Pilot Baba: महायोगी पायलट बाबा के महाप्रयाण से गेठिया आश्रम में छाया सन्नाटा, 1980 में बाबा ने की थी स्थापना
बिहार निवासी तथा भारतीय वायु सेवा में विंग कमांडर रहे महायोगी पायलट बाबा ने ज्योलीकोट-भवाली मार्ग में गेठिया के समीप 1980 के दौरान आश्रम की स्थापना की थी। धीरे-धीरे विकसित होता आश्रम आज एक बड़े आश्रम के रूप में स्थापित हो चुका है।
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मूल रूप से बिहार निवासी तथा भारतीय वायु सेवा में विंग कमांडर रहे महायोगी पायलट बाबा ने ज्योलीकोट-भवाली मार्ग में गेठिया के समीप 1980 के दौरान आश्रम की स्थापना की थी। धीरे-धीरे विकसित होता आश्रम आज एक बड़े आश्रम के रूप में स्थापित हो चुका है। आश्रम में देवी देवताओं की दर्जनों मूर्तियां स्थापित है। लगभग 100 कमरे वाले आश्रम में हनुमान जी की 50 फीट और गणेश जी की 18 फीट ज्यादा ऊंची मूर्ति, प्रवेश द्वार में जल सेवा के लिए बनी गाय मौजूद है। गाय के थनों से राहगीरों को पेय जल मिलता है, जो आश्रम का आकर्षण है। आश्रम में भ्रमण के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं।
जानकारी के मुताबिक गेठिया आश्रम में 1990 में पायलट बाबा द्वारा 9 दिनों तक भू-समाधि ली गई थी। इसके कुछ वर्षों बाद एक बार पुनः बाबा ने समाधि ली। इसके बाद उत्तरी भारत में बाबा के भक्तों की संख्या में इजाफा हुआ। सांसद अजय भट्ट पायलट बाबा के करीबी शिष्यों में शामिल है। पायलट बाबा की सबसे खास जापानी शिष्या आईकावा ने भी गेठिया आश्रम में पांच दिन की जमीनी समाधि ली थी। जिसकी पूरे देश में चर्चा रही। बताया जाता है कि केको आइकावा जापान की जानी मानी वकील थी, लेकिन बाबा के सानिध्य के बाद उन्होने आध्यात्मिक यात्रा शुरू की।
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आश्रम स्थापना के बाद लंबे समय तक हर दूसरे तीसरे वर्ष विशाल धार्मिक आयोजन होते रहते थे, साथ ही भक्तों द्वारा गुरु पूर्णिमा पर गुरु पूजा आतिशबाजी और धार्मिक आयोजन भी काफी समय तक हुआ। इसलिए एक दशक से अभी तक कोई बड़ा कार्यक्रम आयोजित नहीं हुआ है। आश्रम परिसर में बीते दशक में एक स्कूल स्थापित किया गया जो तकरीबन छह सात साल के बाद बंद है। आश्रम के समीप बाबा के ट्रस्ट द्वारा दो वर्षों से बाबा नर्सिंग कॉलेज चल रहा है।
2000-2001 में बाबा के ही कुछ तथाकथित शिष्यों ने बाबा के नाम का प्रयोग एक रुपए में कंप्यूटर शिक्षा के नाम पर उत्तराखंड, बिहार सहित देश के तमाम राज्यों में बड़े लोगों को अपने चंगुल में फंसाया। इसका भांडा फूटने पर आश्रम सुर्खियों में बना रहा। हालांकि आश्रम से स्थानीय लोगों का बहुत ज्यादा गहरा संबंध नही बन पाया, लेकिन बाबा के आश्रम पहुंचने के बाद विदेशी और देश के विभिन्न हिस्सों से भक्तों की बड़ी संख्या में यहां पहुंचते थे। बीते वर्ष 2023 जून में बाबा आखरी बार एक दिन के प्रवास में आए थे।
यहां अलका होटल में ठहरते थे बाबा
एयरफोर्स में रहने के दौरान बाबा यहां के प्रतिष्ठित अलका होटल में आते थे। अलका होटल के स्वामी वेद साह बताते हैं कि एयर फोर्स में रहने के दौरान वह नियमित रूप से नैनीताल आते थे और उन्हीं के होटल में ठहरते थे। बाद में ज्ञात हुआ कि वह बाबा बन गए। इसके बाद वह एक बार ही होटल में पहुंचे थे।
बाबा के भक्त पूर्व पालिका सभासद संजय साह बताते हैं कि बाबा की ख्याति देश ही नहीं विदेशों में भी थी। जापान में उनके काफी भक्त थे, जो नैनीताल आश्रम भी आते थे। उनके तत्कालीन भक्त बताते थे कि ऐयर फोर्स में रहने के दौरान एक बार उनका प्लेन चायना सीमा में चला गया और भारत से उनका कनैक्शन कट गया। इसी दौरान उन्हें आध्यात्मिक शिक्त की प्राप्ति हुई। इस घटना के बाद ही उन्होंने आर्मी छोड़ी और आध्यात्म की ओर मुड़ गए।