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बागी विधायकों पर सुनवाई आज भी जारी रहेगी
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल
Updated Mon, 11 Apr 2016 10:59 PM IST
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नैनीताल। कांग्रेस के नौ बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के स्पीकर के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को भी हाईकोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी।
न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ के समक्ष सोमवार को मामले की सुनवाई हुई।
बागी विधायकों की पैरवी कर रहे आर्यमन सुंदरम, एल. नागेश्वर राव और दिनेश द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि स्पीकर द्वारा बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त करना गलत है। याचिका में कहा गया कि बागियों ने पार्टी नहीं छोड़ी थी, वे केवल केवल सरकार के खिलाफ गए थे। याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला भी दिया गया।
अपना पक्ष रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आर्यमन सुंदरम ने कहा कि अगर वो जीत भी गए तो उन्हें केवल एकेडमिक्स का फायदा होगा। उन्होंने न्यायालय से विधानसभा अध्यक्ष के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। स्पीकर की ओर से पैरवी करने पहुंचे पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल मंगलवार को इस मामले में बहस करेंगे।
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बता दें कि बागी विधायक सुबोध उनियाल, शैलारानी रावत, उमेश शर्मा काऊ, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, हरक सिंह रावत, अमृता रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल और प्रदीप बत्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 27 मार्च 2016 को विधानसभा अध्यक्ष की ओर से सभी बागी विधायकों की सदस्यता को समाप्त करने के आदेश को चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ के समक्ष सोमवार को मामले की सुनवाई हुई।
बागी विधायकों की पैरवी कर रहे आर्यमन सुंदरम, एल. नागेश्वर राव और दिनेश द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि स्पीकर द्वारा बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त करना गलत है। याचिका में कहा गया कि बागियों ने पार्टी नहीं छोड़ी थी, वे केवल केवल सरकार के खिलाफ गए थे। याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला भी दिया गया।
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अपना पक्ष रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आर्यमन सुंदरम ने कहा कि अगर वो जीत भी गए तो उन्हें केवल एकेडमिक्स का फायदा होगा। उन्होंने न्यायालय से विधानसभा अध्यक्ष के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। स्पीकर की ओर से पैरवी करने पहुंचे पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल मंगलवार को इस मामले में बहस करेंगे।
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बता दें कि बागी विधायक सुबोध उनियाल, शैलारानी रावत, उमेश शर्मा काऊ, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, हरक सिंह रावत, अमृता रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल और प्रदीप बत्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 27 मार्च 2016 को विधानसभा अध्यक्ष की ओर से सभी बागी विधायकों की सदस्यता को समाप्त करने के आदेश को चुनौती दी थी।