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उच्च न्यायालय में निधि यादव मामले की सुनवाई तीन अक्टूबर को
Updated Tue, 12 Sep 2017 02:30 AM IST
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मुकदमा
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नैनीताल। उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड परिवहन निगम की महाप्रबंधक और 2007 बैच की पीसीएस अधिकारी निधि यादव के गलत दस्तावेज देकर पीसीएस की नौकरी हासिल किए जाने के मामले पर सुनवाई के लिए तीन अक्तूबर की तिथि नियत की है।
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोस़ेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। रुद्रपुर निवासी अनिल भारद्वाज की जनहित याचिका में शिकायत थी कि निधि यादव ने गलत दस्तावेज देकर पीसीएस अधिकारी की नौकरी हासिल की है। याची का कहना था कि 2007 बैच की पीसीएस अधिकारी निधि यादव ने अन्य पिछड़ा वर्ग का गलत प्रमाणपत्र दाखिल किया है। निधि यादव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ के रावा गांव की रहने वाली हैं। निधि यादव को उत्तराखंड हरिद्वार से अन्य पिछड़ा वर्ग का गलत प्रमाणपत्र जारी किया गया है। निधि यादव इस आधार पर आरक्षण की हकदार नहीं है। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने भी निधि यादव के अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र पर सवाल उठाये हैं। आयोग ने कहा है कि उत्तराखंड की निवासी न होने के कारण निधि यादव को अन्य पिछड़ा वर्ग में आरक्षण कोटे का लाभ नहीं दिया जा सकता है।
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सोमवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोस़ेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। रुद्रपुर निवासी अनिल भारद्वाज की जनहित याचिका में शिकायत थी कि निधि यादव ने गलत दस्तावेज देकर पीसीएस अधिकारी की नौकरी हासिल की है। याची का कहना था कि 2007 बैच की पीसीएस अधिकारी निधि यादव ने अन्य पिछड़ा वर्ग का गलत प्रमाणपत्र दाखिल किया है। निधि यादव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ के रावा गांव की रहने वाली हैं। निधि यादव को उत्तराखंड हरिद्वार से अन्य पिछड़ा वर्ग का गलत प्रमाणपत्र जारी किया गया है। निधि यादव इस आधार पर आरक्षण की हकदार नहीं है। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने भी निधि यादव के अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र पर सवाल उठाये हैं। आयोग ने कहा है कि उत्तराखंड की निवासी न होने के कारण निधि यादव को अन्य पिछड़ा वर्ग में आरक्षण कोटे का लाभ नहीं दिया जा सकता है।
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