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सिने अभिनेता निर्मल पांडे नानू की स्मृति में फिल्म फेस्टिवल आज
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नैनीताल। सिने अभिनेता निर्मल पांडे की स्मृति में तृतीय फिल्म फेस्टिवल और ऑफलाइन पहले फेस्टिवल के लिए कुमाऊं विवि के हर्मिटेज में तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं। हर्मिटेज स्थित सभागार को फेस्टिवल के लिए तैयार गया है जबकि परिसर को विशेष रूप से तैयार किया गया है।
आयोजक प्रमुख अनिल दुबे और मिथिलेश पांडे ने बताया कि सुबह 8:30 बजे से फेस्टिवल की शुरुआत होगी। निर्मल पांडे के रंगकर्म और भारतीय सिनेमा पर चर्चा के बाद 11 बजे से शाम तक फिल्मों का प्रदर्शन होगा।
चार बजे से संगीत संध्या के बाद समापन समारोह व पुरस्कार वितरण होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. कुमार विमलेंदु, रोहिताश्व गौड़, आशित चटर्जी, मनोज जोशी समेत निर्णायक मंडल में शामिल आरिफ शहडोली, शोभा अक्षर, रोहित हितेश्वर, अशोक मेहरा, ओम प्रकाश सिंह, रवींद्र चौहान आदि पहुंच चुके हैं।
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कला से प्यार, कठिन मेहनत व समर्पण हो तो सफलता सौ फीसदी तय
रवींद्र पांडे रवि
नैनीताल। चर्चित टीवी कलाकार, वर्तमान चर्चित टीवी सीरियल भाभी जी घर पर हैं के मनमोहन तिवारी यानि रोहिताश्व गौड़ का कहना है कि किसी भी कला से प्यार, कठिन मेहनत व समर्पण हो तो उस क्षेत्र में सौ फीसदी सफलता मिलना तय है। युवा पीढ़ी का आह्वान किया कि आज के आईटी क्रांति के दौर में यू-ट्यूब आदि के माध्यम से प्रतिभा के अनुरूप उच्च मुकाम पाने की संभावनाएं अधिक है लेकिन इसके लिए अपनी प्रतिभा को कठिन परिश्रम से पहले निखारना होगा।
अमर उजाला से हुई विशेष भेंट में शिमला हिमाचल मूल के रोहताश्व ने बताया कि रंगकर्म उन्हें विरासत में मिला। उनके पिता आल इंडिया आर्टिस्ट एसोसिएशन संचालित करते हैं, जो शिमला में 1955 में गठित हुई।
बलराज साहनी, मदन पुरी, प्रेम चोपड़ा के सानिध्य में इसकी शुरुआत ही। इसके माध्यम से रंगकर्म को जीवंत करने के साथ ही फिल्म 67 वर्षों से फिल्म फेस्टिवल कर रहे हैं। 1885 में आगरा बाजार से व्यावसायिक थियेटर में कदम रखने वाले रोहिताश्व ने 86 से 89 एनएसडी किया तथा रंगकर्म को और निखारने के लिए 89 से 94 तक गोविंद नामदेव, हिमानी शिवपुरी, मुकेश तिवारी के साथ एनएसटी रेपेट्री की।
1997 में मुबई आए और मुझे चांद चाहिए... से यात्रा शुरू की। कामर्शियल थियेटर से जुड़ गए। शोभा खोटे, बिजू खोटे के साथ मेरा नाम जोकर नाटक तैयार किया, जो देश विदेश में खासा पापुलर रहा।
पीके, मुन्ना भाई एमबीबीएस, लगे रहो मुन्ना भाई, क्या कहना, प्रथा, मातृ भूमि, गर्मागरम, धूम जैसी की हिट फिल्मों के साथ ही 11 फिल्में की। इसके बाद टीवी की ओर लौटे तो लापतागंज में लीड रोल किया। चर्चित चिड़ियाघर सीरियल के बाद 2015 में भाभीजी घर पर हैं में कार्य कर रहे हैं। उनकी पत्नी रेखा गौड़, दो बेटी हैं।
बाजारीकरण में खो गए हैं कहानी व किरदार
नैनीताल। सिने व टीवी कलाकार तथा वैब सिरीज में कार्य के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध आशित चटर्जी का कहना है कि आज के व्यवसायिक दौर में कहानी व किरदार कहीं खो से गए हैं। हालांकि कई लोग निजी स्तर पर इसे पुनर्स्थापित करने में भी जुटे हुए हैं। वह निजी स्तर पर वेब सिरीज के माध्यम से भी इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।
