फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Narayan Datt Tiwari born in village Baluti of Nainital district

Narayan Datt Tiwari: केंद्र से लेकर दो प्रदेशों की राजनीति के शिखर पर रहे एनडी तिवारी, नैनीताल से है नाता

Wed, 18 Oct 2023 01:53 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: हीरा मेहरा Updated Wed, 18 Oct 2023 01:53 PM IST
सार

भारत की सियासत के दिग्गज नेता नारायण दत्त तिवारी का जन्म वर्ष 1925 में नैनीताल के बल्यूटी गांव में हुआ, लेकिन उनका पैतृक घर धारी ब्लॉक के पदमपुरी में था। उन्होंने उत्तराखंड और यूपी की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। 

विज्ञापन
Narayan Datt Tiwari born in village Baluti of Nainital district
नारायण दत्त तिवारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नैनीताल जिले के गांव बल्यूटी में जन्मे नारायण दत्त तिवारी ने केंद्र से लेकर उत्तराखंड और यूपी की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। राज्य की दिशा और दशा बदलने की सोच रखने के लिए उन्हें विकास पुरुष की पहचान भी मिली।

विज्ञापन


तिवारी का जन्म वर्ष 1925 में बल्यूटी गांव में हुआ लेकिन उनका पैतृक घर धारी ब्लॉक के पदमपुरी में था। पिता पूर्णानंद तिवारी वन विभाग में अधिकारी थे। एनडी तिवारी की प्रारंभिक शिक्षा सीआरएसटी इंटर कॉलेज, फिर हल्द्वानी और बरेली में हुई। वर्ष 1942 में मात्र 17 साल में ब्रिटिश सरकार की साम्राज्यवादी नीतियों के खिलाफ पोस्टर लगाने के आरोप में अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर नैनीताल जेल भेज दिया। 
विज्ञापन


15 माह सजा के बाद वह वर्ष 1944 में रिहा हुए। वर्ष 1947 में तिवारी इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र यूनियन के अध्यक्ष चुने गए। यहीं से उन्होंने अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत की। वर्ष 1954 में तिवारी का विवाह सुशील सनवाल से हुआ लेकिन सुशीला से उनकी कोई संतान नहीं हुई। 
विज्ञापन
विज्ञापन


वर्ष 1991 में सुशीला तिवारी की मौत हो गई। राजनैतिक पारी के साथ-साथ तिवारी ने सुदूर पहाड़ से लेकर मैदान तक अनगनित विकास कार्यों को धरातल पर उतारा। नोएडा को बसाने का श्रेय भी तिवारी को ही है। 93 साल की उम्र में 18 अक्तूबर 2018 को उनका निधन हो गया।

पहली बार 1951 में बने थे विधायक
वर्ष 1951-52 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में तिवारी ने नैनीताल (उत्तर) सीट से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से चुनाव जीता। वर्ष 1963 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए। वर्ष 1965 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट से काशीपुर से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसी साल उन्हें पहली बार मंत्रिमंडल में स्थान मिला। पहली जनवरी 1976 को वह पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। वर्ष 1984 और वर्ष 1988 में भी तिवारी यूपी के सीएम रहे। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद उन्होंने तीसरे मुख्यमंत्री के रूप में वर्ष 2002 से 2007 तक राज्य की सत्ता संभाली। 19 अगस्त 2007 को तिवारी को आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया। 


पीएम बनते रहे गए
वर्ष 1991 में तिवारी ने कांग्रेस के टिकट पर नैनीताल ऊधमसिंह नगर सीट से सांसद का चुनाव लड़ा। राम लहर के चलते भाजपा के बलराज पासी ने चुनाव जीत लिया। यह वह दौर था जब कांग्रेस के पास पीएम का चेहरा नहीं था। चर्चा थी कि यदि तिवारी इस चुनाव को जीत जाते तो उनका प्रधानमंत्री बनना तय था।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed