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नैनीताल हाईकोर्ट ने दिए निर्देश: प्रदेश की सभी अदालतें वीसी नियम-2020 का करें पालन
Wed, 12 Mar 2025 12:44 PM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
Published by: हीरा मेहरा
Updated Wed, 12 Mar 2025 12:44 PM IST
सार
Uttarakhand: हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से संबंधित एक मामले की सुनवाई के बाद अमेरिका में रह रही महिला को देहरादून के पारिवारिक अदालत में लंबित एक मामले में वीसी के जरिये अपनी गवाही की अनुमति दी है।
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उत्तराखंड हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नैनीताल हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से संबंधित एक मामले की सुनवाई के बाद अमेरिका में रह रही महिला को देहरादून के पारिवारिक अदालत में लंबित एक मामले में वीसी के जरिये अपनी गवाही की अनुमति दी है।
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इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य के सभी न्यायालयों को आवश्यकतानुसार हाईकोर्ट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति विवेक भारती शर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार अमेरिका में रह रही देहरादून की माधुरी जोशी ने वीसी नियमों का हवाला देते हुए एक आवेदन दायर किया था लेकिन पारिवारिक कोर्ट ने बचाव में अपने साक्ष्य के लिए मौजूद रहने का निर्देश दिया।
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माधुरी जोशी के वकील ने तर्क दिया कि देहरादून के न्यायालय ने वीसी से गवाही दर्ज करने के आवेदन का निपटारा करते समय न्यायिक विवेक का प्रयोग नहीं किया। प्रावधान है कि वीसी सुविधाओं का उपयोग न्यायिक कार्यवाही व न्यायालय संचालित कार्यवाही के सभी चरणों में किया जा सकता है। पारिवारिक न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता-पत्नी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश देकर संबंधित न्यायालय ने जोशी के आवेदन को बिना कोई कारण बताए खारिज कर दिया ताकि उसे अपने बचाव में गवाह के रूप में पेश किया जा सके।
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कोर्ट ने आश्चर्य जताया कि पारिवारिक न्यायालय ने अपीलकर्त पत्नी की यूएसए से पूरी यात्रा के खर्च के लिए 10 हजार रुपये की एकमुश्त राशि तय की थी जो बेहद कम है। खंडपीठ ने निचली कोर्ट के इस आदेश को रद कर दिया। महिला सेंट फ्रांसिसको में क्रेडिट यूनियन बैंक में प्रशिक्षु टेलर है।