बिलासपुर छत्तीसगढ़ मूल के आशित ने अमर उजाला को बताया कि प्राथमिक उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद अच्छी नौकरी भी करने लगे थे। जहां जेब की संतुष्टि तो थी लेकिन जॉब की नहीं। इसलिए उन्होंने अपनी कला को निखारने के लिए इसे छोड़ दिया। 1999 से मुंबई में गुलजार, एमएस सथ्यू, सलीम आरिफ आदि के साथ लाइटिंग एफेक्ट, कस्ट्यूम डिजाइनिंग समेत अन्य बारीकियों को सीखा। सिने, टीवी के बाद वेब सीरीज की ओर मुड़ गए। द एंपायर, कार्टल, गॉड फादर की कहानी, भ्रम, मत्स्यकांड, क्रेख डाउन समेत 16 से अधिक वेब सीरीज की। आने वाले वेब सीरीज में किंग मेकर्स, रेडिकल, चोर निकल के भागा, बूंद आदि शामिल हैं।
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सिनेमा व साहित्य का समागम विमलेंदु की श्रेष्ठता
नैनीताल। पाटलिपुत्र में जन्में पटना बिहार मूल के डॉ. कुमार विमलेंदु सिंह का कहना है कि साहित्य व सिनेमा अपने-अपने स्थान पर श्रेष्ठ हैं। लेकिन उन्होंने अपने साहित्य में इन दोनों का समागम किया है। इन रचनाओं में उन्होंने पूर्व के कई लोगों के पृथक होने के मिथक को तोड़ा है।
हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में साहित्य सृजन व कविता लिखने वाले विमलेंदु ने अमर उजाला को बताया कि उनकी छह किताबें मैं विद्रोही यायावर, यू हूम्स टू एवर, मूक होने से पहले आदि बेस्ट सेलर रह चुकी हैं।
उनका प्रयास रहता है कि कविताएं के माध्यम से सूक्ष्म भावों को प्रदर्शित कर सकूं। उन्होंने दो किताबों में सिनेमा को विषय के तौर पर पढ़ने और उसमें शोध करने के लायक सामग्री समाहित करने का प्रयास किया है।
रंगमंच से जुड़े विमलेंदु ने अखिलेंद्र मिश्र, टॉम अल्टर और गिरीश कर्नाड जैसे दिग्गजों के साथ मंच साझा किया है। दूरदर्शन और रेडियो से जुड़े रहे तथा सिनेमा एवं साहित्य से जुड़े कई कार्यक्रमों का प्रसारण करने में भी दक्षता है। कई मंचों पर उन्हें संगीत के लिए भी सम्मानित किया जा चुका है।
अब तक 1000 से अधिक कार्यशालाएं आयोजित कर चुके विमलेंदु प्रतिष्ठित अखबारों और पत्रिकाओं में विभिन्न विषयों पर स्तंभ लिखते हैं। 2018 में आयल इंडिया लिमिटेड की तरफ से इन्हें ‘राजभाषा सम्मान’ और 2020 में ‘मगध साहित्य श्रीसम्मान’ भी प्राप्त हुआ है।
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आयोजक प्रमुख अनिल दुबे और मिथिलेश पांडे ने बताया कि सुबह 8:30 बजे से फेस्टिवल की शुरुआत होगी। निर्मल पांडे के रंगकर्म और भारतीय सिनेमा पर चर्चा के बाद 11 बजे से शाम तक फिल्मों का प्रदर्शन होगा।
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चार बजे से संगीत संध्या के बाद समापन समारोह व पुरस्कार वितरण होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. कुमार विमलेंदु, रोहिताश्व गौड़, आशित चटर्जी, मनोज जोशी समेत निर्णायक मंडल में शामिल आरिफ शहडोली, शोभा अक्षर, रोहित हितेश्वर, अशोक मेहरा, ओम प्रकाश सिंह, रवींद्र चौहान आदि पहुंच चुके हैं।
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कला से प्यार, कठिन मेहनत व समर्पण हो तो सफलता सौ फीसदी तय
रवींद्र पांडे रवि
नैनीताल। चर्चित टीवी कलाकार, वर्तमान चर्चित टीवी सीरियल भाभी जी घर पर हैं के मनमोहन तिवारी यानि रोहिताश्व गौड़ का कहना है कि किसी भी कला से प्यार, कठिन मेहनत व समर्पण हो तो उस क्षेत्र में सौ फीसदी सफलता मिलना तय है। युवा पीढ़ी का आह्वान किया कि आज के आईटी क्रांति के दौर में यू-ट्यूब आदि के माध्यम से प्रतिभा के अनुरूप उच्च मुकाम पाने की संभावनाएं अधिक है लेकिन इसके लिए अपनी प्रतिभा को कठिन परिश्रम से पहले निखारना होगा।
अमर उजाला से हुई विशेष भेंट में शिमला हिमाचल मूल के रोहताश्व ने बताया कि रंगकर्म उन्हें विरासत में मिला। उनके पिता आल इंडिया आर्टिस्ट एसोसिएशन संचालित करते हैं, जो शिमला में 1955 में गठित हुई।
