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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Centre's response on a petition filed against the president's rule filing

राष्ट्रपति शासन के खिलाफ दायर याचिका पर केंद ने जवाब किया दाखिल 

Wed, 13 Apr 2016 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो,नैनीताल
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो,नैनीताल Updated Wed, 13 Apr 2016 12:12 AM IST
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 हाईकोर्ट ने पूर्व में वित्त विधेयक तथा अन्य प्रकरण पर केंद्र को जवाब  दाखिल करने का समय दिया था, जिसके बाद मंगलवार को केंद्र की ओर से अपना जवाब दाखिल कर दिया गया है। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 18 अप्रैल की तिथि  नियत करते हुए फलोर टेस्ट के एकलपीठ के आदेश को 19 अप्रैल तक के लिए  स्थगित कर दिया था। 
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बता दें कि राष्ट्रपति शासन लगाने के खिलाफ दायर याचिका में बीती बृहस्पतिवार को याचिकाकर्ता हरीश रावत की ओर से पैरवी कर रहे अभिषेक मनुसिंघवी ने बहस की थी।  सिंघवी ने कोर्ट को बताया था कि केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में  राष्ट्रपति शासन लगाए जाने का मुख्य मुद्दा 18 मार्च को विधानसभा में  विनियोग विधेयक के गिर जाने को बनाया है।
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उन्होंने कहा कि यदि विनियोग  विधेयक गिर गया था तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा रामेश्वर प्रसाद व एसआर बोम्मई  आदि मामले में दी गई व्यवस्था के मुताबिक सरकार गिरने का निर्णय फलोर टेस्ट  में होना चाहिए था। उन्होंने बताया कि यदि हाउस में स्पीकर से कोई गलती  हुई तो उसका रिव्यू नहीं किया जा सकता है। उन्होंने बताया था कि राज्यपाल द्वारा केंद्र  सरकार को भेजे गए 8 पत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी एक पत्र में भी  उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने का उल्लेख नहीं है। याचिकाकर्ता  के अधिवक्ता ने मीडिया में आ रही रिपोर्ट का भी उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा  राज्य में सरकार बनाने की कोशिश कर रही है। इसलिए जब तक अदालत में मामला  विचाराधीन है तब तक भाजपा को ऐसा करने से रोका जाए।
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केंद्र सरकार की ओर से  कहा गया था कि 18 मार्च को मत विभाजन की मांग की गई थी लेकिन स्पीकर ने इंकार  कर दिया । साथ ही कहा कि जब 18 मार्च को बिल पास हुआ दिखाया गया तथा  बागियों को अयोग्य करने तक उसको राज्यपाल के पास नहीं भेजा गया। अटॉर्नी  जनरल मुकुल रोहतगी द्वारा कांग्रेस कि इस आपत्ति पर की भाजपा सरकार बनाने  का प्रयास कर सकती है उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी कदम से पूर्व हाईकोर्ट  को सूचित किया जाएगा।


साथ ही यह भी बताया कि मामले में न तो बीजेपी को  पक्षकार बनाया है जबकि राज्यपाल को कानूनी रूप से पक्षकार नहीं बनाया जा  सकता है। इसलिए मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश नहीं दिया जा सकता  है। पूर्व में कोर्ट ने आदेश जारी कर केंद्र को जवाब देने को कहा था। इस आदेश के क्रम में मंगलवार को केंद्र सरकार की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया है। कोर्ट सभी याचिकाओं पर सुनवाई 18 अप्रैल को  करेगी।
 
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