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स्कूल नहीं खुले तो कोर्स पूरा करना मुश्किल
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हल्द्वानी। नवंबर में पहले टर्म की परीक्षा के बाद विद्यालयों को कोर्स (पाठ्यक्रम) पूरा कराने का समय नहीं मिल पाया है। पहले शीतकालीन अवकाश और अब कोरोना संक्रमण के चलते विद्यालय बंद होने से मुश्किलें आ गई हैं। मार्च अंत या अप्रैल पहले सप्ताह से बोर्ड परीक्षाएं होनी हैं। ऐसे में विद्यालय प्रबंधनों का कहना है कि शासन को विद्यालयों को संचालित करने के लिए कोई न कोई विकल्प तलाश करना ही होगा, अन्यथा कोर्स पूरा नहीं हो पाएगा।
पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश भगत का कहना है कि कोर्स तो किसी तरह पूरा करा भी लिया जाएगा लेकिन सबसे बड़ी समस्या है कि परीक्षाएं किस तरह होंगी यह स्पष्ट नहीं किया गया है। परीक्षा को लेकर शासन को स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करने चाहिए, ताकि उसी के अनुरूप परीक्षा को लेकर तैयारियां की जा सकें। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन शिक्षण के लिए विद्यार्थी गंभीर नहीं है। 50 फीसदी विद्यार्थी भी ऑनलाइन कक्षाएं ज्वाइन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने परीक्षा को लेकर हुए संशय को दूर करने की मांग की है। इधर, सिंथियां सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य प्रवींद्र रौतेला का कहना है कि ऑनलाइन पठन-पाठन होने से प्रयोगात्मक कार्य नहीं हो पाएगा। अभी काफी सिलेबस बचा हुआ है। परीक्षा पर केवल दो महीने का समय शेष है। ऐसे में ऑनलाइन माध्यम से समय पर कोर्स पूरा हो पाएगा इस पर भी संदेह है। उनका कहना है कि शासन ऑफलाइन शिक्षण के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करे ताकि कोर्स समय पर पूरा किया जा सके।
नैनीताल के मुख्य शिक्षा अधिकारी कुंवर सिंह रावत का कहना है कि यह समय कोरद्स पूरा होगा या नहीं इसका नहीं है बल्कि आम आदमी की जीवन रक्षा का सवाल है। जीवन से बड़ा कुछ नहीं है। शासन ने जो आदेश जारी किए हैं, उसी के अनुरूप व्यवस्था की गई है। ऑनलाइन शिक्षण में अधिक से अधिक बच्चे लाभान्वित हो सकें इसका प्रयास किया जा रहा है। बच्चों का कम से कम नुकसान हो, इसी लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने का निर्णय लिया गया है।
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पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश भगत का कहना है कि कोर्स तो किसी तरह पूरा करा भी लिया जाएगा लेकिन सबसे बड़ी समस्या है कि परीक्षाएं किस तरह होंगी यह स्पष्ट नहीं किया गया है। परीक्षा को लेकर शासन को स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करने चाहिए, ताकि उसी के अनुरूप परीक्षा को लेकर तैयारियां की जा सकें। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन शिक्षण के लिए विद्यार्थी गंभीर नहीं है। 50 फीसदी विद्यार्थी भी ऑनलाइन कक्षाएं ज्वाइन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने परीक्षा को लेकर हुए संशय को दूर करने की मांग की है। इधर, सिंथियां सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य प्रवींद्र रौतेला का कहना है कि ऑनलाइन पठन-पाठन होने से प्रयोगात्मक कार्य नहीं हो पाएगा। अभी काफी सिलेबस बचा हुआ है। परीक्षा पर केवल दो महीने का समय शेष है। ऐसे में ऑनलाइन माध्यम से समय पर कोर्स पूरा हो पाएगा इस पर भी संदेह है। उनका कहना है कि शासन ऑफलाइन शिक्षण के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करे ताकि कोर्स समय पर पूरा किया जा सके।
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नैनीताल के मुख्य शिक्षा अधिकारी कुंवर सिंह रावत का कहना है कि यह समय कोरद्स पूरा होगा या नहीं इसका नहीं है बल्कि आम आदमी की जीवन रक्षा का सवाल है। जीवन से बड़ा कुछ नहीं है। शासन ने जो आदेश जारी किए हैं, उसी के अनुरूप व्यवस्था की गई है। ऑनलाइन शिक्षण में अधिक से अधिक बच्चे लाभान्वित हो सकें इसका प्रयास किया जा रहा है। बच्चों का कम से कम नुकसान हो, इसी लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने का निर्णय लिया गया है।
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