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अब मिलेगा वनाग्नि का पूर्वानुमान

Mon, 18 Feb 2019 01:59 AM IST
madan singh Madan Singh
Updated Mon, 18 Feb 2019 01:59 AM IST
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अब मिलेगा वनाग्नि का पूर्वानुमान
जंगलों में आग - फोटो : demo pic
हल्द्वानी। प्रदेश में कौन सा जंगल वनाग्नि की दृष्टि से संवेदनशील है, जहां पर आग भड़क सकती है उसकी सूचना वन कर्मियों को पहले मिल जाएगी। यह आग कितनी बड़ी और विनाशकारी हो सकती है, उसका अंदाजा और संबंधित क्षेत्र का नक्शा भी वन कर्मियों को मिल जाएगा। ऐसे में बेहतर संसाधनों के साथ त्वरित गति से आग बुझाने का अभियान चलाया जा सकेगा। यह सूचना वन विभाग को इसरो के माध्यम से फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) उपलब्ध कराएगा।
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एफएसआई 2012 से जंगलों की आग की रोकथाम पर काम कर रहा है। एफएसआई ने आग की सूचनाओं को ज्यादा सटीक और तेज बनाने के लिए 16 जनवरी को फायर अलर्ट सिस्टम लागू किया है। देशभर में एफएसआई के केंद्र स्थापित हैं। इन केंद्रों का सूचना तंत्र सेटेलाइट से जुड़ा है। सेटेलाइट के जरिये विजीवल एंड इन्फ्रारेड इमेजर रेडियोमीटर सूट (वीआईआईआरएस) से जंगलों की लगातार निगरानी होगी।
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अब वनाग्नि का मिलेगा सटीक पूर्वानुमान
इस साल लागू हुआ फायर अलर्ट सिस्टम, आग की संभावना वाले वन क्षेत्रों के अधिकारियों के पास पहुंचेगी जानकारी


ऐसे काम करता है वीआईआईआरएस
सेटेलाइट में लगा वीआईआईआरएस जंगलों में तापमान, हवा की गति और आर्द्रता के अनुसार काम करता है। जहां सामान्य से अधिक तापमान मिलता है। कैमरा वहां की तस्वीर और नक्शा एफएसआई को भेजता है। इतना ही नहीं हवा की गति के अनुसार आग की विभीषिका का अनुमान भी भेज देता है। एफएसआई आग के पूर्वानुमान की सूचना वन विभाग को भेजता है। इसमें नक्शा भी रहता है। जिससे वन विभाग को आग की सटीक सूचनाएं मिलेंगी। जिस क्षेत्र में आग की संभावना रहेगी, वहां उस क्षेत्र में एफएसआई पूर्वानुमान भेज देगा।
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पहले नासा पर थी निभर्रता
वनाग्नि की सूचनाओं के लिए अमेरिका की एजेंसी नासा पर एफएसआई निर्भर था, लेकिन अब इसरो भी सेटेलाइट के जरिये आग की पहचान करता है। एफएसआई इसरो के भुवन पोर्टल के माध्यम से अब आग की सूचनाएं लेता है। इसरो के सेटेलाइट से अब जल्दी और सटीक सूचनाएं भी मिल जाती हैं। क्योंकि नासा पूरे विश्व के जंगलों की आग की सूचना देता था। इस कारण किसी भी देश के जंगल की सूचना चार घंटे बाद ही मिल पाती थी।



जंगलों में आग का पूर्वानुमान पहले से ज्यादा सटीक होगा। इससे जंगलों की आग रोकने में मदद मिलेगी। जिस क्षेत्र में आग की संभावना होगी, उसका पूर्वानुमान क्षेत्र को भुवन पोर्टल के माध्यम से भेज दिया जाएगा।
-रंजन मिश्रा, सीसीएफ एवं नोडल अधिकारी वनाग्नि नियंत्रण
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