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पार्षदों का हंगामा, कुर्सियां और मेज तोड़ी

Tue, 20 Jan 2015 08:25 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Tue, 20 Jan 2015 08:25 PM IST
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Councillors of the commotion, chairs and tables smashed

नगर निगम में मुख्य नगर अधिकारी और मेयर के बीच की खटपट मंगलवार को एक बार फिर सामने आ गई। बोर्ड बैठक में एमएनए के करीब डेढ़ घंटे लेट पहुंचने पर मेयर नाराज होकर चले गए। एमएनए के पहुंचने पर पार्षदों ने हंगामा खड़ा कर बोर्ड बैठक का बहिष्कार कर दिया। पार्षदों ने सदन हाल की कुर्सियां और मेज तोड़कर स्टेज पलट दिया। एमएनए के खिलाफ नारेबाजी कर नगर निगम में स्वतंत्र एमएनए की तैनाती की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। पार्षदों का हंगामा देख एमएनए मौके से निकलकर सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय चले गए।

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मंगलवार को नगर निगम बोर्ड की बैठक प्रस्तावित थी। सुबह 11 बजे मेयर डा. जोगेंद्र रौतेला और पार्षद सदन में उपस्थित हो गए। मुख्य नगर अधिकारी आरडी पालीवाल दोपहर साढ़े बारह बजे तक बैठक में नहीं पहुंचे। वह सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों में व्यस्त थे, जिस कारण बैठक शुरू नहीं हो सकी और डेढ़ घंटे इंतजार करने के बाद मेयर डा. रौतेला नाराज होकर चले गए। करीब डेढ़ घंटे लेट एमएनए सभागार में पहुंचे। पार्षदों ने मेयर से फोन पर संपर्क किया, लेकिन वे दोबारा नहीं आए। इससे नाराज पार्षदों ने एमएनए को घेर लिया और मेयर एवं पार्षदों के अपमान का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
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गुस्साए पार्षदों ने सदन में रखी कुर्सियां और मेज तोड़ दी। स्टेज की टेबल पलट दी, इससे निगम में अफरा-तफरी मच गई। पार्षद संघ अध्यक्ष धीरेंद्र रावत और महामंत्री राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि सीएम के कार्यक्रम को देखते हुए बोर्ड बैठक को पहले ही स्थगित कर देना चाहिए था। पार्षदों ने धरने पर बैठकर नगर निगम में स्वतंत्र एमएनए की तैनाती की मांग की। हंगामे से बैठक स्थगित हो गई।
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सात मुद्दों पर होनी थी चर्चा
नगर निगम की बोर्ड बैठक मेें सात मुद्दों पर चर्चा होनी थी। इनमें नगर निगम कार्यकारिणी का गठन, शहीद स्मारक बनाने, निगम की दुकानों की मरम्मत, सड़क पर लगी स्ट्रीट लाइट को पीपीपी मोड पर सड़क के बीच में करने, पुनर्वास की दुकानों के बरामदे में काबिज दुकानदारों का किराया निर्धारित करने, मुक्तिधाम स्थित चुंगी को ध्वस्त कर पार्किंग के लिए देने, निगम के नवनिर्मित भवन पर प्राप्त आपत्तियों पर विचार करने के मुद्दे शामिल थे।

एमएनए काम करने में कम और उसे फंसाने में ज्यादा ध्यान देते हैं। बोर्ड बैठक में कभी समय से नहीं पहुंचते हैं। कार्यालय में भी नहीं बैठते हैं। जनहित के प्रस्तावों पर कार्यवाही नहीं करते हैं। एमएन का ध्यान टैक्स वसूली बढ़ाने और लाइसेंस की जांच कराने के बजाए कर्मचारियों के स्थानांतरण में अधिक रहता है। इससे निगम में विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। - धीरेंद्र रावत, अध्यक्ष पार्षद संघ

काठगोदाम सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की तैयारी प्राथमिकता थी। वहां से लौटते वक्त गाड़ी जाम में फंस गई, जिससे बोर्ड बैठक में पहुंचने में देरी हो गई। - आरडी पालीवाल, एमएनए


एमएनए की मौजूदगी के बगैर बोर्ड बैठक का कोई औचित्य नहीं था। बोर्ड में रखे जाने वाले प्रस्तावों पर चर्चा के दौरान एमएनए और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को ही जवाब देना होता है। एमएनए की अनुपस्थिति से बोर्ड का कोरम पूरा नहीं हो सका, जिससे पार्षद नाराज हो गए। - डा. जोगेंद्र रौतेला, मेयर

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