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केंद्रीय जलायोग में मांगी जमरानी की संशोधित डीपीआर
Updated Tue, 08 May 2018 01:54 AM IST
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हल्द्वानी। भाबर की लाइफ लाइन जमरानी बांध की मंजूरी की संभावनाएं बलवती होती दिख रही हैं। केंद्रीय जलायोग की टीम के बांध स्थल का भ्रमण करने के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारी सक्रिय हो गए हैं।
बांध स्थल निरीक्षण के बाद केंद्रीय जलायोग की टीम ने जमरानी की संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। केंद्रीय जलायोग की टीम ने बांध परियोजना की संशोधित डीपीआर 15 दिन के भीतर पेश करने को कहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संशोधित डीपीआर जल्द पेश करने को कहा गया है। वर्तमान में जमरानी बांध की डीपीआर 2850 करोड़ रुपये है।
केंद्रीय जलायोग की टीम के स्थलीय निरीक्षण के तत्काल बाद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने भी जमरानी बांध परियोजना को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की बाधा दूर होने के बाद केंद्रीय जलायोग की टीम ने बांध परियोजना की संशोधित डीपीआर पेश करने को कहा है।
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सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जमरानी बांध परियोजना की विस्तृत डीपीआर तैयार की जा रही है। इसके लिए तीन सहायक अभियंताओं की टीम गठित की गई है। यह टीम एक सप्ताह के भीतर संशोधित डीपीआर तैयार कर देगी। इसे जल्द केंद्रीय जलायोग के पास भेजा जाएगा। संशोधित डीपीआर पेश होने के बाद बांध परियोजना को मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय जलायोग ने मौजूदा दरों पर डीपीआर संशोधित कर भेजने के निर्देश दिए हैं। सिंचाई अधिकारियों के मुताबिक परियोजना की नई डीपीआर में करीब 10 फीसदी तक मामूली बढ़ोत्तरी हो सकती है।
ये भी जानें
-जमरानी बांध परियोजना को 1975 में सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद 61.25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
-सिंचाई विभाग ने 1981 में गौला बैराज का निर्माण किया। बैराज, 440 किमी नहरों, जमरानी कालोनी आदि के निर्माण में 25.24 करोड़ रुपये खर्च किए।
-1989 में 144.84 करोड़ रुपये की डीपीआर भेजी भेजी गई। इस बीच बांध परियोजना की स्वीकृति में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की तमाम आपत्तियां लगती रहीं।
-2015 में परियोजना की लागत 2350 करोड़ रुपये पहुंच गई। वर्तमान में बांध परियोजना की 2850 करोड़ रुपये की डीपीआर केंद्रीय जलायोग को भेजी गई।
प्रस्ताव तैयार करने को सिंचाई विभाग ने बनाई तीन सदस्यीय टीम
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बांध स्थल निरीक्षण के बाद केंद्रीय जलायोग की टीम ने जमरानी की संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। केंद्रीय जलायोग की टीम ने बांध परियोजना की संशोधित डीपीआर 15 दिन के भीतर पेश करने को कहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संशोधित डीपीआर जल्द पेश करने को कहा गया है। वर्तमान में जमरानी बांध की डीपीआर 2850 करोड़ रुपये है।
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केंद्रीय जलायोग की टीम के स्थलीय निरीक्षण के तत्काल बाद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने भी जमरानी बांध परियोजना को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की बाधा दूर होने के बाद केंद्रीय जलायोग की टीम ने बांध परियोजना की संशोधित डीपीआर पेश करने को कहा है।
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सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जमरानी बांध परियोजना की विस्तृत डीपीआर तैयार की जा रही है। इसके लिए तीन सहायक अभियंताओं की टीम गठित की गई है। यह टीम एक सप्ताह के भीतर संशोधित डीपीआर तैयार कर देगी। इसे जल्द केंद्रीय जलायोग के पास भेजा जाएगा। संशोधित डीपीआर पेश होने के बाद बांध परियोजना को मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय जलायोग ने मौजूदा दरों पर डीपीआर संशोधित कर भेजने के निर्देश दिए हैं। सिंचाई अधिकारियों के मुताबिक परियोजना की नई डीपीआर में करीब 10 फीसदी तक मामूली बढ़ोत्तरी हो सकती है।
ये भी जानें
-जमरानी बांध परियोजना को 1975 में सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद 61.25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
-सिंचाई विभाग ने 1981 में गौला बैराज का निर्माण किया। बैराज, 440 किमी नहरों, जमरानी कालोनी आदि के निर्माण में 25.24 करोड़ रुपये खर्च किए।
-1989 में 144.84 करोड़ रुपये की डीपीआर भेजी भेजी गई। इस बीच बांध परियोजना की स्वीकृति में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की तमाम आपत्तियां लगती रहीं।
-2015 में परियोजना की लागत 2350 करोड़ रुपये पहुंच गई। वर्तमान में बांध परियोजना की 2850 करोड़ रुपये की डीपीआर केंद्रीय जलायोग को भेजी गई।
प्रस्ताव तैयार करने को सिंचाई विभाग ने बनाई तीन सदस्यीय टीम