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डेयरी निदेशालय भी खस्ताहाल, न भवन न स्थायी निदेशक

Fri, 13 May 2016 11:40 PM IST
नवीन सक्सेना/अमर उजाला ब्यूरो
नवीन सक्सेना/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 13 May 2016 11:40 PM IST
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Dairy Directorate bad shape, not the building, not permanent director
डेयरी निदेशालय - फोटो : अमर उजाला

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 निदेशालय यानी की वो दफ्तर, जहां प्रदेश के हर जिले से जुड़ी योजनाओं को लेकर मंथन ही नहीं, बल्कि उन्हें अमलीजामा पहनाने के लिए फाइलें इधर से उधर दौड़ती हैं। पर डेयरी विकास निदेशालय इससे बिल्कुल अलग है।
निदेशालय दफ्तर में हर समय सन्नाटा इस बात की तस्दीक करता है कि यहां प्रदेश में डेयरी विकास के लिए कितनी योजनाएं बनती हैं और उन पर कितना अमल होता होगा। प्रदेश में दूध की नदियां बहाना तो दूर डेयरी विकास निदेशालय को अपना भवन और स्थायी निदेशक तक नहीं मिल सका। दोनों व्यवस्थाएं कामचलाऊ हैं। भवन न होने के कारण कार्यालय लालकुआं दुग्ध संघ के दफ्तर में चल रहा है।   
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  राज्य गठन के बाद शासन ने प्रदेश का डेयरी विकास निदेशालय दफ्तर हल्द्वानी में बनाने का निर्णय लिया। कहीं जगह न मिलने पर मंगलपड़ाव स्थित लालकुआं दुग्ध संघ के खस्ताहाल भवन में निदेशालय खोला गया। तब से आज तक निदेशालय को न तो भवन मिला और न ही स्थायी निदेशक।
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डेयरी के पहले निदेशक के रूप में पीएस गुसांई ने 12 मार्च 2001 को चार्ज संभाला। एक साल के भीतर दो फरवरी 2002 को बीके पाठक को चार्ज दे दिया गया। इसी तरह एक के बाद एक अतिरिक्त निदेशक बदलते रहे और राज्य गठन के 15 साल में इस निदेशालय में 19 निदेशक तैनात हो चुके हैं। यह वो अधिकारी होते हैं, जिनके पास दूसरे विभागों का चार्ज भी रहता है। वर्तमान में नैनीताल के सीडीओ ललित मोहन रयाल के पास डेयरी निदेशक के साथ-साथ यूसीडीएफ के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त चार्ज है। डेयरी विभाग की जो फाइलें अति आवश्यक होती हैं, वे भीमताल सीडीओ दफ्तर जाती हैं अन्यथा सप्ताह में समय मिलने पर सीडीओ रयाल निदेशालय दफ्तर में काम निपटाने आ जाते हैं।

निदेशालय में अधिकारियों के नाम पर केवल एक उपनिदेशक और सहायक निदेशक  बैठते हैं। बाकी सब मिनिस्टीरियल स्टाफ है। निदेशालय का कार्य योजनाएं तैयार कर उन्हें शासन से स्वीकृत कराकर लागू कराना और दुग्ध काश्तकारों के कल्याण के लिए मिलने वाले बजट को जिलों में दुग्ध संघ को आवंटित करना है। 

डेयरी निदेशालय में पदों की स्थिति

निदेशक - अतिरिक्त प्रभार
संयुक्त निदेशक पद एक - रिक्त
उपनिदेशक पद तीन - एक रिक्त 
सहायक निदेशक   - एक पद रिक्त
प्रत्येक जनपद में एक - एक सहायक निदेशक का पद है जिसमें से रुद्रप्रयाग और चंपावत में पद रिक्त हैं। दोनों स्थानों पर प्रभार चल रहा है।
 प्रदेश में विभाग का करीब 150 कर्मचारियों का स्टाफ है।
  
प्रदेश में 2636 दुग्ध समितियां गठित पर संचालित सिर्फ 1900
- प्रदेश में 11 दुग्ध संघ संचालित हैं। गढ़वाल के रुद्रप्रयाग और कुमाऊं के बागेश्वर जिले में दुग्ध संघ नहीं है। रुद्रप्रयाग को पौड़ी और बागेश्वर को अल्मोड़ा जिले से जोड़ा गया है। 



डेयरी विकास निदेशालय भवन निर्माण के लिए उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, तीनपानी के पास 1.75 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है। एनपीबी 40 लाख रुपये भी जमा करा दिए गए हैं। अब केवल आदेश जारी होना बाकी है। निदेशालय भवन निर्माण के लिए दस करोड़ लागत की डीपीआर बनाकर भेजी गई है। शासन से निर्माण एजेंसी तय होने एवं बजट मिलने पर निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। इसके अलावा निदेशालय में सहायक निदेशक के रिक्त एक पद के लिए अध्याचन भेजा गया है। यह पद प्रमोशन का है।   
- ललित मोहन रयाल, निदेशक, डेयरी विकास निदेशालय
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