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सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बना ‘सांप वाला भुट्टा’
भूपेश कन्नौजिया मुक्तेश्वर (नैनीताल)।
Updated Sun, 26 Jun 2016 12:22 AM IST
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सांप वाला भुट्टा
- फोटो : अमर उजाला
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बरसात के दौरान क्षेत्र में उगने वाला जंगली पौधा सैलानियों को खूब भा रहा है। देखने में यह पौधा फन फैलाए सांप की तरह नजर आता है। लिहाजा इसे लोग सांप का भुट्टा नाम से जानते हैं। इस पौधे के बारे मैं लोगों को कम ही जानकारी है। सांप की तरह नजर आने वाले इस पौधे से अधिकांश लोग दूर ही रहते हैं। जानकारों के मुताबिक यह बेहद जहरीला पौधा है।
केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान के वैज्ञानिक डा. अनिल कुमार ने बताया कि इसका वानस्पतिक नाम अरीसेमा ट्रीफाइलम है और अलग-अलग देशो में इसे जैक इन दा पलपीट, बिग अॅानियन यानी बड़ा प्याज, इंडियन टर्निप, ब्राउन ड्रैगन, वेक रोबिन, वाइल्ड टर्निप आदि। इस पौधे की एक पत्ती तीन हिस्सों में बंटी होती है। प्रत्येक पत्रक 8-15 सेमी लंबी और 3-7 सेमी व्यापक होती है। कोबरा सांप रूपी फन फैलाए यह पौधा धीरे-धीरे एक हरे रंग के भुट्टे में बदल जाता है और पकने पर लाल हो जाता है। इसमें कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल पाया जाता है जिसे अगर मनुष्य या कोई जीव खा ले तो उसकी मौत तक हो सकती है।
डा. कुमार के मुताबिक कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल गठन भी एथिलीन ग्लाइकोल विष के जहरीले प्रभाव से एक है। इसके सेवन से जीभ पर चुभन, सनसनी, मुंह से झाग, गले में सूजन और पाचन तंत्र में जलन पैदा हो सकती है। दम घुटने लगता है और यदि ज्यादा मात्रा में खा लिया तो मौत तक हो सकती है।
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डा. पांडे ने बताया कि अमेरिका में इस पौधे की जड़ को सब्जी के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसकी जड़ से आंखों के इलाज के लिए दवाई बनाने के साथ, गठिया, ब्रोंकाइटिस, सर्प के काटने का इलाज करने व बांझपन दूर करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल भारत में अभी इस पौधे पर कोई शोध नहीं हो रहा है।
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केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान के वैज्ञानिक डा. अनिल कुमार ने बताया कि इसका वानस्पतिक नाम अरीसेमा ट्रीफाइलम है और अलग-अलग देशो में इसे जैक इन दा पलपीट, बिग अॅानियन यानी बड़ा प्याज, इंडियन टर्निप, ब्राउन ड्रैगन, वेक रोबिन, वाइल्ड टर्निप आदि। इस पौधे की एक पत्ती तीन हिस्सों में बंटी होती है। प्रत्येक पत्रक 8-15 सेमी लंबी और 3-7 सेमी व्यापक होती है। कोबरा सांप रूपी फन फैलाए यह पौधा धीरे-धीरे एक हरे रंग के भुट्टे में बदल जाता है और पकने पर लाल हो जाता है। इसमें कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल पाया जाता है जिसे अगर मनुष्य या कोई जीव खा ले तो उसकी मौत तक हो सकती है।
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डा. कुमार के मुताबिक कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल गठन भी एथिलीन ग्लाइकोल विष के जहरीले प्रभाव से एक है। इसके सेवन से जीभ पर चुभन, सनसनी, मुंह से झाग, गले में सूजन और पाचन तंत्र में जलन पैदा हो सकती है। दम घुटने लगता है और यदि ज्यादा मात्रा में खा लिया तो मौत तक हो सकती है।
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डा. पांडे ने बताया कि अमेरिका में इस पौधे की जड़ को सब्जी के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसकी जड़ से आंखों के इलाज के लिए दवाई बनाने के साथ, गठिया, ब्रोंकाइटिस, सर्प के काटने का इलाज करने व बांझपन दूर करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल भारत में अभी इस पौधे पर कोई शोध नहीं हो रहा है।