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पति और सास-ससुर को तीन-तीन साल का कारावास
Updated Sat, 30 Jun 2018 11:24 PM IST
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अल्मोड़ा। सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने महिला के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार के मामले में धारा 498(ए) में पति, सास और ससुर को तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। जबकि पति प्रकाश चंद्र को 50 हजार, ससुर और सास को 10 और पांच हजार रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया है। यह राशि मृतका की पुत्री को दी जाएगी।
मालूम हो कि द्वाराहाट तहसील की बावन गांव निवासी हेमा देवी पुत्री जगन्नाथ फुलारा का विवाह सात दिसंबर 2013 को द्वाराहाट तहसील के धमेड़ा गांव निवासी प्रकाश चंद्र पुत्र किशनानंद के साथ हुआ। चार अगस्त 2017 को हेमा देवी की मौत हो गई। मृतका के पिता जगन्नाथ फुलारा ने घटना की प्राथमिकी क्षेत्रीय पटवारी भेटीकामा के यहां दर्ज कराई। रिपोर्ट में कहा गया था कि पति प्रकाश चंद्र, सास तुलसी देवी और ससुर किशनानंद द्वारा हेमा के साथ किए गए क्रूरतापूर्ण व्यवहार के कारण हेमा देवी की मौत हुई। इस मामले की सुनवाई सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा की अदालत में हुई।
अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गिरीश चंद्र फुलारा, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शेखर चंद्र नैलवाल ने पैरवी करते हुए अभियोजन की ओर से न्यायालय में नौ गवाह पेश कराए गए। सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने पत्रावली में मौजूद मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों का परिसीसन करने के बाद अपने फैसले में आरोपी प्रकाश चंद्र को 498ए में तीन साल की सजा और 50 हजार अर्थदंड से दंडित किया।
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आरोपी किशना नंद को धारा धारा 498ए में तीन साल का कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना, तुलसी देवी को धारा 498ए में तीन साल का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। जबकि तीनों आरोपियों को धारा 304बी और 302 में दोषमुक्त कर दिया। आदेश में कहा गया है कि अर्थदंड से प्राप्त संपूर्ण धनराशि 65 हजार रुपये मृतका की पुत्री के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास के लिए एफडीआर बनाकर दी जाएगी।
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मालूम हो कि द्वाराहाट तहसील की बावन गांव निवासी हेमा देवी पुत्री जगन्नाथ फुलारा का विवाह सात दिसंबर 2013 को द्वाराहाट तहसील के धमेड़ा गांव निवासी प्रकाश चंद्र पुत्र किशनानंद के साथ हुआ। चार अगस्त 2017 को हेमा देवी की मौत हो गई। मृतका के पिता जगन्नाथ फुलारा ने घटना की प्राथमिकी क्षेत्रीय पटवारी भेटीकामा के यहां दर्ज कराई। रिपोर्ट में कहा गया था कि पति प्रकाश चंद्र, सास तुलसी देवी और ससुर किशनानंद द्वारा हेमा के साथ किए गए क्रूरतापूर्ण व्यवहार के कारण हेमा देवी की मौत हुई। इस मामले की सुनवाई सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा की अदालत में हुई।
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अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गिरीश चंद्र फुलारा, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शेखर चंद्र नैलवाल ने पैरवी करते हुए अभियोजन की ओर से न्यायालय में नौ गवाह पेश कराए गए। सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने पत्रावली में मौजूद मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों का परिसीसन करने के बाद अपने फैसले में आरोपी प्रकाश चंद्र को 498ए में तीन साल की सजा और 50 हजार अर्थदंड से दंडित किया।
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आरोपी किशना नंद को धारा धारा 498ए में तीन साल का कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना, तुलसी देवी को धारा 498ए में तीन साल का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। जबकि तीनों आरोपियों को धारा 304बी और 302 में दोषमुक्त कर दिया। आदेश में कहा गया है कि अर्थदंड से प्राप्त संपूर्ण धनराशि 65 हजार रुपये मृतका की पुत्री के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास के लिए एफडीआर बनाकर दी जाएगी।