पतंजलि ठगी मामला: हाईकोर्ट ने निचली अदालत के रवैये पर जताई नाराजगी, दो सप्ताह में फैसला देने के दिए निर्देश
नैनीताल हाईकोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद और दिव्या फार्मेसी से जुड़े ठगी मामले में हरिद्वार की निचली अदालत को दो सप्ताह के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया है।
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नैनीताल हाईकोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और दिव्या फार्मेसी से जुड़े बहुचर्चित ठगी मामले में हरिद्वार की निचली अदालत को दो सप्ताह के भीतर फैसला देने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने निचली अदालत के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करना और प्रशासनिक पत्राचार को आधार बनाकर सुनवाई टालना न्यायिक अनुशासन के विरुद्ध है।
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामला जून 2022 का है। पतंजलि के प्रतिनिधि रमण पंवार की शिकायत पर कनखल थाने में मुख्य आरोपी राकेश महरा और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के दौरान आरोपी और उनकी बेटियों के बैंक खातों में जमा करीब 31.21 करोड़ की राशि फ्रीज कर दी गई थी। फ्रीज राशि को मुक्त कराने के लिए पीड़ित पक्ष की ओर से आवेदन किया गया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई 2025 को ट्रायल कोर्ट को आवेदन का कानून के अनुसार निस्तारण करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। इसके बावजूद हरिद्वार की ट्रायल कोर्ट ने 22 जुलाई 2026 को यह कहते हुए फैसला टाल दिया कि हाईकोर्ट स्तर से प्रशासनिक तौर पर कुछ टिप्पणियां मांगी गई हैं।
इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। 24 अगस्त 2026 को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट देश की सर्वोच्च अदालत है। प्रशासनिक पत्राचार का हवाला देकर उसके आदेश का पालन नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने इसे न्यायिक अनुशासन का गंभीर उल्लंघन माना। आरोपी पक्ष ने ट्रायल कोर्ट के न्यायिक अधिकारी पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए मामले को दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और संबंधित याचिकाओं का निपटारा कर दिया। हाईकोर्ट ने हरिद्वार के न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर, 15 जुलाई 2026 को पूरी हो चुकी सुनवाई के आधार पर, धारा 451 सीआरपीसी के तहत दाखिल आवेदनों पर अंतिम निर्णय पारित किया जाए। इस आदेश से ₹31.21 करोड़ की फ्रीज राशि के निस्तारण का रास्ता साफ हो गया है और ट्रायल कोर्ट को अब निर्धारित समय सीमा में फैसला करना होगा।