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टनकपुर-पिथौरागढ़ टू लेन योजना
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Mon, 09 May 2016 01:10 AM IST
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टनकपुर-पिथौरागढ़ टू लेन योजना को गति मिली है। केंद्र के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने वन भूमि हस्तांतरण के लिए 12 करोड़ की राशि जारी कर दी है। ऐसे में वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दूसरे काम शुरू हो सकेंगे। मार्ग बनने से अनुमान है कि सफर के दौरान लगने वाले वक्त की भी बचत होगी।
सीमांत इलाके में तेजी से वाहनों का मूवमेंट के लिए टनकपुर-पिथौरागढ़ टू लेन की योजना पर काम चल रहा है। टनकपुर-पिथौरागढ़ में 151 किमी में 40 किमी तक(बेलखेत) तक टू लेन का काम पहले ही हो चुका है। अब आगे के 111 किमी पर कार्य किया जाना है। इस काम के लिए एनएच को वन भूमि की भी जरूरत है, जिसके लिए वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया चल रही है। अधीक्षण अभियंता सीसी जोशी कहते हैं कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय जमीन देने की पहले ही सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर चुका है। अब अंतिम अनुमति की जरूरत है।
इसके लिए वन भूमि के बदले और क्षतिपूरक वनीकरण के लिए केंद्रीय वन मंत्रालय को नेट प्रेजेंट वैल्यू जमा करनी होती है। इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने करीब 12 करोड़ रुपये जारी कर दिये हैं। वन भूमि मिलने के बाद अन्य कार्य और तेजी से हो सकेंगे। टू लेन होने से वाहन दुर्घटना और कम होगी। सामान्य तौर पर टनकपुर से पिथौरागढ़ पहुंचने में निजी वाहन से करीब पांच घंटे तक लग जाते हैं। अगर टू लेन होता है, तो फौरी अनुमान है कि एक घंटे की यात्रियों की बचत होगी। संभावना है कि चार घंटे में यात्री सफर पूरा कर सकेंगे।
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तीन बाईपास भी बनेंगे
हल्द्वानी। टनकपुर- पिथौरागढ़ मार्ग के टू लेन होने के साथ बीच के महत्वपूर्ण जगहों पर बाईपास बनाने का फैसला किया गया है, जिससे शहर के जाम से वाहन स्वामी बच सकें। अधीक्षण अभियंता सीसी जोशी के अनुसार चंपावत, लोहाघाट और पिथौरागढ़ के शहर की जगह बाईपास से वाहन गुजरेंगे।
सीमांत इलाके में तेजी से वाहनों का मूवमेंट के लिए टनकपुर-पिथौरागढ़ टू लेन की योजना पर काम चल रहा है। टनकपुर-पिथौरागढ़ में 151 किमी में 40 किमी तक(बेलखेत) तक टू लेन का काम पहले ही हो चुका है। अब आगे के 111 किमी पर कार्य किया जाना है। इस काम के लिए एनएच को वन भूमि की भी जरूरत है, जिसके लिए वन भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया चल रही है। अधीक्षण अभियंता सीसी जोशी कहते हैं कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय जमीन देने की पहले ही सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर चुका है। अब अंतिम अनुमति की जरूरत है।
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इसके लिए वन भूमि के बदले और क्षतिपूरक वनीकरण के लिए केंद्रीय वन मंत्रालय को नेट प्रेजेंट वैल्यू जमा करनी होती है। इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने करीब 12 करोड़ रुपये जारी कर दिये हैं। वन भूमि मिलने के बाद अन्य कार्य और तेजी से हो सकेंगे। टू लेन होने से वाहन दुर्घटना और कम होगी। सामान्य तौर पर टनकपुर से पिथौरागढ़ पहुंचने में निजी वाहन से करीब पांच घंटे तक लग जाते हैं। अगर टू लेन होता है, तो फौरी अनुमान है कि एक घंटे की यात्रियों की बचत होगी। संभावना है कि चार घंटे में यात्री सफर पूरा कर सकेंगे।
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तीन बाईपास भी बनेंगे
हल्द्वानी। टनकपुर- पिथौरागढ़ मार्ग के टू लेन होने के साथ बीच के महत्वपूर्ण जगहों पर बाईपास बनाने का फैसला किया गया है, जिससे शहर के जाम से वाहन स्वामी बच सकें। अधीक्षण अभियंता सीसी जोशी के अनुसार चंपावत, लोहाघाट और पिथौरागढ़ के शहर की जगह बाईपास से वाहन गुजरेंगे।