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मौलाना की हत्या कर शव जंगल में गाड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Thu, 14 Apr 2016 11:38 PM IST
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मुरादाबाद निवासी मौलाना का शव नवाढ़ मौला हरक सिंह गांव के जंगल में गड़ा मिला। कातिलों ने हत्या करने के बाद शव को छिपा दिया था। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर खोदकर शव बाहर निकाला। मुरादाबाद पुलिस इस मामले में मौलाना की पत्नी सहित तीन लोगों से पूछताछ कर रही है। घटना के पीछे मौलाना की पत्नी की भूमिका भी बतायी जा रही है। मौलाना मरीजों का इलाज करने हल्द्वानी आए थे।
मुरादाबाद जिले के भगतपुर थानाध्यक्ष अरविंद शर्मा ने हल्द्वानी कोतवाल आरएस मेहता को सूचना दी कि मुखानी क्षेत्र में हकीम का काम करने वाले मौलाना इरफान उर्फ असगर अली का कत्ल कर शव दफन कर दिया गया है। सूचना पर मुखानी थाने के उपनिरीक्षक रवींद्र कौशल ने भाखड़ा पुल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर नवाढ़ मौला हरक सिंह गांव के समीप जंगल में खुदाई कर शव को बाहर निकाला। मौलाना के बड़े भाई अफसर अली ने शव की शिनाख्त की। बताया कि वह रामपुर जिले के पर्वतपुर के मूल निवासी हैं।
उनके सबसे छोटे भाई इरफान उर्फ असगर मुरादाबाद जिले के डबल फाटक दस सराय चौकी के समीप दो दशक पहले जाकर रहने लगा। वे हकीम थे। कुछ समय बाद उन्होंने वहां अपना मकान बना लिया। उनके तीन पुत्र गुलफाम, गुलशेर, उसमान और बेटी महक हैं। बड़े बेटे गुलफाम ने बताया उसके पिता 10 अप्रैल को घर से हल्द्वानी के लिए चले थे, उसके बाद वापस नहीं लौटे। दूसरे दिन उनकी कार भगतपुर थाना क्षेत्र के रोशनपुर में लावारिस हालत में मिली। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया तो पता चला कि उनकी हत्या कर दी गई है। हल्द्वानी में पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव मुरादाबाद ले गए।
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हत्या के लिए पुल पर पहले से खड़े थे आरोपी
भगतपुर थानाध्यक्ष अरविंद शर्मा ने बताया हकीम मौलाना इरफान के मरीज हल्द्वानी के थे। वह मरीजों को ताबीज देकर अपने साथियों संग 10 अप्रैल को लौट रहे थे। भाखड़ा पुल के समीप गाड़ी रोककर कार में आरोपियों ने उनकी गला दबाकर हत्या कर दी। रास्ते में हत्यारोपियों के साथी मौजूद थे। उन्होंने शव को काफी दूर घसीटकर ठिकाने लगाया था। घटना के पीछे पत्नी की भूमिका मानी जा रही है।
ताऊ से लिटपकर रोने लगा भतीजा
हल्द्वानी। मौलाना के मझले भाई अकबर अली केरल में लकड़ी का कारोबार करते हैं। भाई के लापता होने की जानकारी मिलने पर वह केरल से हल्द्वानी आए थे। अपने भतीजे गुलफाम को देखते ही ताऊ अकबर की आंखें भर आईं। उन्होंने रोते हुए भतीजे को गले लगा लिया। ताऊ ने भतीजे को ढांढस बंधाया।
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मुरादाबाद जिले के भगतपुर थानाध्यक्ष अरविंद शर्मा ने हल्द्वानी कोतवाल आरएस मेहता को सूचना दी कि मुखानी क्षेत्र में हकीम का काम करने वाले मौलाना इरफान उर्फ असगर अली का कत्ल कर शव दफन कर दिया गया है। सूचना पर मुखानी थाने के उपनिरीक्षक रवींद्र कौशल ने भाखड़ा पुल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर नवाढ़ मौला हरक सिंह गांव के समीप जंगल में खुदाई कर शव को बाहर निकाला। मौलाना के बड़े भाई अफसर अली ने शव की शिनाख्त की। बताया कि वह रामपुर जिले के पर्वतपुर के मूल निवासी हैं।
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उनके सबसे छोटे भाई इरफान उर्फ असगर मुरादाबाद जिले के डबल फाटक दस सराय चौकी के समीप दो दशक पहले जाकर रहने लगा। वे हकीम थे। कुछ समय बाद उन्होंने वहां अपना मकान बना लिया। उनके तीन पुत्र गुलफाम, गुलशेर, उसमान और बेटी महक हैं। बड़े बेटे गुलफाम ने बताया उसके पिता 10 अप्रैल को घर से हल्द्वानी के लिए चले थे, उसके बाद वापस नहीं लौटे। दूसरे दिन उनकी कार भगतपुर थाना क्षेत्र के रोशनपुर में लावारिस हालत में मिली। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया तो पता चला कि उनकी हत्या कर दी गई है। हल्द्वानी में पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव मुरादाबाद ले गए।
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हत्या के लिए पुल पर पहले से खड़े थे आरोपी
भगतपुर थानाध्यक्ष अरविंद शर्मा ने बताया हकीम मौलाना इरफान के मरीज हल्द्वानी के थे। वह मरीजों को ताबीज देकर अपने साथियों संग 10 अप्रैल को लौट रहे थे। भाखड़ा पुल के समीप गाड़ी रोककर कार में आरोपियों ने उनकी गला दबाकर हत्या कर दी। रास्ते में हत्यारोपियों के साथी मौजूद थे। उन्होंने शव को काफी दूर घसीटकर ठिकाने लगाया था। घटना के पीछे पत्नी की भूमिका मानी जा रही है।
ताऊ से लिटपकर रोने लगा भतीजा
हल्द्वानी। मौलाना के मझले भाई अकबर अली केरल में लकड़ी का कारोबार करते हैं। भाई के लापता होने की जानकारी मिलने पर वह केरल से हल्द्वानी आए थे। अपने भतीजे गुलफाम को देखते ही ताऊ अकबर की आंखें भर आईं। उन्होंने रोते हुए भतीजे को गले लगा लिया। ताऊ ने भतीजे को ढांढस बंधाया।