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पड़ासोंसेरा गांव में अंगीठी की गैस लगने से दंपती की मौत
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Death by Carben Monoxide in Lohaghat
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लोहाघाट (चंपावत)। बाराकोट ब्लॉक के पड़ासोंसेरा गांव में अंगीठी की गैस से दम घुटने से दंपती की मौत हो गई है। दंपती पांच दिन पहले ही चंडीगढ़ से गांव आया था। घटना बृहस्पतिवार-शुक्रवार रात की है। पैतृक मकान गांव से करीब तीन सौ मीटर आगे आबादी से दूर होने के कारण ग्रामीणों को घटना की सूचना देर से मिली।
ग्राम पड़ासोंसेरा निवासी गिरधर सिंह अधिकारी (58) चंडीगढ़ में शिक्षा विभाग में बाबू थे और वहीं परिवार के साथ रहते थे। दो साल बाद उन्हें सेवानिवृत्त होना था। सेवानिवृत्ति के बाद गांव में बसने के इरादे से वह मकान बनाने के लिए पत्नी कलावती देवी (55) के साथ पांच दिन पहले ही गांव आए थे। उन्होंने मकान की बुनियाद रखने का काम शुरू कर दिया था।
बृहस्पतिवार की रात ठंड से बचने के लिए दरवाजे और खिड़कियां बंद कर वे अंगीठी जलाकर सो गए। शुक्रवार को जब काफी देर तक उनके घर के दरवाजे नहीं खुले तो शक होने पर ग्रामीणों ने घर का दरवाजा तोड़ा। अंदर जाकर देखा कि दोनों के शव बिस्तर पर पड़े थे।
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ग्रामीणों ने फोन से राजस्व पुलिस को सूचना दी। तहसीलदार विजय गोस्वामी ने बताया कि दोनों शरीर फूल चुका था। शनिवार को दोनों शवों का पंचनामा भरा गया। सूचना मिलने पर बेटे राजेंद्र सिंह के आने के बाद शनिवार को दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
इसी साल चौड़ाकोट में भी हो चुकी बुजुर्ग ग्रामीण की मौत
चंपावत। जिले में इस साल जाड़ों में अंगीठी की गैस से मौत की यह दूसरी घटना है। इससे पूर्व 10 जनवरी को पाटी ब्लॉक के चौड़ाकोट गांव के तेज सिंह (70) पुत्र हर सिंह की भी अंगीठी की गैस लगने से मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी बसंती देवी (60) को अस्पताल में उपचार के बाद बचा लिया गया।
बंद कमरे में जली अंगीठी से फेफड़ों तक पहुंच जाती है कार्बन मोनोऑक्साइड
चंपावत। बंद कमरे में लकड़ी या कोयले की अंगीठी को जलाए रखना बेहद खतरनाक है। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि बंद कमरे में अंगीठी जलने से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।
इसकी गैस (कार्बन मोनोऑक्साइड) सांस के जरिये फेफड़ों तक पहुंचती है। इससे गैस खून में मिल जाती है और हीमोग्लोबिन कम होने से इंसान दम तोड़ देता है। अंगीठी से निकलने वाली गैस फेफड़ों के अलावा आंखों को भी नुकसान पहुंचाती है। आंखों पर सूखेपन से जख्म का खतरा बढ़ जाता है।
अंगीठी जलाने पर बरतें ये सावधानियां
1. कमरे को पूरी तरह बंद न करें, खिड़की को जरूर खुला रखें।
2. अंगीठी के नजदीक पॉलीथिन या प्लास्टिक का सामान आदि ज्वलनशील पदार्थ न रखें।
3. कमरे में अंगीठी जलाते वक्त पानी भरी एक बाल्टी रख लें, ऐसा करने से कमरे में नमी रहेगी। इससे गैस का खतरा कम होगा।
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ग्राम पड़ासोंसेरा निवासी गिरधर सिंह अधिकारी (58) चंडीगढ़ में शिक्षा विभाग में बाबू थे और वहीं परिवार के साथ रहते थे। दो साल बाद उन्हें सेवानिवृत्त होना था। सेवानिवृत्ति के बाद गांव में बसने के इरादे से वह मकान बनाने के लिए पत्नी कलावती देवी (55) के साथ पांच दिन पहले ही गांव आए थे। उन्होंने मकान की बुनियाद रखने का काम शुरू कर दिया था।
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बृहस्पतिवार की रात ठंड से बचने के लिए दरवाजे और खिड़कियां बंद कर वे अंगीठी जलाकर सो गए। शुक्रवार को जब काफी देर तक उनके घर के दरवाजे नहीं खुले तो शक होने पर ग्रामीणों ने घर का दरवाजा तोड़ा। अंदर जाकर देखा कि दोनों के शव बिस्तर पर पड़े थे।
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ग्रामीणों ने फोन से राजस्व पुलिस को सूचना दी। तहसीलदार विजय गोस्वामी ने बताया कि दोनों शरीर फूल चुका था। शनिवार को दोनों शवों का पंचनामा भरा गया। सूचना मिलने पर बेटे राजेंद्र सिंह के आने के बाद शनिवार को दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
इसी साल चौड़ाकोट में भी हो चुकी बुजुर्ग ग्रामीण की मौत
चंपावत। जिले में इस साल जाड़ों में अंगीठी की गैस से मौत की यह दूसरी घटना है। इससे पूर्व 10 जनवरी को पाटी ब्लॉक के चौड़ाकोट गांव के तेज सिंह (70) पुत्र हर सिंह की भी अंगीठी की गैस लगने से मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी बसंती देवी (60) को अस्पताल में उपचार के बाद बचा लिया गया।
बंद कमरे में जली अंगीठी से फेफड़ों तक पहुंच जाती है कार्बन मोनोऑक्साइड
चंपावत। बंद कमरे में लकड़ी या कोयले की अंगीठी को जलाए रखना बेहद खतरनाक है। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि बंद कमरे में अंगीठी जलने से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।
इसकी गैस (कार्बन मोनोऑक्साइड) सांस के जरिये फेफड़ों तक पहुंचती है। इससे गैस खून में मिल जाती है और हीमोग्लोबिन कम होने से इंसान दम तोड़ देता है। अंगीठी से निकलने वाली गैस फेफड़ों के अलावा आंखों को भी नुकसान पहुंचाती है। आंखों पर सूखेपन से जख्म का खतरा बढ़ जाता है।
अंगीठी जलाने पर बरतें ये सावधानियां
1. कमरे को पूरी तरह बंद न करें, खिड़की को जरूर खुला रखें।
2. अंगीठी के नजदीक पॉलीथिन या प्लास्टिक का सामान आदि ज्वलनशील पदार्थ न रखें।
3. कमरे में अंगीठी जलाते वक्त पानी भरी एक बाल्टी रख लें, ऐसा करने से कमरे में नमी रहेगी। इससे गैस का खतरा कम होगा।