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मार्ट ने कैरी बैग के छह रुपये काटे तो आयोग ने लगाया 31000 जुर्माना
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नैनीताल। कैरी बैग (थैला) ने हल्द्वानी के एक प्रतिष्ठान प्रबंधन पर इकतीस हजार रुपये का जुर्माना लगवा दिया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने घरेलू सामान के साथ कैरी बैग का मूल्य भी वसूलने के मामले में सुनवाई की।
इस मामले में आयोग ने हल्द्वानी के एक प्रतिष्ठान प्रबंधन को डेढ़ महीने के भीतर वादी को मानसिक वेदना और प्रतिपूर्ति के रूप में 25 हजार रुपये, वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा अनुचित व्यापारिक व्यवहार के लिए अर्थदंड के रूप में एक हजार रुपये आयोग के जिला कार्यालय के कोष में जमा करने का फैसला सुनाया है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक हल्द्वानी देवलचौड़ खाम निवासी अतुल पंत पुत्र गोविंद बल्लभ पंत ने हल्द्वानी स्थित बी मार्ट के प्रभारी के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया। कहा कि उन्होंनेे इसी साल 23 जून को बी मार्ट से तीन सौ रुपये का घरेलू सामान खरीदा। मार्ट ने वह सामान उन्हें एक कैरी बैग में दिया।
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वादी का कहना था कि जब उन्होंने घर जाकर बिल से सामान मिलाया तो पता चला कि मार्ट प्रबंधन ने सामान के बिल के साथ साथ कैरी बैग के छह रुपये अतिरिक्त लिए हैं। वादी का कहना था कि यह नियम विरुद्ध है क्योंकि कैरी बैग में प्रतिष्ठान का विज्ञापन भी छपा था।
आयोग के अध्यक्ष रमेश कुमार जायसवाल, सदस्य विजय लक्ष्मी थापा, लक्ष्मण सिंह रावत ने मामले की सुनवाई की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने बी मार्ट प्रबंधन पर सेवा में कमी पाते हुए वादी को तीस हजार रुपये अदा करने और अनुचित व्यापारिक व्यवहार के लिए अर्थदंड के रूप में एक हजार रुपये आयोग के जिला कार्यालय के कोष में जमा करने का आदेश दिए हैं।
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इस मामले में आयोग ने हल्द्वानी के एक प्रतिष्ठान प्रबंधन को डेढ़ महीने के भीतर वादी को मानसिक वेदना और प्रतिपूर्ति के रूप में 25 हजार रुपये, वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा अनुचित व्यापारिक व्यवहार के लिए अर्थदंड के रूप में एक हजार रुपये आयोग के जिला कार्यालय के कोष में जमा करने का फैसला सुनाया है।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक हल्द्वानी देवलचौड़ खाम निवासी अतुल पंत पुत्र गोविंद बल्लभ पंत ने हल्द्वानी स्थित बी मार्ट के प्रभारी के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया। कहा कि उन्होंनेे इसी साल 23 जून को बी मार्ट से तीन सौ रुपये का घरेलू सामान खरीदा। मार्ट ने वह सामान उन्हें एक कैरी बैग में दिया।
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वादी का कहना था कि जब उन्होंने घर जाकर बिल से सामान मिलाया तो पता चला कि मार्ट प्रबंधन ने सामान के बिल के साथ साथ कैरी बैग के छह रुपये अतिरिक्त लिए हैं। वादी का कहना था कि यह नियम विरुद्ध है क्योंकि कैरी बैग में प्रतिष्ठान का विज्ञापन भी छपा था।
आयोग के अध्यक्ष रमेश कुमार जायसवाल, सदस्य विजय लक्ष्मी थापा, लक्ष्मण सिंह रावत ने मामले की सुनवाई की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने बी मार्ट प्रबंधन पर सेवा में कमी पाते हुए वादी को तीस हजार रुपये अदा करने और अनुचित व्यापारिक व्यवहार के लिए अर्थदंड के रूप में एक हजार रुपये आयोग के जिला कार्यालय के कोष में जमा करने का आदेश दिए हैं।