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20 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर पर ई चालान करना होगा जनरेट
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हल्द्वानी। हल्द्वानी टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित कुमार गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार ने अब जीएसटी के नियमों में फिर बदलाव किया है। एक अप्रैल 2022 से 20 करोड़ से ज्यादा वार्षिक टर्नओवर करनेवाली कंपनियों को इलेक्ट्रानिक चालान (ई इनवायस) जनरेट करना होगा।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने कहा कि अब सालाना 20 करोड़ से ज्यादा के टर्नओवर करने वाले व्यापारियों को जो व्यापार से व्यवसाय (बी2बी) करते हैं। उनको एक अप्रैल से इलेक्ट्रॉनिक चालान जनरेट करना होगा। केंद्र सरकार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के नियमों में लगातार बदलाव कर रही है। इस व्यवस्था से टैक्स चोरी रुकेगी और टैक्स कलेक्शन को बढ़ावा मिलेगा। जीएसटी कानून के मुताबिक एक अक्तूबर 2020 को सरकार ने यह फैसला लिया था कि जिन कंपनियों का सालाना टर्नओवर 500 करोड़ रुपये से ज्यादा है। उन्हें अपने बिजनेस-टू-बिजनेस लेनदेन पर ई-चालान जनरेट करना जरूरी होगा। इसके बाद सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए 1 जनवरी 2021 को 100 करोड़ से ज्यादा का व्यवसाय करने वाले व्यापारियों को लिए यह नियम लागू कर दिया।
इसके बाद इस सीमा को एक अप्रैल 2021 को 50 करोड़ तक का व्यापार करने वाले लोगों के लिए लागू किया गया। जीएसटी करदाताओं को ई-इनवॉइस ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल को भेजना होगा। इससे बिल बनाने में गलती होने की संभावना कम हो जाएगी। साथ ही किसी तरह की कर चोरी और गलती की संभावना कम रहेगी। इसका यह भी फायदा होगा कि हर बार अलग-अलग फाइलिंग नहीं करना होगा। इससे गड़बड़ी की संभावना भी कम हो जाएगी।
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केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने कहा कि अब सालाना 20 करोड़ से ज्यादा के टर्नओवर करने वाले व्यापारियों को जो व्यापार से व्यवसाय (बी2बी) करते हैं। उनको एक अप्रैल से इलेक्ट्रॉनिक चालान जनरेट करना होगा। केंद्र सरकार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के नियमों में लगातार बदलाव कर रही है। इस व्यवस्था से टैक्स चोरी रुकेगी और टैक्स कलेक्शन को बढ़ावा मिलेगा। जीएसटी कानून के मुताबिक एक अक्तूबर 2020 को सरकार ने यह फैसला लिया था कि जिन कंपनियों का सालाना टर्नओवर 500 करोड़ रुपये से ज्यादा है। उन्हें अपने बिजनेस-टू-बिजनेस लेनदेन पर ई-चालान जनरेट करना जरूरी होगा। इसके बाद सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए 1 जनवरी 2021 को 100 करोड़ से ज्यादा का व्यवसाय करने वाले व्यापारियों को लिए यह नियम लागू कर दिया।
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इसके बाद इस सीमा को एक अप्रैल 2021 को 50 करोड़ तक का व्यापार करने वाले लोगों के लिए लागू किया गया। जीएसटी करदाताओं को ई-इनवॉइस ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल को भेजना होगा। इससे बिल बनाने में गलती होने की संभावना कम हो जाएगी। साथ ही किसी तरह की कर चोरी और गलती की संभावना कम रहेगी। इसका यह भी फायदा होगा कि हर बार अलग-अलग फाइलिंग नहीं करना होगा। इससे गड़बड़ी की संभावना भी कम हो जाएगी।
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