बलराज साहनी, मदन पुरी, प्रेम चोपड़ा के सानिध्य में इसकी शुरुआत ही। इसके माध्यम से रंगकर्म को जीवंत करने के साथ ही फिल्म 67 वर्षों से फिल्म फेस्टिवल कर रहे हैं। 1885 में आगरा बाजार से व्यावसायिक थियेटर में कदम रखने वाले रोहिताश्व ने 86 से 89 एनएसडी किया तथा रंगकर्म को और निखारने के लिए 89 से 94 तक गोविंद नामदेव, हिमानी शिवपुरी, मुकेश तिवारी के साथ एनएसटी रेपेट्री की।
1997 में मुबई आए और मुझे चांद चाहिए... से यात्रा शुरू की। कामर्शियल थियेटर से जुड़ गए। शोभा खोटे, बिजू खोटे के साथ मेरा नाम जोकर नाटक तैयार किया, जो देश विदेश में खासा पापुलर रहा।
पीके, मुन्ना भाई एमबीबीएस, लगे रहो मुन्ना भाई, क्या कहना, प्रथा, मातृ भूमि, गर्मागरम, धूम जैसी की हिट फिल्मों के साथ ही 11 फिल्में की। इसके बाद टीवी की ओर लौटे तो लापतागंज में लीड रोल किया। चर्चित चिड़ियाघर सीरियल के बाद 2015 में भाभीजी घर पर हैं में कार्य कर रहे हैं। उनकी पत्नी रेखा गौड़, दो बेटी हैं।
बाजारीकरण में खो गए हैं कहानी व किरदार
नैनीताल। सिने व टीवी कलाकार तथा वैब सिरीज में कार्य के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध आशित चटर्जी का कहना है कि आज के व्यवसायिक दौर में कहानी व किरदार कहीं खो से गए हैं। हालांकि कई लोग निजी स्तर पर इसे पुनर्स्थापित करने में भी जुटे हुए हैं। वह निजी स्तर पर वेब सिरीज के माध्यम से भी इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।
बिलासपुर छत्तीसगढ़ मूल के आशित ने अमर उजाला को बताया कि प्राथमिक उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद अच्छी नौकरी भी करने लगे थे। जहां जेब की संतुष्टि तो थी लेकिन जॉब की नहीं। इसलिए उन्होंने अपनी कला को निखारने के लिए इसे छोड़ दिया। 1999 से मुंबई में गुलजार, एमएस सथ्यू, सलीम आरिफ आदि के साथ लाइटिंग एफेक्ट, कस्ट्यूम डिजाइनिंग समेत अन्य बारीकियों को सीखा। सिने, टीवी के बाद वेब सीरीज की ओर मुड़ गए। द एंपायर, कार्टल, गॉड फादर की कहानी, भ्रम, मत्स्यकांड, क्रेख डाउन समेत 16 से अधिक वेब सीरीज की। आने वाले वेब सीरीज में किंग मेकर्स, रेडिकल, चोर निकल के भागा, बूंद आदि शामिल हैं।
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सिनेमा व साहित्य का समागम विमलेंदु की श्रेष्ठता
नैनीताल। पाटलिपुत्र में जन्में पटना बिहार मूल के डॉ. कुमार विमलेंदु सिंह का कहना है कि साहित्य व सिनेमा अपने-अपने स्थान पर श्रेष्ठ हैं। लेकिन उन्होंने अपने साहित्य में इन दोनों का समागम किया है। इन रचनाओं में उन्होंने पूर्व के कई लोगों के पृथक होने के मिथक को तोड़ा है।
हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में साहित्य सृजन व कविता लिखने वाले विमलेंदु ने अमर उजाला को बताया कि उनकी छह किताबें मैं विद्रोही यायावर, यू हूम्स टू एवर, मूक होने से पहले आदि बेस्ट सेलर रह चुकी हैं।
उनका प्रयास रहता है कि कविताएं के माध्यम से सूक्ष्म भावों को प्रदर्शित कर सकूं। उन्होंने दो किताबों में सिनेमा को विषय के तौर पर पढ़ने और उसमें शोध करने के लायक सामग्री समाहित करने का प्रयास किया है।
रंगमंच से जुड़े विमलेंदु ने अखिलेंद्र मिश्र, टॉम अल्टर और गिरीश कर्नाड जैसे दिग्गजों के साथ मंच साझा किया है। दूरदर्शन और रेडियो से जुड़े रहे तथा सिनेमा एवं साहित्य से जुड़े कई कार्यक्रमों का प्रसारण करने में भी दक्षता है। कई मंचों पर उन्हें संगीत के लिए भी सम्मानित किया जा चुका है।
अब तक 1000 से अधिक कार्यशालाएं आयोजित कर चुके विमलेंदु प्रतिष्ठित अखबारों और पत्रिकाओं में विभिन्न विषयों पर स्तंभ लिखते हैं। 2018 में आयल इंडिया लिमिटेड की तरफ से इन्हें ‘राजभाषा सम्मान’ और 2020 में ‘मगध साहित्य श्रीसम्मान’ भी प्राप्त हुआ है।