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खास पहचान बन सकती है उपेक्षित कब्र
मदन बिष्ट/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Thu, 10 Mar 2016 01:23 AM IST
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उपेक्षित कब्र
- फोटो : मदन बिष्ट
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उत्तराखंड सरकार ने पर्यटन क्षेत्र में नई विधा को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। इसका नाम है सेमिट्री टूरिज्म। इसके तहत अपने पूर्वजों, आदर्श, महापुरुषों से जुड़ी याद को ताजा करने के इच्छुक देशी, विदेशी पर्यटकों को यहां आकर्षित किया जाएगा। इसके बावजूद प्रदेशभर में तमाम विदेशियों की कब्र जहां-तहां उपेक्षित हैं।
जिम कार्बेट के परिजनों की कब्र सूखाताल नैनीताल में है। वहीं कालाढूंगी संग्रहालय के परिसर में जिम कार्बेट के कुत्ते रॉबिन और रोशिना की कब्र बनी है। जिसे देखकर तमाम लोग किताब, फिल्मों से जुड़ी पुरानी यादें ताजा करते हैं। फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी भी करते हैं। इसी प्रकार रामनगर में खाद्य प्रसंस्करण संस्थान परिसर में भी तराई भाबर एस्टेट के सुपरिटेंडेंट इआन डॉगलस फिजराल्ड कैंपबेल की कब्र बनी है। जिसकी समुचित देखभाल उद्यान विभाग नहीं कर पाता।
विशेषज्ञता का भी अभाव है। कब्र में लगे संगमरमर के पत्थर में अंकित है कि छह दिसंबर 1915 को सीताबनी के जंगल में सुपरिटेंडेंट इआन की मृत्यु हुई थी। यह जंगल रामनगर वन प्रभाग के कोटा रेंज का भाग है। इआन 1901 से तराई भाबर के सुपरिटेंडेंट थे।
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वह अपने पिता 60वीं राइफल्स के कर्नल सर ई. फिजराल्ड कैंपबेल के आठवें पुत्र थे जबकि दादा का नाम सर थियोफिलस मेटकैलर अंकित है। कुछ लोग विदेशी अफसरों, शासकों को शोषक मानते हैं। इस कारण भी उनसे जुड़ी यादों को संरक्षित नहीं किया जाता लेकिन रामनगर में बनी सुपरिटेंडेंट इआन की कब्र पर कई लोग आस्था रखते हैं। वे वहां नतमस्तक होकर रुपये तक चढ़ाते हैं।
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जिम कार्बेट के परिजनों की कब्र सूखाताल नैनीताल में है। वहीं कालाढूंगी संग्रहालय के परिसर में जिम कार्बेट के कुत्ते रॉबिन और रोशिना की कब्र बनी है। जिसे देखकर तमाम लोग किताब, फिल्मों से जुड़ी पुरानी यादें ताजा करते हैं। फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी भी करते हैं। इसी प्रकार रामनगर में खाद्य प्रसंस्करण संस्थान परिसर में भी तराई भाबर एस्टेट के सुपरिटेंडेंट इआन डॉगलस फिजराल्ड कैंपबेल की कब्र बनी है। जिसकी समुचित देखभाल उद्यान विभाग नहीं कर पाता।
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विशेषज्ञता का भी अभाव है। कब्र में लगे संगमरमर के पत्थर में अंकित है कि छह दिसंबर 1915 को सीताबनी के जंगल में सुपरिटेंडेंट इआन की मृत्यु हुई थी। यह जंगल रामनगर वन प्रभाग के कोटा रेंज का भाग है। इआन 1901 से तराई भाबर के सुपरिटेंडेंट थे।
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वह अपने पिता 60वीं राइफल्स के कर्नल सर ई. फिजराल्ड कैंपबेल के आठवें पुत्र थे जबकि दादा का नाम सर थियोफिलस मेटकैलर अंकित है। कुछ लोग विदेशी अफसरों, शासकों को शोषक मानते हैं। इस कारण भी उनसे जुड़ी यादों को संरक्षित नहीं किया जाता लेकिन रामनगर में बनी सुपरिटेंडेंट इआन की कब्र पर कई लोग आस्था रखते हैं। वे वहां नतमस्तक होकर रुपये तक चढ़ाते हैं।