{"_id":"62128185cef7013a635fa56f","slug":"civic-aminities-kitchha-news-hld454282454","type":"story","status":"publish","title_hn":"मटर की फसल की बर्बाद होने से किसानों के चेहरे लटके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मटर की फसल की बर्बाद होने से किसानों के चेहरे लटके
विज्ञापन
किसान प्रदीप पुजारा
- फोटो : KITCHHA
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किच्छा। पिछले दिनों मौसम में हुए बदलाव से क्षेत्र के किसानों की मटर की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। किसान अपनी सैकड़ों एकड़ मटर की फसल खेत में ही जोतने पर मजबूर है। हालात यह हैं कि किसान को लागत भी नहीं मिल पाई। इधर सरकारी स्तर पर सरकार की ओर से मुआवजा देने की दिशा में कोई योजना शुरू न होने से किसानों के चेहरे मुरझा गए हैं।
जनवरी और फरवरी में हुई बारिश से सैकड़ों एकड़ मटर की फसल बर्बाद हो गई। ग्राम आजाद नगर निवासी प्रदीप पुजारा ने बताया कि बेमौसमी बारिश से उनके खेत में लगी आठ एकड़ मटर की फसल पूरी तरह पीली पड़ गई और अब उन्हें खेत में खड़ी फसल को जोतनी पड़ रही है। इसके अलावा उनके गांव के राजीव फुटेला की आठ, लक्ष्मण दास की 10, मोहन लाल की पांच एकड़, पप्पू खन्ना की छह एकड़, रामजी गुर्जर की सात एकड़, महाराजपुर के राजू खुराना की 13 एकड़, अजय खुराना की पांच एकड़, विनोद ठुकराल की नौ एकड़, सतीश ठुकराल की सात एकड़, रामप्रताप की 10 एकड़, परविंदर सिंह की पांच एकड़ में लगी मटर की फसल खराब हो गई।
इसके अलावा ग्राम शिमला पिस्तौर, मलसा गिरधरपुर, रामेश्वरपुर, मिलक, चकौनी, खमरिया, कनकपुर, गंगापुर, इंद्रपुर, प्रतापपुर, नारायण पुर समेत तमाम इलाकों में सैकड़ों एकड़ मटर की फसल बर्बाद हो गई है। प्रदीप पुजारा ने बताया कि मौसम की मार के चलते इस साल किसान को कई लाख रुपये का घाटा झेलना पड़ा है। सरकार विभिन्न बैंकिंग क्षेत्रों से किसान को ऋण देते समय बीमा प्रीमियम लेती हैं लेकिन मुआवजा नहीं देतीं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इस नुकसान का अभी तक आकलन तक नहीं करवाया। इससे मुआवजा मिले और किसान को कुछ राहत मिल सके।
विज्ञापन
मटर की फसल पर आता है प्रति एकड़ मोटा खर्च
किच्छा। ग्राम महाराजपुर निवासी सुरेश खुराना के अनुसार एक एकड़ मटर पैदा करने के लिए 10000 रुपये का बीज, 1200 रुपये की खाद, 3000 की जुताई, 2000 की दवाई, 1000 की मजदूरी के अलावा जमीन के ठेके का मोटा खर्च लगभग 20 से 25 हजार रुपये प्रति एकड़ आता है। उन्होंने बताया कि पूरे क्षेत्र में किसानों को इस फसल ने मोटा घाटा दिया है। कई किसान बुरी तरह बर्बाद हो गए हैं। प्रदेश सरकार को किसानों की समस्या को देखते हुए मुआवजा देने पर विचार करना चाहिए।
विज्ञापन
जनवरी और फरवरी में हुई बारिश से सैकड़ों एकड़ मटर की फसल बर्बाद हो गई। ग्राम आजाद नगर निवासी प्रदीप पुजारा ने बताया कि बेमौसमी बारिश से उनके खेत में लगी आठ एकड़ मटर की फसल पूरी तरह पीली पड़ गई और अब उन्हें खेत में खड़ी फसल को जोतनी पड़ रही है। इसके अलावा उनके गांव के राजीव फुटेला की आठ, लक्ष्मण दास की 10, मोहन लाल की पांच एकड़, पप्पू खन्ना की छह एकड़, रामजी गुर्जर की सात एकड़, महाराजपुर के राजू खुराना की 13 एकड़, अजय खुराना की पांच एकड़, विनोद ठुकराल की नौ एकड़, सतीश ठुकराल की सात एकड़, रामप्रताप की 10 एकड़, परविंदर सिंह की पांच एकड़ में लगी मटर की फसल खराब हो गई।
विज्ञापन
इसके अलावा ग्राम शिमला पिस्तौर, मलसा गिरधरपुर, रामेश्वरपुर, मिलक, चकौनी, खमरिया, कनकपुर, गंगापुर, इंद्रपुर, प्रतापपुर, नारायण पुर समेत तमाम इलाकों में सैकड़ों एकड़ मटर की फसल बर्बाद हो गई है। प्रदीप पुजारा ने बताया कि मौसम की मार के चलते इस साल किसान को कई लाख रुपये का घाटा झेलना पड़ा है। सरकार विभिन्न बैंकिंग क्षेत्रों से किसान को ऋण देते समय बीमा प्रीमियम लेती हैं लेकिन मुआवजा नहीं देतीं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इस नुकसान का अभी तक आकलन तक नहीं करवाया। इससे मुआवजा मिले और किसान को कुछ राहत मिल सके।
विज्ञापन
मटर की फसल पर आता है प्रति एकड़ मोटा खर्च
किच्छा। ग्राम महाराजपुर निवासी सुरेश खुराना के अनुसार एक एकड़ मटर पैदा करने के लिए 10000 रुपये का बीज, 1200 रुपये की खाद, 3000 की जुताई, 2000 की दवाई, 1000 की मजदूरी के अलावा जमीन के ठेके का मोटा खर्च लगभग 20 से 25 हजार रुपये प्रति एकड़ आता है। उन्होंने बताया कि पूरे क्षेत्र में किसानों को इस फसल ने मोटा घाटा दिया है। कई किसान बुरी तरह बर्बाद हो गए हैं। प्रदेश सरकार को किसानों की समस्या को देखते हुए मुआवजा देने पर विचार करना चाहिए।

किसान सुरेश खुराना- फोटो : KITCHHA

किच्छा के ग्राम आजादनगर में पीली पड़ी मटर की फसल- फोटो : KITCHHA