Amar Ujala Exclusive: नलकूपों में लगे डिजिटल सेंसर करेंगे भूजल की निगरानी, क्या है डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर ?
हल्द्वानी में भूजल की निगरानी डिजिटल सेंसर से की जाएगी। पेयजल निगम ने शहर के आठ नलकूपों में डिजिटल वाटर लेवर रिकॉर्डर (डीडब्ल्यूएलआर) स्थापित किए हैं। यह सेंसर सालभर में भूगर्भीय जलस्तर में गिरावट या सुधार की जानकारी देंगे।
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भूगर्भीय जलस्तर के मामले में सेमी क्रिटिकल जोन में शामिल हल्द्वानी में भूजल की निगरानी डिजिटल सेंसर से की जाएगी। पेयजल निगम ने शहर के आठ नलकूपों में डिजिटल वाटर लेवर रिकॉर्डर (डीडब्ल्यूएलआर) स्थापित किए हैं। यह सेंसर सालभर में भूगर्भीय जलस्तर में गिरावट या सुधार की जानकारी देंगे।
पेयजल निगम ने हल्द्वानी के गौजाजाली क्षेत्र में पांच, एफटीआई में दो और कुसुमखेड़ा में एक नलकूप में करीब 150 मीटर की गहराई में डिजिटल सेंसर लगाए गए हैं। गर्मी, सर्दी और बरसात के मौसम भूजल में आ रहे उतार-चढ़ाव का पता लगाएंगी। इस रिकॉर्डर के माध्यम से 24 घंटे में हर छह घंटे के अंतराल में जलस्तर के बारे में पता किया जा सकता है। इस डिवाइस के लगने से अधिकारी अपने कार्यालय में बैठे भू-जलस्तर के बारे में जानकारी ले सकेंगे। डाटा संकलन के जरिये भविष्य में भू-जल संकट को संभालने के लिए प्रभावी योजनाएं बनाई जा सकेंगी।
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क्या है डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर
डिजिटल सेंसर का उपयोग भूजल और सतही जल के स्तर को रियल टाइम के आधार पर लगातार मापने और रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता है। यह बिना मैनुअल नियंत्रण के काम कर सकता है। ट्रांसमीटर स्तर या दबाव में बदलाव को रिकॉर्ड कर सकता है। इसका उपयोग बाढ़ चेतावनी प्रणाली, सिंचाई नियंत्रण प्रणाली, जल विद्युत उत्पादन प्रणाली आदि के लिए होता है। भू-जल स्तर की निगरानी और पर्यावरण संरक्षण प्रयासों के लिए यह उपकरण जरूरी है।
भू-जल की निगरानी के लिए नलकूपों के भीतर डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर लगाए जाएंगे। इससे प्राप्त डाटा के अनुसार सालभर में भूगर्भीय जलस्तर का अध्ययन किया जा सकेगा। इससे भविष्य में भूगर्भीय जलस्तर के संरक्षण के लिए योजनाएं बनाई जा सकेंगी।
-वाईएस रावत, एई, पेयजल निगम विश्व बैंक परियोजना