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एक महीने तक चला गजराज का इलाज, अब वास स्थल को पहुंचे

Thu, 23 Mar 2017 01:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रामनगर (नैनीताल)।
ब्यूरो/अमर उजाला, रामनगर (नैनीताल)। Updated Thu, 23 Mar 2017 01:12 AM IST
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NTCA team reached to see the elephant
हाथी देखने पहुंची एनटीसीए की टीम - फोटो : अमर उजाला

हल्द्वानी/रामनगर। रामनगर वन प्रभाग में घायल हुए हाथी को इलाज के लिए मनाने में उसके पसंदीदा गन्ने ने अहम भूमिका निभाई। घायल हाथी को सर्जरी की जरूरत थी। वन विभाग की टीम ने गजराज को गन्ने का लालच देते हुए इलाज के लिए बने खास जगह तक पहुंचा कर करीब एक महीने तक इलाज किया। इस दौरान भी गन्ने का खूब इंतजाम रखा गया। 33 दिन बार बुधवार को गजराज ठीक होकर अपने वास स्थल में पहुंच गए।

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 17 फरवरी को रामनगर वन प्रभाग के भंडारपानी क्षेत्र में वन विभाग को एक घायल हाथी (10 साल) के बारे में पता चला। हाथी के दो पैरों में गहरे जख्म थे। वह पैर घिसट कर चल रहा था। इसके बाद वन विभाग की टीम ने हाथी के इलाज के लिए एक खास जगह बनाई, लेकिन असल समस्या थी कि हाथी को इलाज के लिए उस जगह तक पहुंचाना। वन विभाग ने हाथी को गन्ने का लालच देते हुए खास जगह तक पहुंचाया।
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डीएफओ नेहा वर्मा कहती हैं कि हाथी के इलाज के लिए जंगल में ही सब व्यवस्था की गई, पहले से ही हाथी के पानी पीने के लिए कृत्रिम छोटा जलाशय बनाया गया। हाथी इलाज के दौरान कहीं भाग न जाए, इसके लिए चारों तरफ सोलर फेंसिंग की गई। 18 फरवरी को ट्रैंक्यूलाइजिंग टीम ने हाथी को बेहोश किया।
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इसके बाद डॉक्टरों ने सर्जरी कर उसके पांव से मवाद निकाला। घाव भरने और स्वस्थ करने के लिए दूसरी दवाएं भी शुरू की र्गईं। इस दौरान एक बार हाथी को और बेहोश किया गया। हाथी के खाने के लिए यहां भी खूब गन्ना आदि रखा गया था। इसके अलावा केला, आटा, गुड़, नमक से लेकर बरगद, झींगन आदि के पत्ते उपलब्ध कराए गए।

 पश्चिमी वृत्त वन संरक्षक डा. पराग मधुकर धकाते के मुताबिक अगर हाथी को इलाज के दौरान कहीं और ले जाते तो वह नई जगह पर तनाव में आ जाता। ऐसे में प्राकृतिक वास स्थल पर ही इलाज करने की योजना बनी। इससे उसकी रिकवरी भी जल्द हुई है। डा. धकाते का दावा है कि यह अपने तरह का पहला मामला है, जिसमें हाथी की इन परिस्थितियों में इलाज किया गया है। यह अनुभव आगे भी मददगार साबित होगा।

हाथी की सुरक्षा के  व्यापक इंतजाम किए गए।24 घंटे नजर रखने के लिए मचान बनाई गई और कैमरा ट्रैप लगाया गया था। इसमें वन रक्षक मदन सिंह मेहरा और नरेंद्र सिंह राठौर आदि वन कर्मी तैनात थे। डा. योगेन्द्र भारद्वाज और उनके सहयोगी ने करीब एक महीने तक गजराज का इलाज किया।

कोटा रेंज आरओ ललित जोशी कहते हैं कि प्रदेश में पहली  बार हाथी रेस्क्यू करने के लिए सोलर फेंसिंग का उपयोग किया गया। इलाज के बाद स्वस्थ हुए हाथी को छोड़ने के दौरान नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी की टीम भी मौजूद थी। हाथी को छोड़ने के दौरान कार्बेट पार्क निदेशक सुरेंद्र मेहरा, डिप्टी डॉयरेक्टर अमित वर्मा आदि मौजूद थे।

रामनगर। विगत दिनों तराई पश्चिमी वन प्रभाग के बैलपड़ाव रेंज के दाबका क्षेत्र में बहू व ससुर को मारने केे बाद पकड़े गए बाघ की मौत जांच करने के लिए आई एनटीसीए की टीम दूसरे दिन दिल्ली लौट गई। वहीं बुधवार को सीएफ द्वारा विभागीय जांच शुरू हो गई है, जिससे विभाग मेें हड़कंप मचा हुआ है।

मंगलवार को एनटीसीए की तीन सदस्यीय टीम में डीआईजी संजय पाठक, निशांत वर्मा के साथ ही डिप्टी डायरेक्टर वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो राजेश्वर सिंह ठाकुर ने बुधवार को दूसरे दिन भी स्टाफ के साथ ही जेसीबी मालिक के कलम बंद बयान दर्ज किए।

साथ ही कार्बेट की टीम से भी पूछताछ की गई। एसडीएम पारितोष वर्मा, सीओ मिथिलेश कुमार से भी जानकारी ली गई कि वनकर्मियों ने उनको सूचना दी थी या नहीं। जांच के बाद एनटीसीए की टीम दिल्ली रवाना हो गई। बृहस्पतिवार को ये अपनी रिपोर्ट मुख्यालय में उच्च अधिकारियों को सौपेंगे।  


रामनगर। रेस्क्यू के दौरान जेसीबी के पंजे से बाघ को दबाने को लेकर सोशल मीडिया में वायरल हुए वीडियो ने यहां से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया है। एनटीसीए के अलावा सीएफ ने विभागीय जांच बैठा दी है। इसमें चार सदस्यीय टीम गठित की गई है। इसमें गोपाल सिंह कार्की डिप्टी डायरेक्टर अंतरराष्ट्रीय जू हल्द्वानी, कार्बेट फाउंडेशन के डा. हरेेंद्र बर्गली, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के हरीश बुलेरिया, वैटनरी अधिकारी डा. योगेश शर्मा ने बुधवार को घटनास्थल का मौका मुआयना करने के साथ ही वनकर्मियों, ग्रामीणों, के साथ ही बाघ द्वारा मारे गए बहू और ससुर के परिजनों से भी जानकारी हासिल की। जांच दल फोटो, वीडियो फुटेज के साथ ही अन्य साक्ष्य भी जुटा रहा है। जांच में एक दो दिन और लग सकते हैं।  

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