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शहीद की वीरांगना को साल बाद मिला वन रैंक वन पेंशन का लाभ
Updated Sun, 17 Jun 2018 01:13 AM IST
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100 का नोट
हल्द्वानी। बैंक की ओर से अड़ंगा लगाने पर शहीद उत्तम सिंह की वीरांगना को चार साल तक वन रैंक वन पेंशन का लाभ नहीं मिला। जिला सैनिक कल्याण विभाग की पहल, काफी भागदौड़ और सूचना अधिकार के तहत सवाल उठाने पर वीरांगना को यह लाभ मिल सका।
मूल रुप से अल्मोड़ा जिले के अमस्यारी चौखुटिया निवासी सिपाही उत्तम सिंह 16 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात थे। तीन जनवरी 1996 को सिपाही ऑपरेशन रक्षक के दौरान सीमा पर शहीद हो गए थे। इसके बाद शहीद की वीरांगना को उदारीकृत पेंशन स्वीकृत हुई। वीरांगना पद्मा देवी गुरुतेग बहादुर कॉलोनी में परिवार के साथ रहती हैं।
इस बीच केंद्र सरकार ने वन रैंक वन पेंशन के तहत सैनिकों की पेंशन बढ़ोत्तरी की लेकिन वीरांगना पद्मा देवी को बढ़ोत्तरी का लाभ नहीं मिला। बैंक ने नई बढ़ोत्तरी देने से मना कर दिया। वन रैंक वन पेंशन जुलाई 14 से लागू हुई लेकिन उसका आदेश फरवरी 16 में आया। पेंशन नहीं बढ़ने पर वीरांगना ने लोगों के कहने पर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर बीएस रौतेला से संपर्क किया। विभाग की ओर से पत्र भेजने पर बैंक अधिकारियों ने शीघ्र समाधान करने का आश्वासन दिया लेकिन बैंक अधिकारी ने कुछ नहीं किया। सितंबर 17 को वीरांगना ने सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत बैंक के सीपीपीसी से जानकारी मांगी। इसके बाद सीपीपीसी ने उत्तर दिया कि उनके पीपीओ में सेवाकाल अंकित नही है। इसके बाद वीरांगना ने अभिलेख कार्यालय को पत्र भेजा और अनुरोध किया कि उनके पति के सेवा काल अंकित कर पीपीओ जारी करें। इसके बाद पीसीडीए इलाहाबाद ने सेवाकाल अंकित करते हुए पत्र भेज दिया। समुचित उत्तर मिलने पर बैंक के सीपीपीसी ने वीरांगना पद्मा को वन रैंक वन पेंशन का लाभ देने का भरोसा दिया लेकिन इस प्रक्रिया में दस माह लग गए। वीरांगना का कहना था कि यह दुर्भाग्य है कि मातृ भूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान करने वाले परिवार को पेंशन का लाभ लेने के लिए भटकना पड़ रहा है।
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मूल रुप से अल्मोड़ा जिले के अमस्यारी चौखुटिया निवासी सिपाही उत्तम सिंह 16 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात थे। तीन जनवरी 1996 को सिपाही ऑपरेशन रक्षक के दौरान सीमा पर शहीद हो गए थे। इसके बाद शहीद की वीरांगना को उदारीकृत पेंशन स्वीकृत हुई। वीरांगना पद्मा देवी गुरुतेग बहादुर कॉलोनी में परिवार के साथ रहती हैं।
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इस बीच केंद्र सरकार ने वन रैंक वन पेंशन के तहत सैनिकों की पेंशन बढ़ोत्तरी की लेकिन वीरांगना पद्मा देवी को बढ़ोत्तरी का लाभ नहीं मिला। बैंक ने नई बढ़ोत्तरी देने से मना कर दिया। वन रैंक वन पेंशन जुलाई 14 से लागू हुई लेकिन उसका आदेश फरवरी 16 में आया। पेंशन नहीं बढ़ने पर वीरांगना ने लोगों के कहने पर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर बीएस रौतेला से संपर्क किया। विभाग की ओर से पत्र भेजने पर बैंक अधिकारियों ने शीघ्र समाधान करने का आश्वासन दिया लेकिन बैंक अधिकारी ने कुछ नहीं किया। सितंबर 17 को वीरांगना ने सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत बैंक के सीपीपीसी से जानकारी मांगी। इसके बाद सीपीपीसी ने उत्तर दिया कि उनके पीपीओ में सेवाकाल अंकित नही है। इसके बाद वीरांगना ने अभिलेख कार्यालय को पत्र भेजा और अनुरोध किया कि उनके पति के सेवा काल अंकित कर पीपीओ जारी करें। इसके बाद पीसीडीए इलाहाबाद ने सेवाकाल अंकित करते हुए पत्र भेज दिया। समुचित उत्तर मिलने पर बैंक के सीपीपीसी ने वीरांगना पद्मा को वन रैंक वन पेंशन का लाभ देने का भरोसा दिया लेकिन इस प्रक्रिया में दस माह लग गए। वीरांगना का कहना था कि यह दुर्भाग्य है कि मातृ भूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान करने वाले परिवार को पेंशन का लाभ लेने के लिए भटकना पड़ रहा है।
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