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कंडक्टर की बेटी प्रशंसा ने किया हाईस्कूल टॉप
जितेंद्र पपनै रामनगर।
Updated Thu, 26 May 2016 12:16 AM IST
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हाईस्कूल टॉपर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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‘मुझे इतनी उम्मीद थी कि मैं मेरिट लिस्ट में जगह बनाऊंगी, लेकिन टॉप कर लूंगी इसकी उम्मीद नहीं थी। पर जैसे ही स्कूल से फोन आया कि मैने स्कूल टॉप किया तो यह सुनकर मैं सन्न रह गई। खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। मानों मुझे पर लग गए हों।’ यह कहना है हाईस्कूल में मेरिट लिस्ट में टॉप करने वालीं कंडक्टर की बेटी प्रशंसा पोखरियाल का।
शिक्षा में गरीबी आड़े आती है, इस बात को झूठा साबित कर दिखाया है प्रशंसा ने। रामनगर के भरतपुरी निवासी रामकिशोर पोखरियाल यूजर्स की बसों में 20 साल से परिचालक का काम करते हैं। मूलरूप से थैलीसैंण पौड़ी गढ़वाल के पोखरी गांव निवासी ने बच्चों की पढ़ाई के चलते भरतपुरी में छोटा मकान बना रखा है। जहां एक भाई व एक बहन के साथ टॉपर की दादी व मां मीनाक्षी गृहणी इनकी देखरेख में जुटी रहती है। हाईस्कूल टॉपर प्रशंसा पोखरियाल को यह भी उम्मीद नहीं थी कि वह टॉप करेंगी। उसने कहा कि मुझे इतनी उम्मीद जरूर थी कहीं न कहीं मैं मेरिट लिस्ट में अपना स्थान बना लूंगी। लेकिन जैसे ही परीक्षाफल घोषित हुआ तो स्कूल से उसके पास फोन आया कि उसने हाईस्कूल में टॉप किया है।
यह खबर सुन मैं एक बार के लिये सन्न रह गयी। मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। तब मुझे बोर्ड मुख्यालय बुलाया गया। फिर अपने कालेज आई, घर आने के बाद मुझे विधानसभ अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने पीडब्लूडी में सम्मानित करने के लिये बुला लिया। इसके साथ ही प्रशंसा की मां मीनाक्षी के मुंह से खुशी के मारे आवाज ही नहीं निकल पा रही थी कि मैं क्या बोलूं। परिवार में खुशी इतनी कि देर शाम तक खाना तक नहीं खाया था।
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प्रशंसा व उसके परिजनों को मोहल्ले वाले देर रात तक उसके घर पहुंचकर बधाई देने में लगे रहे। पिता रामकिशोर पोखरियाल गाड़ी के साथ पहाड़ गये हुए थे। उन्हें तो रामनगर आकर ही अपनी बेटी के टॉपर होने का समाचार मिला। इसके बाद से ही उनका मोबाइल भी घनघनाना शुरू हो गया। उन्होंने बताया मैं तो कम पढ़ पाया, लेकिन मेरी बेटी प्रशंसा ने हाईस्कूल टॉप कर पूरे खानदान का नाम रोशन कर दिया है। बच्चों की खातिर ही मैं पहाड़ छोड़ यहां आया था। आज मेरा पलायन सफल हो गया है। प्रशंसा ने स्थानीय अर्धसरकारी स्कूल एमपी इंटर कालेज में 10 वीं की परीक्षा दी थी।
जिसमें उसने 500 में से 485 अंकों के साथ 97 प्रतिशत अंक पाकर श्रेष्ठता सूची में प्रथम स्थान हासिल किया है। प्रशंसा टीचर बनना चाहती हैं। उसने बताया यदि बिना किसी दबाव के जितनी भी देर पढ़ा जाए उसे मन से पढ़ा जाए, तो कामयाबी अवश्य मिलेगी। उसने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के साथ ही गुरुजनों को दिया है।
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शिक्षा में गरीबी आड़े आती है, इस बात को झूठा साबित कर दिखाया है प्रशंसा ने। रामनगर के भरतपुरी निवासी रामकिशोर पोखरियाल यूजर्स की बसों में 20 साल से परिचालक का काम करते हैं। मूलरूप से थैलीसैंण पौड़ी गढ़वाल के पोखरी गांव निवासी ने बच्चों की पढ़ाई के चलते भरतपुरी में छोटा मकान बना रखा है। जहां एक भाई व एक बहन के साथ टॉपर की दादी व मां मीनाक्षी गृहणी इनकी देखरेख में जुटी रहती है। हाईस्कूल टॉपर प्रशंसा पोखरियाल को यह भी उम्मीद नहीं थी कि वह टॉप करेंगी। उसने कहा कि मुझे इतनी उम्मीद जरूर थी कहीं न कहीं मैं मेरिट लिस्ट में अपना स्थान बना लूंगी। लेकिन जैसे ही परीक्षाफल घोषित हुआ तो स्कूल से उसके पास फोन आया कि उसने हाईस्कूल में टॉप किया है।
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यह खबर सुन मैं एक बार के लिये सन्न रह गयी। मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। तब मुझे बोर्ड मुख्यालय बुलाया गया। फिर अपने कालेज आई, घर आने के बाद मुझे विधानसभ अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने पीडब्लूडी में सम्मानित करने के लिये बुला लिया। इसके साथ ही प्रशंसा की मां मीनाक्षी के मुंह से खुशी के मारे आवाज ही नहीं निकल पा रही थी कि मैं क्या बोलूं। परिवार में खुशी इतनी कि देर शाम तक खाना तक नहीं खाया था।
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प्रशंसा व उसके परिजनों को मोहल्ले वाले देर रात तक उसके घर पहुंचकर बधाई देने में लगे रहे। पिता रामकिशोर पोखरियाल गाड़ी के साथ पहाड़ गये हुए थे। उन्हें तो रामनगर आकर ही अपनी बेटी के टॉपर होने का समाचार मिला। इसके बाद से ही उनका मोबाइल भी घनघनाना शुरू हो गया। उन्होंने बताया मैं तो कम पढ़ पाया, लेकिन मेरी बेटी प्रशंसा ने हाईस्कूल टॉप कर पूरे खानदान का नाम रोशन कर दिया है। बच्चों की खातिर ही मैं पहाड़ छोड़ यहां आया था। आज मेरा पलायन सफल हो गया है। प्रशंसा ने स्थानीय अर्धसरकारी स्कूल एमपी इंटर कालेज में 10 वीं की परीक्षा दी थी।
जिसमें उसने 500 में से 485 अंकों के साथ 97 प्रतिशत अंक पाकर श्रेष्ठता सूची में प्रथम स्थान हासिल किया है। प्रशंसा टीचर बनना चाहती हैं। उसने बताया यदि बिना किसी दबाव के जितनी भी देर पढ़ा जाए उसे मन से पढ़ा जाए, तो कामयाबी अवश्य मिलेगी। उसने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के साथ ही गुरुजनों को दिया है।