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गौलापार में समस्याओं का अंबार
कैलाश पाठक ,गौलापार (नैनीताल)।
Updated Wed, 01 Jun 2016 11:55 PM IST
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रेलवे क्रासिंग
- फोटो : अमर उजाला
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ग्रेटर हल्द्वानी यानी गौलापार में समस्याओं का अंबार लगा है। सरकार ने गौलापार को ग्रेटर हल्द्वानी नाम तो दे दिया लेकिन ग्रेटर हल्द्वानी को ग्रेटर नोएडा के तर्ज पर विकसित करने की संभावनाओं के बीच सरकार ने केवल अपने निहित स्वार्थों के कामों को प्राथमिकता दी है। स्थानीय निवासियों की समस्याओं की ओर किसी का ध्यान नहीं है।
क्षेत्र का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र होने के बावजूद गौलापार का सुध लेवा कोई नहीं है। सिंचाई, पानी की समस्याएं तो वर्षों पुरानी हैं। अब अराजक तत्वों का बोलबाला होने के भी क्षेत्रवासी काफी चिंतित और तनावग्रस्त हैं। सबसे प्रमुख समस्या हल्द्वानी गौलापार के बीच रेलवे क्रासिंग में ओवर ब्रिज का निर्माण नहीं होना है। जिसे क्षेत्रवासी कई माध्यमों से सरकार तक पहुंचा चुके हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो समूचे गौलापार के लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर होेंगे।
फोटो
जिला पंचायत सदस्य प्रकाश गजरौला कहते हैं कि गौलापार में 15 ग्राम पंचायतों की पचास हजार की आबादी गौलापार में रहती है। गोलापार-चोरगलिया क्षेत्र के लोगों की प्रमुख समस्या ताज चौराहे के सामने से गुजर रही रेलवे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज नहीं बनना है। समय-समय पर कई ट्रेनें इस क्रासिंग से गुजरती हैं। जिससे घंटों जाम लगने से लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज बनाया जाना चाहिए।
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पूर्वी खेड़ा के रमेश शर्मा कहते हैं कि रेलवे क्रासिंग में हाईवे के अलावा इसे फोर लेन बनाते हुए बाईपास किया जाना चाहिए ताकि स्थानीय निवासियों को किसी तरह की परेशानी नहीं झेलनी पड़े। उनका कहना है कि क्षेत्र में प्रत्येक शुक्र और शनिवार को बड़ी संख्या में अराजक तत्व क्षेत्र में आवाजाही कर लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करते हैं। गौला पुल पर शराबियों का जमावड़ा रहता है। पुलिस का पहरा होने के बावजूद पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती है। इस पर लगाम लगनी चाहिए।
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कुंवरपुर निवासी विपिन चंद्र का कहना है कि हाईवे के साथ ही पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ बनाया जाना चाहिए। गौला के तमाम गेट हैं लेकिन ओवर ब्रिज नहीं होने से ग्रामीण इलाकों में लोगों की गाड़ियां घूमती रहती हैं। जिससे क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। उनका कहना है कि प्रशासन को इस समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। ग्रेटर हल्द्वानी नाम देने से मात्र काम नहीं चलने वाला है।
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कुंवरपुर के ही गोपाल दत्त कहते हैं कि जल संस्थान ने इलाके में पेयजल लाइनें बिछाकर कनेक्शन दिए हैं लेकिन नलों में पानी नहीं आता है। जो पानी की सप्लाई होती है वह ग्राम पेयजल एवं स्वच्छता समितियों के ट्यूबवेलों से होती है। इसके बावजूद जलसंस्थान क्षेत्रवासियों को लगातार बिल देता आ रहा है। जब क्षेत्रवासियों को पानी ही नहीं मिल रहा है तो उन्हें बिल क्यों भेजे जा रहे हैं। जल्द कार्रवाई नहीं की तो क्षेत्रवासी बिलों का भुगतान नहीं करेंगे।
