एचएमटी की बंदी का आया आदेश 

ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी। Updated Thu, 01 Dec 2016 12:31 AM IST
HMT has ordered the closure of
HMT ranibagh - फोटो : AmarUjala
एचएमटी रानीबाग इकाई को चार शर्तों के साथ बंद करने के आदेश से खलबली मच गई है। फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से सभी 146 कर्मियों को बर्खास्त करने का आदेश आनन-फानन में चस्पा कर दिया गया है।
कर्मियों को सुबह फैक्ट्री में नहीं जाने दिया गया। बाद में एमडी के बर्खास्तगी के आदेश वापस लेने के बाद फैक्ट्री कर्मी अंदर जा सके। 

एचएमटी रानीबाग को बंद करने का निर्णय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक समिति ने लिया था। बीती 23 नवंबर को भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के उप सचिव की ओर से एचएमटी वॉच कंपनी के प्रबंध निदेशक बीएम शिवा शंकर को एचएमटी की बंदी के संबंध में पत्र लिखा गया।

बंदी के लिए चार शर्तें भी थीं। एचएमटी कामगार संघ के अध्यक्ष भगवान सिंह और महामंत्री मुकेश तिवारी ने कर्मियों को एक जनवरी 1997 से रिवाइस वेतनमान के साथ एरियर देने और ट्रेनिंग अवधि को भी सेवाकाल में जोड़ने की मांग की थी।

एचएमटी की बंदी का आदेश आने के साथ ही स्थानीय प्रबंधन ने मंगलवार रात ही सभी 146 कर्मियों के बर्खास्तगी पत्र चस्पा करा दिए। बर्खास्तगी पत्र प्रत्येक कर्मचारी को संबोधित करते हुए निकाला गया था।

बुधवार सुबह एचएमटी के गेट बंद रहे और फैक्ट्री भी पूर्ण रूप से बंद कर दी गई थी। सभी कर्मचारी काफी समय तक बाहर खड़े रहे। बाद में प्रबंध निदेशक बीएम शिवा शंकर ने यूनिट प्रमुख की ओर से 146 कर्मियों को जारी किए गए बर्खास्तगी के आदेश को वापस ले लिया।

इधर, सिंह का कहना है कि प्रबंधन ने एक पक्षीय फैसला लिया और ये तानाशाही है। 

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