फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Amar Ujala Samvad: Academics said that parents have a big responsibility in protecting children from drugs

Amar Ujala Samvad: बच्चों को नशे से बचाने में अभिभावकों की बड़ी जिम्मेदारी, शिक्षाविदों ने रखी अपनी राय

Sat, 09 Nov 2024 01:45 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी
अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी Published by: हीरा मेहरा Updated Sat, 09 Nov 2024 01:45 PM IST
सार

नशे के सौदागारों के लिए हल्द्वानी में बने नए बाजार में युवा उनके लिए टिकाऊ ग्राहक के रूप में सामने आ रहे हैं। स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों को निशाना बनाए जाने पर अमर उजाला ने शिक्षाविदों से संवाद करके इस समस्या पर चर्चा की।

विज्ञापन
Amar Ujala Samvad: Academics said that parents have a big responsibility in protecting children from drugs
Amar Ujala Samvad - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नशे के सौदागारों के लिए हल्द्वानी शहर में बने नए बाजार में युवा उनके लिए सबसे सरल पहुंच वाले और टिकाऊ ग्राहक के रूप में सामने आ रहे हैं। खासतौर से स्कूल-कॉलेज मेंं पढ़ने वाले बच्चों को निशाना बनाए जाने पर अमर उजाला ने शिक्षाविदों से संवाद करके इस समस्या पर चर्चा की। करीब डेढ़ घंटे के मंथन में निष्कर्ष निकला कि मादक पदार्थों के शिकंजे में छात्रों के फंसने का सबसे बड़ा कारण उनके अभिभावकों की लापरवाही है। दूसरा, पुलिस की ओर से प्रभावी अभियान न चलाना। तीसरा, स्कूलों में शिक्षकों को इस बाबत चेकिंग का अधिकार न होना। कुछ पूछताछ करने पर छात्रों द्वारा उल्टा कोई आरोप लगाने से होने वाली कार्रवाई के डर से शिक्षकों के हाथ बांधे हुए है।

विज्ञापन

 

नशे के सौदागर छोटे बच्चों को खोखला कर रहे हैं। आज की तारीख में नशा करना भी स्कूली बच्चों के बीच स्टेटस सिंबल बनता जा रहा है, जो काफी चिंता का विषय है। सरकार चाहे तो इसकी रोकथाम के लिए सब कुछ कर सकती है। प्रशासन ने पहले कार्रवाई की भी थी, इसे अनवरत जारी रखना चाहिए। पुलिस स्कूलों में आकर काउंसलिंग करे।

विज्ञापन

 - राज कांडपाल, उप प्रधानाचार्य, टैगोर पब्लिक स्कूल।

जरूरत है निवारण के तरीकों को अपनाने की। मेरा मानना है कि भटके बच्चों को राह पर लाने में सबसे बड़ी भूमिका अभिभावकों की है। यह सही है कि दोस्त बिगाड़ते हैं, मगर मां-बाप को देखना चाहिए कि वे खुद उन्हें सुधारने के लिए क्या कर रहे हैं। अगर बच्चा च्यूइंगम ज्यादा खा रहा है तो इसके कारणों की भी तलाश करें।

विज्ञापन
विज्ञापन

- मीना सती, प्रधानाचार्य, बीयर शिवा सीनियर सेकेंडरी स्कूल, हल्द्वानी

कई बार मैंने स्कूल के नजदीक आम के बाग में स्कूली बच्चों को व्हाइटनर हाथ में लिए देखा। यही सस्ता नशा बाद में स्मैक और गांजे के सेवन तक ले जाता है। गलती मां-बाप की भी है। बच्चे मोबाइल फोन पर मीम्स देखकर यह सब सीख रहे हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे देखें उनके बच्चे स्कूल टाइम के अलावा कहां अपना समय खर्च कर रहे हैं।

