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Nainital News: 2.60 लाख के चेक बाउंस मामले में आरोपी दोषमुक्त
Fri, 23 Oct 2026 02:33 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Fri, 23 Oct 2026 02:33 AM IST
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नैनीताल। चेक बाउंस के एक मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि रंजन की अदालत ने हरीश सिंह अधिकारी को दोषमुक्त कर दिया है। मामला 2.60 लाख के चेक के अनादर से जुड़ा था। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि परिवादी काव्या बेदी प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर यह साबित नहीं कर सकीं कि संबंधित चेक कानूनी रूप से वसूली योग्य ऋण के भुगतान के लिए जारी किया गया था। इस आधार पर अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को दोषमुक्त करने का आदेश दिया।
मामले के अनुसार, मल्लीताल निवासी काव्या बेदी ने हल्द्वानी निवासी हरीश सिंह अधिकारी के खिलाफ परिवाद दायर किया था। परिवादी का आरोप था कि उन्होंने आरोपी को अलग-अलग समय पर कुल 2.60 लाख उधार दिए थे। इसके भुगतान के लिए आरोपी ने 13 मई 2025 को भारतीय स्टेट बैंक का 2.60 लाख का चेक दिया। परिवादी ने चेक बैंक में जमा किया तो 26 जून 2025 को बाउंस हो गया। इसके बाद कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर अदालत में मामला दायर किया गया।
सुनवाई के दौरान आरोपी ने दावा किया कि उसने वर्ष 2016 में करीब 40 हजार उधार लिए थे और सुरक्षा के तौर पर दो चेक दिए थे। उसके अनुसार, राशि लौटाने के बाद एक चेक वापस नहीं किया गया और उसका दुरुपयोग किया गया। अदालत ने पाया कि परिवादी और उनके पति के बयानों में ऋण देने की तारीख को लेकर स्पष्टता नहीं थी। बयानों में राशि वर्ष 2019 में दिए जाने की बात सामने आई जबकि परिवाद अगस्त 2025 में दायर किया गया। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2022 में दिए गए दो अन्य चेकों और उनसे संबंधित लेनदेन का परिवाद में स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था। अदालत के अनुसार, प्रस्तुत साक्ष्यों से धारा 138 के तहत अपराध के आवश्यक तत्व साबित नहीं हुए। इसके बाद आरोपी को दोषमुक्त कर दिया गया।
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मामले के अनुसार, मल्लीताल निवासी काव्या बेदी ने हल्द्वानी निवासी हरीश सिंह अधिकारी के खिलाफ परिवाद दायर किया था। परिवादी का आरोप था कि उन्होंने आरोपी को अलग-अलग समय पर कुल 2.60 लाख उधार दिए थे। इसके भुगतान के लिए आरोपी ने 13 मई 2025 को भारतीय स्टेट बैंक का 2.60 लाख का चेक दिया। परिवादी ने चेक बैंक में जमा किया तो 26 जून 2025 को बाउंस हो गया। इसके बाद कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर अदालत में मामला दायर किया गया।
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सुनवाई के दौरान आरोपी ने दावा किया कि उसने वर्ष 2016 में करीब 40 हजार उधार लिए थे और सुरक्षा के तौर पर दो चेक दिए थे। उसके अनुसार, राशि लौटाने के बाद एक चेक वापस नहीं किया गया और उसका दुरुपयोग किया गया। अदालत ने पाया कि परिवादी और उनके पति के बयानों में ऋण देने की तारीख को लेकर स्पष्टता नहीं थी। बयानों में राशि वर्ष 2019 में दिए जाने की बात सामने आई जबकि परिवाद अगस्त 2025 में दायर किया गया। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2022 में दिए गए दो अन्य चेकों और उनसे संबंधित लेनदेन का परिवाद में स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था। अदालत के अनुसार, प्रस्तुत साक्ष्यों से धारा 138 के तहत अपराध के आवश्यक तत्व साबित नहीं हुए। इसके बाद आरोपी को दोषमुक्त कर दिया गया।
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