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जमरानी बांध : खनन प्रभावित क्षेत्र का होगा अध्ययन

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 17 Oct 2020 02:27 AM IST
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Jamrani Dam: Mining affected area will be studied
हल्द्वानी। जमरानी बांध परियोजना को तो केंद्र सरकार की ओर से मंजूरी मिल चुकी है और एशियन डेवलेपमेंट बैंक (एडीबी) ने भी परियोजना को वित्तीय मदद देने में हामी भरी है। मगर बांध के निर्माण में पुनर्वास का मुद्दा सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आया है। जमरानी बांध परियोजना को लेकर शुक्रवार को हुई एक्सपर्ट कमेटी की बैठक में पुनर्वास और मुआवजा दो मुद्दे प्रमुखता से उभरकर सामने आए। पुनर्वास के लिए जमीन कहां और कब तक तलाशी जाएगी, यह तय नहीं हो पाया है।
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हाईकोर्ट के निर्देश पर बांध परियोजना के काम में तेजी आई और इसे केंद्र के स्तर पर मंजूरी भी मिल गई लेकिन अभी तक पुनर्वास का मामला साफ नहीं हुआ है। पुनर्वास के लिए 821 एकड़ जमीन की दरकार है। ऊधमसिंह नगर के तमाम इलाकों में तलाश के बाद पुनर्वास के लिए करीब 400 एकड़ जमीन सितारगंज जेल परिसर में उपलब्ध हो पाई है।
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वह भी हाईकोर्ट की कुछ शर्तों को पूरा करने के बाद ही मिल पाएगी। इसके अलावा प्राग फार्म, बनबसा आदि स्थानों पर भी जमीन की तलाश की गई लेकिन उस बारे में कुछ तय नहीं हो सका है। पुनर्वास के लिए जमीन तलाशने के अलावा बांध स्थल का आर्थिक मूल्यांकन कराना जरूरी है।
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पुनर्वास को लेकर जमीन तलाशने का काम जारी है। आर्थिक मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञ की नियुक्ति कर ली जाएगी। शासन को पुनर्वास की प्राथमिकता से अवगत कराया गया है। जल्द इसका हल निकाल लिया जाएगा। - संजय शुक्ल, मुख्य अभियंता सिंचाई विभाग।
खनन प्रभावित क्षेत्र का होगा अध्ययन
हल्द्वानी। कोविड 19 के चलते छह माह से तक ठप जमरानी बांध परियोजना को लेकर अब कुछ हलचल हुई है। बांध परियोजना की एक्सपर्ट कमेटी की शुक्रवार को हुई बैठक में मेनटेक कंपनी की ओर से किए गए डूब क्षेत्र के सामाजिक प्रभाव आकलन (एसआईए) रिपोर्ट पर मंथन किया गया। कमेटी ने राजस्व विभाग से जमरानी के डूब क्षेत्र में खनन प्रभावित क्षेत्र की विस्तृत रिपोर्ट लेने और क्षेत्र के अध्ययन पर सहमति जताई है।
एक्सपर्ट कमेटी के अध्यक्ष पीसी नौटियाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में सिंचाई विभाग के विशेषज्ञ अभियंताओं ने अपनी राय रखी। मुख्य अभियंता संजय शुक्ल ने पुनर्वास के अलावा डूब क्षेत्रवासियों की ओर से रखी गईं 12 मांगों से भी कमेटी को अवगत कराया। ग्रामीणों को लारा एक्ट के तहत दी जाने वाली सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। अब पांच नवंबर को एसआईए के टीम लीडर सर्वे रिपोर्ट को लेकर प्रजेंटेशन देंगे। पुनर्वास की अनुशंसा के साथ रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेजी जा रही है। बैठक में सिंचाई विभाग के सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता एमसी पांडे, समाज विज्ञानी डॉ. पीसी जोशी, ईई जमरानी (पुनर्वास) बीबी पांडे, समाज विज्ञानी धर्मेंद्र शर्मा, एई शाहनवाज, एचएन कापड़ी, डूब क्षेत्र के प्रतिनिधि प्रधान नवीन चंद्र पलड़िया आदि मौजूद थे।
हैड़ाखान मंदिर का नहीं करेंगे विस्थापन
बैठक में बताया गया कि हैड़ाखान मंदिर डूब क्षेत्र में आने के बावजूद उसका विस्थापन नहीं किया जा रहा है। मंदिर को उसी स्थान पर ऊंचा उठाया जाएगा। इस पर करोड़ों की लागत आने की संभावना है।

प्रतिपूर्ति पाने के हकदार हैं प्रभावित परिवार
जमरानी बांध की एसआईए रिपोर्ट जल्द ही प्रकाशित होगी इसमें कहा गया है कि समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए बनाए जा रहे बांध से प्रभावित होने वाले परिवारों को इसके एवज में प्रतिपूर्ति पाने का हक है। उनकी प्रतिपूर्ति की मांग को कमतर नहीं आंका जा सकता है।
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