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तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ अवमानना याचिका दायर
अमर उजाला ब्यूरो नैनीताल।
Updated Wed, 10 Aug 2016 12:11 AM IST
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हाईकोर्ट ने नियुक्ति का आदेश जारी करने के बाद भी नियुक्ति ने देने पर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति और निदेशक के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने अवमानना की याचिका पर सुनवाई करते हुये कहा है कि क्यों न चार्ज फ्रेम किया जाए।
टिहरी निवासी हिमांशु नौटियाल व अन्य ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि पूर्व में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को विश्वविद्यालय की नियमित फैकल्टी मानते हुए उनके सेवा समाप्त करने के आदेश को निरस्त कर दिया था। इस आदेश के बाद भी उन्हें नियुक्ति नहीं मिली।
मंगलवार को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकल पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इससे पहले याचिकाकर्ताओं ने खंडपीठ के समक्ष याचिका दायर कर कहा था कि वे तकनीकी विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के पद पर तैनात थे।
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एक शासनादेश जारी कर कहा गया था कि जब तक शासन पद सृजित नहीं करता है, तब तक याचिकाकर्ताओं को संविदा पर लिया जाए। साथ ही यह शर्त रखी गई कि जो पीबीएएस फार्म भरेगा वही कार्य करेगा। याचिकाकर्ता की ओर से फार्म न भरे जाने पर उनकी सेवा को समाप्त कर दी गई।
इसे कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा गया था कि टीएचडीसी और तकनीकि विश्वविद्यालय के बीच में शर्त थी कि इंजीनियरिंग कालेज चलाने के लिए भवन व अन्य सुविधाएं दी जाएं और फैकल्टी के 56 पद सृजित माने गये थे। खंडपीठ ने शासनादेश व पीबीएएस की फार्म भरने की शर्त को निरस्त करने का आदेश जारी किया था।
साथ की विश्वविद्यालय को नियमावली बनाने के आदेश दिया थे। शासन ने दिसंबर 2015 में शासनादेश जारी कर आदेश का पालन करने को कहा, लेकिन विवि के कुलपति और टीएचडीसी के इंजीनियरिंग कालेज के निदेशक ने आदेश का पालन न कर हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर दी।
इस याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया था। अवमानना याचिका में कहा कि याचिकाकर्ता को अभी तक नियुक्ति नहीं दी गई। कई बार विश्वविद्यालय के कुलपति को जवाब दाखिल करने को कहा गया था, लेकिन उनके द्वारा कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने तकनीकी विवि के कुलपति व निदेशक द्वारा कोर्ट की अवमानना करने पर कहा है कि क्यों न आपके खिलाफ चार्ज फ्रेम किया जाए।
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टिहरी निवासी हिमांशु नौटियाल व अन्य ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि पूर्व में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को विश्वविद्यालय की नियमित फैकल्टी मानते हुए उनके सेवा समाप्त करने के आदेश को निरस्त कर दिया था। इस आदेश के बाद भी उन्हें नियुक्ति नहीं मिली।
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मंगलवार को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकल पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इससे पहले याचिकाकर्ताओं ने खंडपीठ के समक्ष याचिका दायर कर कहा था कि वे तकनीकी विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के पद पर तैनात थे।
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एक शासनादेश जारी कर कहा गया था कि जब तक शासन पद सृजित नहीं करता है, तब तक याचिकाकर्ताओं को संविदा पर लिया जाए। साथ ही यह शर्त रखी गई कि जो पीबीएएस फार्म भरेगा वही कार्य करेगा। याचिकाकर्ता की ओर से फार्म न भरे जाने पर उनकी सेवा को समाप्त कर दी गई।
इसे कोर्ट में चुनौती देते हुए कहा गया था कि टीएचडीसी और तकनीकि विश्वविद्यालय के बीच में शर्त थी कि इंजीनियरिंग कालेज चलाने के लिए भवन व अन्य सुविधाएं दी जाएं और फैकल्टी के 56 पद सृजित माने गये थे। खंडपीठ ने शासनादेश व पीबीएएस की फार्म भरने की शर्त को निरस्त करने का आदेश जारी किया था।
साथ की विश्वविद्यालय को नियमावली बनाने के आदेश दिया थे। शासन ने दिसंबर 2015 में शासनादेश जारी कर आदेश का पालन करने को कहा, लेकिन विवि के कुलपति और टीएचडीसी के इंजीनियरिंग कालेज के निदेशक ने आदेश का पालन न कर हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर दी।
इस याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया था। अवमानना याचिका में कहा कि याचिकाकर्ता को अभी तक नियुक्ति नहीं दी गई। कई बार विश्वविद्यालय के कुलपति को जवाब दाखिल करने को कहा गया था, लेकिन उनके द्वारा कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने तकनीकी विवि के कुलपति व निदेशक द्वारा कोर्ट की अवमानना करने पर कहा है कि क्यों न आपके खिलाफ चार्ज फ्रेम किया जाए।