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उफ गर्मी ! नींद रातभर क्यों नहीं आती 

Fri, 20 May 2016 01:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी। Updated Fri, 20 May 2016 01:03 AM IST
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Huh heat! Why do not sleep through the night
गर्मी - फोटो : अमर उजाला
 तराई भाबर सहित कुमाऊं के पर्वतीय इलाकों में रातें अब पहले के मुकाबले अधिक गरम हो रही हैं। मई की गरमी ने तराई भाबर के शहर और कस्बों की नाइट लाइफ को भी बदल दिया है। हल्द्वानी शहर ही अब करीब दो घंटे देर से सो रहा है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक दिन और रात के तापमान में करीब चार डिग्री सेंटीग्रेट का ही अंतर महसूस कि या जा रहा है। तराई के अधिकतर शहरों और कस्बों का यही हाल है। हालांकि ऊंचाई वाले कुछ इलाकों में रात का तापमान अब भी बेहद कम है, पर रात का न्यूनतम तापमान बढ़ रहा है।
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हल्द्वानी की बात करें तो यह शहर रात को दस बजते-बजते सोने लगता है। मई की गरमी ने इस जीवन शैली को अब बदल दिया है। लोग आजकल करीब दो घंटा देर से सो रहे हैं। बाजारों में जहां रात के नौ बजे सन्नाटा पसरने लगता था, वहां अब रात को दस बजे तक भी चहल-पहल का आलम है। बाजार में दुकानें रात दस बजे तक खुल रही हैं। यही हाल तराई के अन्य शहरों और कस्बों का भी है।
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दिन में धूल भरी हवाएं, तपती धूप तो रात को गरम हवाओं ने भी लोगों का जीना मुहाल किया हुआ है। हाल यह है कि दिन और रात के तापमान में बमुश्किल चार डिग्री तक का ही अंतर रह गया है। तराई में जहां दिन में औसत अधिकतम तापमान बृहस्पतिवार को 40 डिग्री तक रिकार्ड किया गया, वहीं रात का तापमान 34 डिग्री तक महसूस किया गया। मौमस विज्ञानियों के मुताबिक रात और दिन के तापमान का यह अंतर कम भी हो रहा है। मतलब यह भी रातें भी अब और गरम साबित हो रही हैं।
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पहाड़ की आर्थिकी पर भी चोट
हल्द्वानी। रात और दिन के तापमान का यह अंतर घटने का पर्वतीय क्षेत्रों पर भी खासा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक फलों में सिटरस के लिए यह बेहद जरूरी है। कुमाऊं में हल्द्वानी, कालाढूंगी, चोरगलिया, रामनगर आदि लीची के लिए जाने जाते हैं। यह अब आम शिकायत होने लगी है कि  लीची में रस कम हो रहा है।



कंक्रीट का जंगल गरम कर रहा हैं रातों को
-रात और दिन के तापमान के अंतर को मौसम विज्ञान की भाषा में डाइअरनल तापमान कहा जाता है। मौसम विज्ञानियों की नजर में यह तापमान जलवायु परिवर्तन के हिसाब से बेहद महत्वपूर्ण है। रेगिस्तानी इलाकों में रात बेहद ठंडी होती है और दिन बेहद गरम। शहरी इलाकों में रात और दिन के तापमान के अंतर में कमी की एक वजह तेजी से बढ़ता शहरीकरण, औद्योगिकीकरण भी है।
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