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आदेश आते रहे, ‘बत्तियां’ बढ़ती गई
Nainital
Updated Sat, 14 Dec 2013 05:48 AM IST
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हल्द्वानी। 2001 से बत्ती लगाने को लेकर आदेशों का सिलसिला शुरू हुआ, जो 2013 तक चलता ही रहा। आदेश के तहत बत्ती लगाने वालों की संख्या भी बढ़ती गई, जो अफसर बत्ती लगाने को अधिकृत नहीं थे, वह नियम-कानून ताक पर रख ‘स्वयंभू’ बने और खुद बत्ती लगा ली। लेकिन ट्रक, टेंपो में छोटी-छोटी खामी देखने वाला परिवहन विभाग कार्रवाई तो दूर, एक नोटिस भेजने तक की हिम्मत नहीं जुटा पाया।
फरवरी 2001 में राज्यपाल से लेकर उत्तरांचल के न्यायिक सेवा के जिला जज, उनके समकक्ष अधिकारी गण समेत 9 लोगों को बत्ती लगाने को अधिकृत किया गया। इसी में डीएम और एसएसपी को बोनट पर छोटी नारंगी बत्ती लगाने को निर्देशित किया गया। दो साल बाद ही नारंगी बत्ती खराब होने लगी, तो संशोधन आदेश के तहत 2003 में इसे नीली बत्ती कर दिया गया। पर अधिकारी बोनट की जगह इस टॉप पर लगा रहे हैं। 2006 में राजकीय वाहनों में जनप्रतिनिधियों और अफसरों के लिए बत्तियों को लेकर नया आदेश हुआ, इसमें राज्य के पूर्व सीएम, नेता-प्रतिपक्ष को बोनट पर लालबत्ती लगाने का आदेश कर दिया गया। इसी के साथ आला अफसर मुख्य सचिव और डीजीपी को लाल बत्ती मिल गई। 2009 में फिर आदेश हुआ। इस बार सभी सभा सचिवों को बोनट पर लाल बत्ती लगाने को अधिकृत कर दिया गया। 2013 में बत्ती के संबंध में फिर आदेश हुआ। इस बार आरटीओ समेत प्रवर्तन कार्य से जुड़े विभाग मसलन सेल्स टैक्स के अफसरों के लिए नीली-लाल बत्ती एक साथ लगाने की अनुमति प्रदान कर दी गई।
होगी कार्रवाई : एआरटीओ प्रवर्तन
हल्द्वानी। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डा. गुरदेव सिंह कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल में जो आदेश दिया है, उसमें तीन महीने का समय राज्य सरकार को भी दिया है, इसमें राज्य सरकारों को नियम बनाना है, जब तक इस संबंध में कोई नया निर्देश शासन से नहीं मिल जाता है, महकमा अनाधिकृत तौर पर बत्ती, हूटर, फ्लैशर आदि लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
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15 लाख तक की गाड़ी ले सकते हैं कैबिनेट मंत्री
हल्द्वानी। जन प्रतिनिधियों से लेकर अफसरों तक किस वाहन से चलेंगे, उसकी भी कैटेगिरी है। कैबिनेट मंत्री 15 लाख तक की गाड़ी ले सकते हैं, इसमें टोयटा, स्कोडा, होंडा सिटी से लेकर एसयूवी-500 तक है। इसी तरह प्रमुख सचिव स्तर के लिए 12 लाख का वाहन है, जिसमें होंडा सिटी, टोयटा है। अपर सचिव स्तर के लिए आठ लाख और निगम प्रमुखों के लिए छह लाख तक के वाहन से चलने को अधिकृत किया गया है।
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फरवरी 2001 में राज्यपाल से लेकर उत्तरांचल के न्यायिक सेवा के जिला जज, उनके समकक्ष अधिकारी गण समेत 9 लोगों को बत्ती लगाने को अधिकृत किया गया। इसी में डीएम और एसएसपी को बोनट पर छोटी नारंगी बत्ती लगाने को निर्देशित किया गया। दो साल बाद ही नारंगी बत्ती खराब होने लगी, तो संशोधन आदेश के तहत 2003 में इसे नीली बत्ती कर दिया गया। पर अधिकारी बोनट की जगह इस टॉप पर लगा रहे हैं। 2006 में राजकीय वाहनों में जनप्रतिनिधियों और अफसरों के लिए बत्तियों को लेकर नया आदेश हुआ, इसमें राज्य के पूर्व सीएम, नेता-प्रतिपक्ष को बोनट पर लालबत्ती लगाने का आदेश कर दिया गया। इसी के साथ आला अफसर मुख्य सचिव और डीजीपी को लाल बत्ती मिल गई। 2009 में फिर आदेश हुआ। इस बार सभी सभा सचिवों को बोनट पर लाल बत्ती लगाने को अधिकृत कर दिया गया। 2013 में बत्ती के संबंध में फिर आदेश हुआ। इस बार आरटीओ समेत प्रवर्तन कार्य से जुड़े विभाग मसलन सेल्स टैक्स के अफसरों के लिए नीली-लाल बत्ती एक साथ लगाने की अनुमति प्रदान कर दी गई।
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होगी कार्रवाई : एआरटीओ प्रवर्तन
हल्द्वानी। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डा. गुरदेव सिंह कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल में जो आदेश दिया है, उसमें तीन महीने का समय राज्य सरकार को भी दिया है, इसमें राज्य सरकारों को नियम बनाना है, जब तक इस संबंध में कोई नया निर्देश शासन से नहीं मिल जाता है, महकमा अनाधिकृत तौर पर बत्ती, हूटर, फ्लैशर आदि लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
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15 लाख तक की गाड़ी ले सकते हैं कैबिनेट मंत्री
हल्द्वानी। जन प्रतिनिधियों से लेकर अफसरों तक किस वाहन से चलेंगे, उसकी भी कैटेगिरी है। कैबिनेट मंत्री 15 लाख तक की गाड़ी ले सकते हैं, इसमें टोयटा, स्कोडा, होंडा सिटी से लेकर एसयूवी-500 तक है। इसी तरह प्रमुख सचिव स्तर के लिए 12 लाख का वाहन है, जिसमें होंडा सिटी, टोयटा है। अपर सचिव स्तर के लिए आठ लाख और निगम प्रमुखों के लिए छह लाख तक के वाहन से चलने को अधिकृत किया गया है।