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उन सांसों की फिक्र नहीं जो मांग रही थी ऑक्सीजन
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हल्द्वानी। फरवरी में कोरोना की तीसरी लहर की बात कही जा रही है। दूसरी लहर को लोग भूले नहीं है जिसने ऐसा कहर बरपाया कि कई परिवार प्रभावित हो गए। उस वक्त लोगों की सांसों के लिए ऑक्सीजन पहली जरूरत हो गई थी। यदि तीसरी लहर आती है तो इंतजाम अभी वैसे नहीं है जिन्हें संतोषजनक कहा जा सकता। मेडिकल कॉलेज के अधीन सुशीला तिवारी अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के साथ ऑक्सीजन भंडारण के लिए टैंक बनाने की योजना बनी थी, लेकिन टैंक अभी तक क्रियाशील नहीं हो सका है। महिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट भी क्रियाशील नहीं हो सका है।
कोरोना की दूसरी लहर के बाद कुमाऊं के सबसे बड़े सुशीला तिवारी अस्पताल को कोविड का अस्पताल बनाया गया। अस्पताल के सभी छह सौ से अधिक बेड भर गए। एक समय तक अस्पताल में एक दिन में 1500 ऑक्सीजन सिलिंडर की जरूरत पड़ी थी। कमोबेश यही हाल कोविड इलाज कर रहे 13 निजी अस्पतालों का था। अस्पतालों के बेड भरे हुए थे और ऑक्सीजन की उपलब्धता को लेकर खासा दबाव था। तीन निजी अस्पतालों में ही ऑक्सीजन प्लांट था। एसटीएच में बाहरी सिलिंडर के जरिए आपूर्ति हो रही थी।
यह व्यवस्था की गई
इसके बाद स्वास्थ्य और चिकित्सा-शिक्षा विभाग ने ऑक्सीजन की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए थे। इसमें एसटीएच में चार हजार एलपीएम क्षमता विकसित की गई है। एसीएमओ डॉ. रश्मि पंत का कहना है कि बेस अस्पताल हल्द्वानी, बीडी पांडे नैनीताल, संयुक्त चिकित्सालय रामनगर में तीन सौ से पांच सौ एलपीएम क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट लग चुके हैं। इसके अलावा एसटीएच में एक हजार एलपीएम, बेस अस्पताल में प्लांट लगाने का काम चल रहा है। जनरल बीसी जोशी कोविड अस्पताल में बीएस केएल का भंडारण टैंक स्थापित है।
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यह योजना नहीं हो सकी पूरी
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में 20 केएल का ऑक्सीजन भंडारण टैंक भी बनाने की योजना पर काम शुरू हुआ। टैंक लग गया, लेकिन अभी तक क्रियाशील नहीं हो सका है। महिला अस्पताल में महीनों से आक्सीजन प्लांट लगाने का काम चल रहा है जो पूरा नहीं हो सका है। सीएमओ डॉ. भागीरथी जोशी का कहना है कि जनरेटर की दिक्कत थी, उसे दूर कर लिया गया है। महिला अस्पताल में प्लांट तीन से चार दिन में क्रियाशील हो जाएगा। मेडिकल कालेज प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी का कहना है कि टैंक लगाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ऑक्सीजन टैंक में भंडारण शुरू करने से पहले एक लाइसेंस की जरूरत होती है, बस उसकी जरूरत है। इसके आने के बाद टैंक क्रियाशील हो जाएगा।
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कोरोना की दूसरी लहर के बाद कुमाऊं के सबसे बड़े सुशीला तिवारी अस्पताल को कोविड का अस्पताल बनाया गया। अस्पताल के सभी छह सौ से अधिक बेड भर गए। एक समय तक अस्पताल में एक दिन में 1500 ऑक्सीजन सिलिंडर की जरूरत पड़ी थी। कमोबेश यही हाल कोविड इलाज कर रहे 13 निजी अस्पतालों का था। अस्पतालों के बेड भरे हुए थे और ऑक्सीजन की उपलब्धता को लेकर खासा दबाव था। तीन निजी अस्पतालों में ही ऑक्सीजन प्लांट था। एसटीएच में बाहरी सिलिंडर के जरिए आपूर्ति हो रही थी।
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यह व्यवस्था की गई
इसके बाद स्वास्थ्य और चिकित्सा-शिक्षा विभाग ने ऑक्सीजन की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए थे। इसमें एसटीएच में चार हजार एलपीएम क्षमता विकसित की गई है। एसीएमओ डॉ. रश्मि पंत का कहना है कि बेस अस्पताल हल्द्वानी, बीडी पांडे नैनीताल, संयुक्त चिकित्सालय रामनगर में तीन सौ से पांच सौ एलपीएम क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट लग चुके हैं। इसके अलावा एसटीएच में एक हजार एलपीएम, बेस अस्पताल में प्लांट लगाने का काम चल रहा है। जनरल बीसी जोशी कोविड अस्पताल में बीएस केएल का भंडारण टैंक स्थापित है।
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यह योजना नहीं हो सकी पूरी
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में 20 केएल का ऑक्सीजन भंडारण टैंक भी बनाने की योजना पर काम शुरू हुआ। टैंक लग गया, लेकिन अभी तक क्रियाशील नहीं हो सका है। महिला अस्पताल में महीनों से आक्सीजन प्लांट लगाने का काम चल रहा है जो पूरा नहीं हो सका है। सीएमओ डॉ. भागीरथी जोशी का कहना है कि जनरेटर की दिक्कत थी, उसे दूर कर लिया गया है। महिला अस्पताल में प्लांट तीन से चार दिन में क्रियाशील हो जाएगा। मेडिकल कालेज प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी का कहना है कि टैंक लगाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ऑक्सीजन टैंक में भंडारण शुरू करने से पहले एक लाइसेंस की जरूरत होती है, बस उसकी जरूरत है। इसके आने के बाद टैंक क्रियाशील हो जाएगा।