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Nainital News: मेडिकल कॉलेज को पहली बार मिलेगा स्थायी प्राचार्य
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हल्द्वानी। मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलने के बाद से अभी तक सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज को स्थायी प्राचार्य नहीं मिल सके। अब सभी मेडिकल कॉलेजों में प्राचार्य पदों पर नई डीपीसी होने के बाद यह पहला अवसर होगा जब मेडिकल कॉलेज में स्थायी प्राचार्य बैठेंगे। 2004 से अब तक यहां 10 प्राचार्य पदों पर रह चुके हैं।
हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय देहरादून से संबद्ध सुशीला तिवारी अस्पताल की स्थापना 1997 में हुई थी। फिर इसे मेडिकल कॉलेज बनाने की कवायद शुरु हुई लेकिन सितंबर 2003 तक यहां एमबीबीएस में सीटें नहीं भर पाने के कारण एमसीआई ने मेडिकल कॉलेज की अनुमति नहीं दी। फिर 2004 में सुशीला तिवारी अस्पताल को राजकीय मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिला। बीते दिनों सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. आर राजेश ने डीपीसी करते हुए सभी सात मेडिकल कॉलेजों में नियमित पद पर प्राचार्यों की पदोन्नति सूची जारी की है।
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2004 से अब तक रहे प्राचार्य
2004 में प्रो. एकराम लाल, प्रो.वीएस सिंह कार्यवाहक, प्रो. एसके राय चौधरी, प्रो. पीके डबराल आदि प्राचार्य एक महीने से तीन महीने के अंतराल तक विदा होते रहे। दिसंबर 2004 में फिर प्रो.एके श्रीवास्तव यहां प्राचार्य रहे जो 2008 तक पद पर रहे। इसके बाद प्रो. नारायण सिंह ज्याला 2012 तक, प्रो. आरसी पुरोहित 2015 तक, प्रो. सीएसएस रावत 2016, प्रो. सीपी भैसोड़ा जून 2016 से जुलाई 2021 तक पद पर रहे। जुलाई 2014 से वर्तमान में यहां प्रो. अरुण जोशी प्राचार्य पद पर हैं। इनका कार्यकाल भी अगस्त अंत तक ही है।
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हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय देहरादून से संबद्ध सुशीला तिवारी अस्पताल की स्थापना 1997 में हुई थी। फिर इसे मेडिकल कॉलेज बनाने की कवायद शुरु हुई लेकिन सितंबर 2003 तक यहां एमबीबीएस में सीटें नहीं भर पाने के कारण एमसीआई ने मेडिकल कॉलेज की अनुमति नहीं दी। फिर 2004 में सुशीला तिवारी अस्पताल को राजकीय मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिला। बीते दिनों सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. आर राजेश ने डीपीसी करते हुए सभी सात मेडिकल कॉलेजों में नियमित पद पर प्राचार्यों की पदोन्नति सूची जारी की है।
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2004 से अब तक रहे प्राचार्य
2004 में प्रो. एकराम लाल, प्रो.वीएस सिंह कार्यवाहक, प्रो. एसके राय चौधरी, प्रो. पीके डबराल आदि प्राचार्य एक महीने से तीन महीने के अंतराल तक विदा होते रहे। दिसंबर 2004 में फिर प्रो.एके श्रीवास्तव यहां प्राचार्य रहे जो 2008 तक पद पर रहे। इसके बाद प्रो. नारायण सिंह ज्याला 2012 तक, प्रो. आरसी पुरोहित 2015 तक, प्रो. सीएसएस रावत 2016, प्रो. सीपी भैसोड़ा जून 2016 से जुलाई 2021 तक पद पर रहे। जुलाई 2014 से वर्तमान में यहां प्रो. अरुण जोशी प्राचार्य पद पर हैं। इनका कार्यकाल भी अगस्त अंत तक ही है।
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