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मेरा बेटा आ जाएगा, अब उसे जाने नहीं दूंगी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 13 Aug 2021 01:57 AM IST
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My son will come, now I will not let him go, Sumit's mother got upset
रामनगर (नैनीताल)। पीरूमदारा के शांतिकुंज गली नंबर दो में रहने वाले सुमित कुमार सोंदी के घर में बृहस्पतिवार शाम लोगों का तांता लगा था। उसकी मां रजनी बदहवास थीं। उन्हें बताया नहीं गया था कि बेटा अब इस दुनिया में नहीं है। वह कह रही थीं कि बेटा अस्पताल से ठीक होकर आ जाएगा। अब वह उसे इस तरह कभी नहीं जाने देंगी।
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सुमित के पिता विजय कुमार सेना में हैं। इस समय उनकी तैनाती पश्चिम बंगाल में तैनात हैं। रजनी के अनुसार बेटा सुमित उसकी बात नहीं मानता है। इस बार उस पर सख्ती करूंगी। आसपास की महिलाएं उन्हें ढांढस बंधा रही हैं। सुमित सबसे बड़ा था। उसका एक भाई मोहित और बहन साक्षी है। मोहित ने बताया कि पिता को जानकारी दे गई है। मां की हालत को देखते हुए अभी भाई की मौत के बारे नहीं बताया गया है। मोहित के अनुसार सुबह भाई रामनगर कोसी बैराज तक जाने की बात कहकर निकला था, तब मां ने उसे मना भी किया था। यदि भाई मां की बात मान लेता तो शायद जिंदा होता।
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बर्थ डे पार्टी की खुशी मातम में बदली
रामनगर (नैनीताल)। महेंद्र सिंह नेगी अपने चाचा दीपक नेगी के साथ पीरूमदारा के आरके पुरम में रहता था। उसका बड़ा भाई जितेंद्र नेगी ढिकुली में होटल मैनेजमेंट की ट्रेनिंग ले रहा है। जिला पंचायत सदस्य पिता अमर सिंह नेगी और मां मनुली देवी पौड़ी के थलीसैंण के चौराणी गांव में ही रहते हैं। चाचा के घर में बर्थ डे मनाने की खुशी थी लेकिन दिन में जो खबर आई उससे हर कोई अवाक रह गया।
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चाचा के घर वालों ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह नौ बजे वह रामनगर जाने की बात कहकर निकला था। रात में उसका जन्मदिन मनाने के लिए तैयारी की थी। सभी दोस्तों ने उसकी जन्मदिन की पार्टी मनाने का पहले से ही प्लान बनाया था लेकिन कहां और कैसे मनाएंगे यह जानकारी किसी को नहीं थी। आरकेपुरम में भी लोगों की भीड़ जुटी हुई थी।
नादानी में बुझ गए दो घरों के चिराग
रामनगर। जरा सी नादानी से दो घरों के चिराग बुझ गए और जन्मदिन की पार्टी मातम में तब्दील हो गई। किसी को इल्म नहीं था कि यह जन्मदिन की पार्टी जिंदगी भर न भूलने वाली पार्टी बन जाएगी।

ग्रामीणों ने नदी में जाने से रोका था
रामनगर। ओखलढूंगा की प्रधान प्रीति चौरसिया ने बताया कि छात्र जब कोसी नदी के पास पहुंचे थे तब ग्रामीणों ने उन्हें नदी में नहीं आने को कहा थाए लेकिन वे नहीं माने।
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