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स्थानीय निवासी राजू गोस्वामी का कहना है कि सिंचाई, पेयजल की दिक्कत तो है ही। सबसे बड़ी समस्या रेलवे क्रासिंग में ओवर ब्रिज नहीं बनाया जाना है। उनका कहना है कि रेलवे क्रासिंग नहीं होने से स्कूली बच्चों, किसानों, व्यापारियों और कर्मचारियों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है। उन्होंने सिंचाई, पेयजल के साथ ही ओवर ब्रिज निर्माण किए जाने की मांग की है।
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क्षेत्र का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र होने के बावजूद गौलापार का सुध लेवा कोई नहीं है। सिंचाई, पानी की समस्याएं तो वर्षों पुरानी हैं। अब अराजक तत्वों का बोलबाला होने के भी क्षेत्रवासी काफी चिंतित और तनावग्रस्त हैं। सबसे प्रमुख समस्या हल्द्वानी गौलापार के बीच रेलवे क्रासिंग में ओवर ब्रिज का निर्माण नहीं होना है। जिसे क्षेत्रवासी कई माध्यमों से सरकार तक पहुंचा चुके हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो समूचे गौलापार के लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर होेंगे।
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जिला पंचायत सदस्य प्रकाश गजरौला कहते हैं कि गौलापार में 15 ग्राम पंचायतों की पचास हजार की आबादी गौलापार में रहती है। गोलापार-चोरगलिया क्षेत्र के लोगों की प्रमुख समस्या ताज चौराहे के सामने से गुजर रही रेलवे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज नहीं बनना है। समय-समय पर कई ट्रेनें इस क्रासिंग से गुजरती हैं। जिससे घंटों जाम लगने से लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज बनाया जाना चाहिए।
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पूर्वी खेड़ा के रमेश शर्मा कहते हैं कि रेलवे क्रासिंग में हाईवे के अलावा इसे फोर लेन बनाते हुए बाईपास किया जाना चाहिए ताकि स्थानीय निवासियों को किसी तरह की परेशानी नहीं झेलनी पड़े। उनका कहना है कि क्षेत्र में प्रत्येक शुक्र और शनिवार को बड़ी संख्या में अराजक तत्व क्षेत्र में आवाजाही कर लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करते हैं। गौला पुल पर शराबियों का जमावड़ा रहता है। पुलिस का पहरा होने के बावजूद पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती है। इस पर लगाम लगनी चाहिए।
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कुंवरपुर निवासी विपिन चंद्र का कहना है कि हाईवे के साथ ही पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ बनाया जाना चाहिए। गौला के तमाम गेट हैं लेकिन ओवर ब्रिज नहीं होने से ग्रामीण इलाकों में लोगों की गाड़ियां घूमती रहती हैं। जिससे क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। उनका कहना है कि प्रशासन को इस समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। ग्रेटर हल्द्वानी नाम देने से मात्र काम नहीं चलने वाला है।
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कुंवरपुर के ही गोपाल दत्त कहते हैं कि जल संस्थान ने इलाके में पेयजल लाइनें बिछाकर कनेक्शन दिए हैं लेकिन नलों में पानी नहीं आता है। जो पानी की सप्लाई होती है वह ग्राम पेयजल एवं स्वच्छता समितियों के ट्यूबवेलों से होती है। इसके बावजूद जलसंस्थान क्षेत्रवासियों को लगातार बिल देता आ रहा है। जब क्षेत्रवासियों को पानी ही नहीं मिल रहा है तो उन्हें बिल क्यों भेजे जा रहे हैं। जल्द कार्रवाई नहीं की तो क्षेत्रवासी बिलों का भुगतान नहीं करेंगे।
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स्थानीय निवासी राजू गोस्वामी का कहना है कि सिंचाई, पेयजल की दिक्कत तो है ही। सबसे बड़ी समस्या रेलवे क्रासिंग में ओवर ब्रिज नहीं बनाया जाना है। उनका कहना है कि रेलवे क्रासिंग नहीं होने से स्कूली बच्चों, किसानों, व्यापारियों और कर्मचारियों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है। उन्होंने सिंचाई, पेयजल के साथ ही ओवर ब्रिज निर्माण किए जाने की मांग की है।