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एसटीएच में फिर बंद हुए गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड
Updated Sat, 18 Aug 2018 01:28 AM IST
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हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड बंद हो गए हैं। पीसीपीएनडीटी एक्ट के बंदिशें अल्ट्रासाउंड में आड़े आ रही हैं।
सुशीला तिवारी अस्पताल में प्रतिदिन 40 से 50 अल्ट्रासाउंड होते हैं। इनमें 10 से 15 गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड के साथ होते हैं। रेडियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष के चले जाने के बाद इमरजेंसी में आने वाली गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाते हैं। ऐसे में महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटर के चक्कर काटने पड़ते हैं। एमबीबीएस के बाद छह माह का डिप्लोमा करने वाले छात्र-छात्राओं को गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड करने का अधिकार है। जबकि एमबीबीएस के बाद पीजी कर रहे छात्र-छात्राओं को अल्ट्रासाउंड करने का अधिकार नहीं है। ऐसे में बिना किसी प्रपत्र के अगर रात में कोई गर्भवती महिला पहुंचती है तो उसका अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता है।
पीसीपीएनडीटी एक्ट में बदलाव के कारण हो रही है परेशानी, एक दिन में 40 से 50 अल्ट्रासाउंड होते हैं
दो बजे दोपहर के बाद इमरजेंसी में आने वाली गर्भवती महिलाओं के नहीं हो रहे हैं अल्ट्रासाउंड
पीजी के लिए डीएम से मांगेंगे अनुमति
हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा का कहना है कि पीजी कर रहे छात्र-छात्राओं को अल्ट्रासाउंड करने की अनुमति जिलाधिकारी से मिलकर शीघ्र मांगेंगे। कहा कि अन्य राज्यों में पीजी कर रहे छात्र-छात्राएं अल्ट्रासाउंड करते हैैं और कोई रोक नहीं है। जबकि यह रोक सिर्फ उत्तराखंड में लगाई गई है। जिलाधिकारी वीके सुमन से मिलकर आने वाली समस्याओं के बारे में बताएंगे और अनुमति देने का आग्रह करेंगे। डॉ. भैसोड़ा ने बताया कि नियमों में सख्ती के बावजूद भी सभी गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड करने का प्रयास किया जाता है।
विभाग में अधीनस्थों को आदेश है कि किसी भी समय जरूरत पड़ने पर मुझे काल कर सकते हैं। सभी के अल्ट्रासाउंड किए जा रहे हैं। गर्भवती महिला की गंभीर स्थिति होने पर डॉक्टर बिना प्रपत्र के भी अल्ट्रासाउंड कर सकता है। कहा कि विभाग में अन्य डॉक्टर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सुबह नौ से शाम पांच बजे तक मैं अस्पताल में मौजूद रहता हूं और अल्ट्रासाउंड होते हैं। इमरजेंसी आने पर अगर फोन आता है तो अस्पताल पहुंचकर अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं।
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-डॉ. पंकज महेश, विभागाध्यक्ष, रेडियोलॉजी
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सुशीला तिवारी अस्पताल में प्रतिदिन 40 से 50 अल्ट्रासाउंड होते हैं। इनमें 10 से 15 गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड के साथ होते हैं। रेडियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष के चले जाने के बाद इमरजेंसी में आने वाली गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाते हैं। ऐसे में महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी डायग्नोस्टिक सेंटर के चक्कर काटने पड़ते हैं। एमबीबीएस के बाद छह माह का डिप्लोमा करने वाले छात्र-छात्राओं को गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड करने का अधिकार है। जबकि एमबीबीएस के बाद पीजी कर रहे छात्र-छात्राओं को अल्ट्रासाउंड करने का अधिकार नहीं है। ऐसे में बिना किसी प्रपत्र के अगर रात में कोई गर्भवती महिला पहुंचती है तो उसका अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता है।
पीसीपीएनडीटी एक्ट में बदलाव के कारण हो रही है परेशानी, एक दिन में 40 से 50 अल्ट्रासाउंड होते हैं
दो बजे दोपहर के बाद इमरजेंसी में आने वाली गर्भवती महिलाओं के नहीं हो रहे हैं अल्ट्रासाउंड
पीजी के लिए डीएम से मांगेंगे अनुमति
हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा का कहना है कि पीजी कर रहे छात्र-छात्राओं को अल्ट्रासाउंड करने की अनुमति जिलाधिकारी से मिलकर शीघ्र मांगेंगे। कहा कि अन्य राज्यों में पीजी कर रहे छात्र-छात्राएं अल्ट्रासाउंड करते हैैं और कोई रोक नहीं है। जबकि यह रोक सिर्फ उत्तराखंड में लगाई गई है। जिलाधिकारी वीके सुमन से मिलकर आने वाली समस्याओं के बारे में बताएंगे और अनुमति देने का आग्रह करेंगे। डॉ. भैसोड़ा ने बताया कि नियमों में सख्ती के बावजूद भी सभी गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड करने का प्रयास किया जाता है।
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विभाग में अधीनस्थों को आदेश है कि किसी भी समय जरूरत पड़ने पर मुझे काल कर सकते हैं। सभी के अल्ट्रासाउंड किए जा रहे हैं। गर्भवती महिला की गंभीर स्थिति होने पर डॉक्टर बिना प्रपत्र के भी अल्ट्रासाउंड कर सकता है। कहा कि विभाग में अन्य डॉक्टर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सुबह नौ से शाम पांच बजे तक मैं अस्पताल में मौजूद रहता हूं और अल्ट्रासाउंड होते हैं। इमरजेंसी आने पर अगर फोन आता है तो अस्पताल पहुंचकर अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं।
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-डॉ. पंकज महेश, विभागाध्यक्ष, रेडियोलॉजी