फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   If Kumaoni language becomes stronger in every house, you will get recognition in society

हर घर में मजबूत हो कुमाऊंनी भाषा, तो मिलेगी समाज में पहचान

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 12 Nov 2019 01:36 AM IST
विज्ञापन
If Kumaoni language becomes stronger in every house, you will get recognition in society
नौकुचियाताल में कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन में मौजूद साहित्यिकार डॉ प्रयाग जोशी । अमर उजाला - फोटो : BHIMTAL
भीमताल (नैनीताल)। भक्ति धाम मंदिर नौकुचियाताल में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन में दूसरे दिन सोमवार को विभिन्न राज्यों के साहित्यकारों ने कुमाऊंनी भाषा को बचाने को लेकर मंथन किया।
विज्ञापन

संयोजक डॉ. हयात सिंह रावत ने कहा कि पहाड़ की पहचान कुमाऊंनी भाषा से है, लेकिन धीरे-धीरे पहाड़ के लोग ही कुमाऊंनी भाषा से दूर होते जा रहे हैं।
कहा कि अगर कुमाऊंनी भाषा को नहीं बचाया गया तो एक दिन युवा पीढ़ी कुमाऊंनी भाषा का अस्तित्व तक नहीं पहचान पाएगी। साहित्यकारों ने राज्य सरकार से कुमाऊंनी भाषा को जीवित रखने के लिए सहयोग करने की मांग की। कुमाऊंनी भाषा साहित्य और संस्कृति प्रचार समिति अल्मोड़ा की ओर से आयोजित सम्मेलन में दिल्ली, अल्मोड़ा, देहरादून, हल्द्वानी, गाजियाबाद, पिथौरागढ़, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, लखनऊ, फरीदाबाद के साहित्यकारों ने प्रतिभाग कर अपने विचार रखे।
विज्ञापन

सम्मेलन में हंसमुख गिरीश बिष्ट की पुस्तक का विमोचन पद्मश्री डॉ. शेखर पाठक, वरिष्ठ पत्रकार राजीव लोचन साह, तारा चंद्र त्रिपाठी, डॉ. प्रयाग जोशी, गोविंद वल्लभ बहुगुणा, नवीन पाठक, केपीएस अधिकारी ने किया। सम्मेलन में साहित्यकारों ने कुमाऊंनी कवि सम्मेलन में प्रस्तुतियों से वाहवाही लूटी। कार्यक्रम के अंत में मोहन जोशी, गिरीश बिष्ट, ब्रिगेडियर डीके जोशी और नित्यानंद जोशी को साहित्य के क्षेत्र में बेहतर काम के लिए नकद धनराशि देकर पुरस्कृत किया। इस दौरान जिपं सदस्य अनिल चनौतिया, जमन बिष्ट, हरीश रौतेला, पान सिंह राणा आदि रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

हमें कुमाऊंनी भाषा को जीवित रखने के लिए आगे आना होगा। पहाड़ की कुमाऊंनी भाषा को पहचान दिलाने में सरकार सहयोग करे, ताकि युवा पीढ़ी में इसके प्रति लगाव बढ़े।
डॉ. प्रयाग जोशी, साहित्यकार
2- कुमाऊंनी भाषा पहाड़ की धरोहर है। इसे बचाने के लिए हर परिवार को आगे आकर बच्चों को कुमाऊंनी भाषा के बारे में बताना होगा। साथ ही प्रदेश में कुमाऊंनी भाषा से जुड़ी प्रतियोगिताएं कराकर प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कृत और सम्मानित करना होगा, ताकि लोग भाषा से जुड़ सकें।
तारा चंद्र त्रिपाठी, साहित्यकार
3- हमें हिंदी, अंग्रेजी के साथ कुमाऊंनी भाषा को भी महत्व देना होगा। कुमाऊंनी भाषा से लोगों को जुड़ना होगा, ताकि कुमाऊंनी भाषा का अस्तित्व बना रहे। इसके लिए सरकार को भी पहल करनी होगी।

पद्मश्री डॉ. शेखर पाठक, साहित्यकार
4- हम कुमाऊंनी भाषा को भूलते जा रहे हैं। हमें कुमाऊंनी भाषा को बचाने लिए गंभीर होकर एकसाथ खड़ा होना होगा। साथ ही युवाओं को भी कुमाऊंनी भाषा के प्रति लगाव रखना होगा।
राजीव लोचन साह, वरिष्ठ पत्रकार
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed