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रेखा ने बदल ली लाइन
अनूप वाजपेयी, हल्द्वानी।
Updated Wed, 11 May 2016 12:50 AM IST
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रेखा आर्या दो साल पहले जिस अंदाज में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आई थीं उनकी वापसी का तरीका लगभग वैसा ही रहा। करीब डेढ़ महीने तक चली राजनीतिक उठापटक के बाद सोमेश्वर की विधायक रेखा आर्या ने आखिर लाइन बदल ली है।
न्यायालयों की तारीखों और इतने दिनों तक चली राजनीतिक खींचतान और उठापटक में दो विधायक खुलकर इधर से उधर गए हैं। जिस तरह घनसाली से भाजपा विधायक भीम लाल आर्य कांग्रेस विधायकों के साथ देखे जा रहे थे। वैसा ही दृश्य रेखा आर्या ने फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले दिखाया। मतदान के नतीजे तो सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से पता चलेंगे, जबकि भाजपा ने रेखा को खुलकर रेखा लांघने के लिए तैयार कर लिया।
अमर उजाला ने बागियों के कांग्रेस छोड़ने पर 19 मार्च को ही ‘रेखा को पाले में खींचने की तैयारी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। हालांकि तब रेखा आर्या ने ऐसा करने से इंकार किया था।
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रेखा आर्या के भाजपा के पक्ष में खड़े होने का फायदा न तो तब पार्टी को मिला और न ही अब मिलता दिख रहा है। तब अगर रेखा भाजपा में होती तो शायद सोमेश्वर की जमी जमाई परंपरागत सीट उसके हाथ से न जाती। अब जब रेखा लौटी हैं तो भी उनके आने का फायदा फिलहाल भाजपा के रणनीतिकारों को नहीं मिलता दिख रहा है।
रेखा के भाजपा में लौटने का अर्थ साफ है कि उन्हें कहीं न कहीं अपनी पुरानी पार्टी में भविष्य दिख रहा है। रेखा को इस बार शायद भाजपा नेताओं ने समय से काफी पहले ही 2017 के विधानसभा चुनावों के लिए सोमेश्वर सीट के टिकट का आश्वासन दे दिया है। रेखा के एक बार फिर पाला बदलने से सोमेश्वर की राजनीति में भी बदलाव आएगा। अभी तक सोमेश्वर की राजनीति में खुद को उपेक्षित मान बैठे कांग्रेस नेता रेखा के जाने से खुश होंगे। वहीं स्थानीय स्तर पर भाजपा का एक गुट रेखा की घर वापसी को पचा नहीं पा रहा है। कांग्रेस से जुड़ने के बाद रेखा ने भाजपा को नुकसान पहुंचाया है।
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न्यायालयों की तारीखों और इतने दिनों तक चली राजनीतिक खींचतान और उठापटक में दो विधायक खुलकर इधर से उधर गए हैं। जिस तरह घनसाली से भाजपा विधायक भीम लाल आर्य कांग्रेस विधायकों के साथ देखे जा रहे थे। वैसा ही दृश्य रेखा आर्या ने फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले दिखाया। मतदान के नतीजे तो सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से पता चलेंगे, जबकि भाजपा ने रेखा को खुलकर रेखा लांघने के लिए तैयार कर लिया।
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अमर उजाला ने बागियों के कांग्रेस छोड़ने पर 19 मार्च को ही ‘रेखा को पाले में खींचने की तैयारी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। हालांकि तब रेखा आर्या ने ऐसा करने से इंकार किया था।
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रेखा आर्या के भाजपा के पक्ष में खड़े होने का फायदा न तो तब पार्टी को मिला और न ही अब मिलता दिख रहा है। तब अगर रेखा भाजपा में होती तो शायद सोमेश्वर की जमी जमाई परंपरागत सीट उसके हाथ से न जाती। अब जब रेखा लौटी हैं तो भी उनके आने का फायदा फिलहाल भाजपा के रणनीतिकारों को नहीं मिलता दिख रहा है।
रेखा के भाजपा में लौटने का अर्थ साफ है कि उन्हें कहीं न कहीं अपनी पुरानी पार्टी में भविष्य दिख रहा है। रेखा को इस बार शायद भाजपा नेताओं ने समय से काफी पहले ही 2017 के विधानसभा चुनावों के लिए सोमेश्वर सीट के टिकट का आश्वासन दे दिया है। रेखा के एक बार फिर पाला बदलने से सोमेश्वर की राजनीति में भी बदलाव आएगा। अभी तक सोमेश्वर की राजनीति में खुद को उपेक्षित मान बैठे कांग्रेस नेता रेखा के जाने से खुश होंगे। वहीं स्थानीय स्तर पर भाजपा का एक गुट रेखा की घर वापसी को पचा नहीं पा रहा है। कांग्रेस से जुड़ने के बाद रेखा ने भाजपा को नुकसान पहुंचाया है।