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वन निगम के चहेते ठेकेदारों की मनमानी का एक और खुलासा हुआ है
Updated Thu, 16 Nov 2017 02:22 AM IST
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हल्द्वानी। वन विकास निगम की इलेक्ट्रानिक धर्मकांटा के साल 2004 में किए पहले अनुबंध में ही फर्जी हस्ताक्षर कर धोखाधड़ी करने का भंडाफोड़ हुआ है। ठेका हासिल करने वाली हल्द्वानी लालकुआं धर्मकांटा आनर्स वेलफेयर सोसायटी की तरफ से बतौर गवाह हस्ताक्षर करने वाली दया जोशी ने अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से इंकार किया है। उन्होंने हस्ताक्षर को फर्जी बताते हुए उनके नाम का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। जोशी ने पुलिस व वन विकास निगम के अधिकारियों को शिकायती पत्र लिखकर मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
बरेली रोड निवासी दया जोशी ने पत्र लिख कर कहा है कि सूचना के अधिकार के तहत एक साप्ताहिक समाचार पत्र के संवाददाता द्वारा मांगी गई जानकारियों में हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। उन्होंने बताया कि साल 2004 में हल्द्वानी लालकुआं धर्मकांटा आनर्स वेलफेयर सोसायटी का वन विकास निगम के साथ गौला नदी के उप खनिज निकासी के गेटों पर इलेक्ट्रानिक धर्मकांटा लगाने का ठेका हुआ था। उस दौरान वह एक अखबार में काम करती थी। ठेके के बाद ठेकेदार और वन निगम में 120 रुपये के स्टांप पर अनुबंध हुआ। इस अनुबंध में निविदा की सभी शर्तें थी, ठेकेदार की तरफ से उनका बतौर गवाह नाम लिखा हुआ है और उनके अखबार का नाम भी लिखा गया था। जो सीधे तौर पर वन निगम के अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए किया गया था। ऐसे किसी अनुबंध पर उन्होंने कभी हस्ताक्षर नहीं किए। अनुबंध पर साजिश के तहत फर्जी हस्ताक्षर कर नाम व पद का दुरुपयोग किया गया है जो अपराध है। उन्होंने दूसरे अनुबंधों में भी फर्जीवाड़ा होने की आशंका जताई है। जोशी ने डीआईजी पूरन सिंह रावत को पत्र लिखकर मुकदमा दर्ज करने व फर्जी हस्ताक्षर कांड का खुलासा करने की मांग की है। साथ ही देहरादून में वन विकास निगम के महाप्रबंधक जेएस सुहाग को भी शिकायती पत्र लिख कर मामले की जांच की मांग की गई है।
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बरेली रोड निवासी दया जोशी ने पत्र लिख कर कहा है कि सूचना के अधिकार के तहत एक साप्ताहिक समाचार पत्र के संवाददाता द्वारा मांगी गई जानकारियों में हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। उन्होंने बताया कि साल 2004 में हल्द्वानी लालकुआं धर्मकांटा आनर्स वेलफेयर सोसायटी का वन विकास निगम के साथ गौला नदी के उप खनिज निकासी के गेटों पर इलेक्ट्रानिक धर्मकांटा लगाने का ठेका हुआ था। उस दौरान वह एक अखबार में काम करती थी। ठेके के बाद ठेकेदार और वन निगम में 120 रुपये के स्टांप पर अनुबंध हुआ। इस अनुबंध में निविदा की सभी शर्तें थी, ठेकेदार की तरफ से उनका बतौर गवाह नाम लिखा हुआ है और उनके अखबार का नाम भी लिखा गया था। जो सीधे तौर पर वन निगम के अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए किया गया था। ऐसे किसी अनुबंध पर उन्होंने कभी हस्ताक्षर नहीं किए। अनुबंध पर साजिश के तहत फर्जी हस्ताक्षर कर नाम व पद का दुरुपयोग किया गया है जो अपराध है। उन्होंने दूसरे अनुबंधों में भी फर्जीवाड़ा होने की आशंका जताई है। जोशी ने डीआईजी पूरन सिंह रावत को पत्र लिखकर मुकदमा दर्ज करने व फर्जी हस्ताक्षर कांड का खुलासा करने की मांग की है। साथ ही देहरादून में वन विकास निगम के महाप्रबंधक जेएस सुहाग को भी शिकायती पत्र लिख कर मामले की जांच की मांग की गई है।
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