सरकार के अधिवक्ता राकेश थपिल्याल की ओर से सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदिकोई परिस्थितियां पैदा होती हैं, तो केंद्र राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है।


इसके अलावा उनके द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। जिसके बाद उन्होंने कहा कि इस प्रकरण पर आगे की सुनवाई एडिशनल सॉलिसिटर जनरल करेंगे। इस आधार पर कोर्ट ने उन्हें कुछ घंटों का समय दिया। इस प्रकरण पर मंगलवार को 10.15 बजे से मामले की सुनवाई जारी हो जाएगी। बता दें कि हाईकोर्ट में इस पर सोमवार को सुबह 11 बजे से सुनवाई हुई और शाम सवा तीन बजे तक जारी रही।
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