राष्ट्रपति शासन पर दोनों पक्षों की दलील पूरी, कल आ सकता है फैसला
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बुधवार को नैनीताल हाईकोर्ट में राष्ट्रपति शासन पर दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो गई। अब कल यानी गुरुवार को अगली सुनवाई होगी। बुधवार को शाम पांच बजे तक कोर्ट में सुनवाई चली।
दलीलें पूरी होने पर यह संभावना जताई जा रही है कि गुरुवार को फैसला आ सकता है। सुनवाई के लिए कोर्ट ने गुरुवार को दोपहर दो बजे का समय दिया है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में लगे राष्ट्रपति शासन पर कड़ा रुख अख्तियार किया। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति राजा नहीं हैं। हाईकोर्ट के इस रवैये से उत्तराखंड में लगे राष्ट्रपति शासन को गलत ठहराए जाने की संभावना प्रबल हो गई है।
सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश ने कहा की पूर्ण शक्ति किसी को भी भ्रष्ठ कर सकती है और राष्ट्रपति भी गलत हो सकते हैं। ऐसे में उनके फैसलों की समीक्षा हो सकती है। उन्होंने कहा की सभी न्यायालयों के आदेशों के न्यायिक रिव्यू का अधिकार भारत के न्यायालयों को है। बहस के दौरान जजों की सख्ती और तथ्यों से ऐसी संभावना बन रही है।
उधर, याचिकाकर्ता हरीश रावत के अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायलय से कहा की विधानसभा अध्यक्ष के बिल स्वीकृत कहने और राज्यपाल के विवादित कहने से राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया जा सकता।
बुधवार को सुनवाई में अपनी दलील पेश करते हुए हाईकोर्ट में असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा की गोपनीय कागजों के अनुसार नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट द्वारा राज्यपाल को लिखे ख़त में कहा गया था की 27 विधायकों ने फ्लोर टेस्ट की मांग की थी जबकि 9 बागी विधायकों का नाम उसमें नहीं था।
तुषार मेहता ने कहा की 18 मार्च 2016 की रात 11:30 बजे अजय भट्ट ने 35 विधायकों के साथ राजभवन में राज्यपाल को पत्र देकर वित्त विधेयक गिरने का हवाला देकर हालातों से अवगत कराया था। उन्होंने यह भी कहा की विधेयक गिरने के बावजूद स्पीकर द्वारा विधेयक को पास बताकर संविधान का मजाक उड़ाया गया।
राज्यपाल के विवादित कहने से राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया जा सकता
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यूनियन ऑफ़ इंडिया के अधिवक्ता से पूछा की उनके द्वारा दिए गए गोपनीय दस्तावेजों पर न्यायालय में चर्चा हो सकती है क्या? उन्होंने ये भी पूछा की क्या उस दस्तावेज का जिक्र आदेश में किया जा सकता है?
इस पर याचिकाकर्ता हरीश रावत के अधिवक्ता ने कहा की कर्नाटक के एसआर बोम्मई केस में गोपनीय दस्तावेज का जिक्र किया गया है। जिसके बाद न्यायालय ने फिर पूछा कि कैबिनेट के उस निर्णय को पब्लिक क्यों नहीं किया जा सकता? कोर्ट के इस सवाल का यूनियन ऑफ़ इंडिया के असिस्टेंट सॉलिसिटर जर्नल तुषार मेहता ने जवाब देते हुए कहा की इस पर चर्चा की जा सकती है।
हाईकोर्ट में सवा दो घंटे की पैरवी के बाद याचिकाकर्ता हरीश चंद सिंह रावत के अभिषेक मनुसिंघवि ने अपना पक्ष रखा, जिसके बाद लंच के लिए न्यायालय की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। अब लंच के बाद सुनवाई होगी। संभावना है कि आज निर्णय सुरक्षित रखा जा सकता है, जिसे बाद में सुनाया जाएगा।
याचिकाकर्ता हरीश रावत के अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायलय से कहा की विधानसभा अध्यक्ष के बिल स्वीकृत कहने और राज्यपाल के विवादित कहने से राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने हाउस ऑफ़ कॉमन्स के वेबसाइट की एक पोस्ट का जिक्र भी न्यायालय के सामने रखा।
उन्होंने कहा की ये मामला 18 मार्च के वित्त विधेयक के अल्पमत में होने का नहीं है्, बल्कि ये 28 मार्च के प्रस्तावित फ्लोर टेस्ट का है। स्पीकर ने 28 मार्च को सदन की पूरी कार्यवाही से राज्यपाल को लिखित कागजों के साथ अवगत कराया था। 18 मार्च के बाद कार्यवाही का दिन केवल 21, 22 और फिर 28 मार्च ही था। बुधवार को महावीर जयंती के मौके पर छुट्टी होने के बाद भी हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।