-मंजुला कार्की, शिक्षक, लक्ष इंटरनेशनल स्कूल, हल्द्वानी

सिर्फ एक दिन के आंदोलन से काम नहींं चलेगा। तम्बाकू निषेध दिवस मनाकर नहीं, बल्कि इसके मानकों को अपनाने से काम बनेगा। बच्चों को कोई भी नशा न करने की समय-समय पर शपथ दिलाई जाए। बच्चों में शिक्षकों के प्रति डर खत्म करना गलत साबित हो रहा है। जबकि संस्कार देने में उनका बड़ा रोल है।
- मनी मल्होत्रा, उप प्रधानाचार्य, जस गोविन पब्लिक स्कूल

सभी को मिलकर बच्चों को बचाना है। अभिभावक समय देकर बच्चों को बताएं कि क्या गलत है और क्या सही। उनके साथ टीवी पर ऐसे कार्यक्रम देखें, जिनमें नशे से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया हो। बच्चों को स्कूलों में शपथ दिलाना जरूरी है। प्रशासन नुक्कड़ नाटक के जरिये भी समझाने का काम कर सकता है।
-ममता तनेजा, उप प्रधानाचार्य, इंस्पिरेशन पब्लिक स्कूल, काठगोदाम

 

कोविड काल में ओटीटी आदि पर फिल्में देखकर बच्चे खूब बिगड़े। आज की जेनरेशन विजन मांगती है, इसलिए अभिभावक उन्हें बताएं कि नशा क्यों गलत है। जब तक बाजार में नशे की डिमांड है, सौदागर किसी न किसी तरीके से सप्लाई करते रहेंगे। पुलिस आकस्मिक चेकिंग करे तो कुछ कंट्रोल किया जा सकता है।
 -रूपाली सहगल, प्रधानाचार्य, औरम दि ग्लोबल स्कूल, हल्द्वानी

एक बार मैं हैरान रह गया जब मैंने अपने पढ़ाए बच्चे को मेडिकल स्टोर से नशे के काम में आने वाली दवा खरीदते हुए देखा। मेडिकल स्टोर मालिक से शिकायत की तो उसने कई बहाने बनाए। काठगोदाम थाना प्रभारी को बताया, मगर कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस को नशे के अड्डे पता हैं, वहां छापे मारना चाहिए।
- विजय जोशी, उप प्रधानाचार्य, वेंडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गौलापार

कुछ साल पहले एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया था। ज्यादातर जगह इसने काम करना बंद कर दिया, मगर हमने इसका अस्तित्व बनाया हुआ है। इसका असर यह है कि संस्थान के आसपास के दुकानदार स्कूल की छुट्टी के समय सिगरेट नहीं बेचते हैं। और चीजों की तरह नशा मुक्ति के लिए हेल्पलाइन नंबर हो।
 - कृष्णा जोशी, प्रधानाचार्य, दून कॉन्वेंट स्कूल, हल्द्वानी

नशे का जाल बड़ा होते जाने के कारण तो सबको पता हैं, इसके निवारण के लिए भी लोगों को आगे आना चाहिए। अभिभावक बच्चों को समय नहीं दे रहे, इसलिए उनकी बुरी आदतों का समय पर पता नहीं चल पाता। समाज के लोग जिम्मेदारी मानें, पुलिस को सूचना दें।


-मनोज कुमार सिंह, प्रधानाचार्य, सेंट पॉल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, काठगोदाम

नशे की गिरफ्त से बाहर आए लोगों को सामने लाकर बच्चों को बताया जाए कि इसकी लत कितना नुकसान करती है। तब लती बच्चों को अपना हुआ नुकसान पता चलेगा।
- नमिता जोशी, एकेडमिक कोआर्डिनेटर, दि शिवालिक इंटरनेशनल स्कूल, हल्द्वानी

ताजा स्थिति बताती है कि संकेत शुभ नहीं हैं, 70 फीसदी बच्चे किसी न किसी नशे के आदी हो चुके हैं। इसके निवारण के लिए पुलिस को अपनी अन्य ड्यूटी की तरह इसे भी समझना चाहिए, आखिर उनके परिवारों में भी बच्चे हैं।
 -कमल जोशी, फिजिकल एजुकेशन टीचर, एचएन इंटर कॉलेज, हल्द्वानी

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed