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टाइगर रिजर्व को लेकर वनविभाग बैकफुट पर
Updated Mon, 16 Jul 2018 02:17 AM IST
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tiger nawab
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हल्द्वानी। नंधौर अभयारण्य को टाइगर रिजर्व और सुरई, किलपुुरा और खटीमा रेंज (उत्तर प्रदेश) को पीलीभीत टाइगर रिजर्व का बफर जोन बनाने में लोगों को राहत मिलने की संभावना है। जन दबाव में वन विभाग अब बैक फुट पर है। विभाग ने साफ कर दिया है कि नंधौर में बाघ संरक्षण की योजनाओं का बेहतर परिणाम मिल रहा है और यहां पर अलग से बाघ संरक्षण क्षेत्र बनाने से फायदे की जगह नुकसान ही होगा। इसी तरह पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बफर जोन पर भी वन विभाग असहमत है।
नंधौर अभयारण्य को बाघ संरक्षण क्षेत्र घोषित किये जाने का क्षेत्र के लोग विरोध कर रहे हैं। लोगों ने आत्मदाह तक की चेतावनी दी हुई है। इनका कहना है कि बाघ संरक्षण क्षेत्र बनने से यहां के लोगों के हक हकूक बिल्कुल ही समाप्त हो जाएंगे और क्षेत्र में रोजगार भी ठप हो जाएगा। विरोध इतना तीखा है कि डीएफओ हल्द्वानी व निदेशक अभयारण्य नंधौर चंद्रशेखर सनवाल को लोगों ने घेर लिया था। उस समय सनवाल का कहना था कि टाइगर रिजर्व बनने से लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा। लोगों के हक हकूक उतने ही रहेंगे जितने की इस समय है। वन विभाग के इस रुख के कारण ही राज्य वन्य जीव परिषद ने इस मसले पर हरी झंडी दे दी थी। अब वन विभाग के आला अधिकारी इस प्रस्ताव से सहमत नजर नहीं आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) को पश्चिम वृत्त कार्यालय की ओर से लिखे गए पत्र में स्थिति स्पष्ट की गई है। पत्र में लिखा गया है कि नंधौर अभयारण्य समेत पश्चिम वृत्त में बाघ संरक्षण के लिए पहले से ही योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। इन योजनाओं का ही परिणाम है कि अभ्यारण्य में बाघों की संख्या 119 तक पहुंच गई है। ऐसे में इस क्षेत्र को अगर टाइगर रिजर्व बनाया गया तो फायदे की बजाय नुकसान होगा। इस समय इस क्षेत्र के लोगों ने वन्य जीवों के साथ रहना सीख लिया है। टाइगर रिजर्व बना तो लोग बाघों के प्रति आक्रामक होंगे और बाघ संरक्षण की मूल भावना पर ही चोट होगी। टाइगर रिजर्व बनने पर क्षेत्र का रोजगार भी प्रभावित होगा और यह लोगों के गुस्से को बढ़ाने वाला साबित होगा।
नंधौर टाइगर रिजर्व के जन विरोध को देखते हुए वन विभाग बैकफुट पर
टाइगर रिजर्व बना तो फायदे की जगह नुकसान अधिक होने की आशंका
वन मुख्यालय को भेजा गया है पश्चिमी वृत्त की तरफ से पत्र
टाइगर रिजर्व बना तो ये होगा नुकसान
- टाइगर रिजर्व बना तो केंद्र से एक करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड मिलेगा। वर्तमान में गौला कॉर्पस समेत अन्य फंड से 1.80 करोड़ रुपये मिल रहा है। अन्य मदों से भी 2.51 करोड़ का बजट दिया जाता है। रिजर्व बनने पर यह बजट रुक जाएगा।
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- रिजर्व बना तो नंधौर में खनन बंद हो जाएगा और इससे 100 करोड़ रुपये राजस्व और दस हजार रोजगार प्रभावित होगा।
- बफर जोन बना तो सुरई में 40 करोड़ प्रभावित होगा। वनों के संरक्षण और सुधार के काम भी बंद हो जाएंगे।
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नंधौर अभयारण्य को बाघ संरक्षण क्षेत्र घोषित किये जाने का क्षेत्र के लोग विरोध कर रहे हैं। लोगों ने आत्मदाह तक की चेतावनी दी हुई है। इनका कहना है कि बाघ संरक्षण क्षेत्र बनने से यहां के लोगों के हक हकूक बिल्कुल ही समाप्त हो जाएंगे और क्षेत्र में रोजगार भी ठप हो जाएगा। विरोध इतना तीखा है कि डीएफओ हल्द्वानी व निदेशक अभयारण्य नंधौर चंद्रशेखर सनवाल को लोगों ने घेर लिया था। उस समय सनवाल का कहना था कि टाइगर रिजर्व बनने से लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा। लोगों के हक हकूक उतने ही रहेंगे जितने की इस समय है। वन विभाग के इस रुख के कारण ही राज्य वन्य जीव परिषद ने इस मसले पर हरी झंडी दे दी थी। अब वन विभाग के आला अधिकारी इस प्रस्ताव से सहमत नजर नहीं आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रमुख वन संरक्षक (वन्य जीव) को पश्चिम वृत्त कार्यालय की ओर से लिखे गए पत्र में स्थिति स्पष्ट की गई है। पत्र में लिखा गया है कि नंधौर अभयारण्य समेत पश्चिम वृत्त में बाघ संरक्षण के लिए पहले से ही योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। इन योजनाओं का ही परिणाम है कि अभ्यारण्य में बाघों की संख्या 119 तक पहुंच गई है। ऐसे में इस क्षेत्र को अगर टाइगर रिजर्व बनाया गया तो फायदे की बजाय नुकसान होगा। इस समय इस क्षेत्र के लोगों ने वन्य जीवों के साथ रहना सीख लिया है। टाइगर रिजर्व बना तो लोग बाघों के प्रति आक्रामक होंगे और बाघ संरक्षण की मूल भावना पर ही चोट होगी। टाइगर रिजर्व बनने पर क्षेत्र का रोजगार भी प्रभावित होगा और यह लोगों के गुस्से को बढ़ाने वाला साबित होगा।
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नंधौर टाइगर रिजर्व के जन विरोध को देखते हुए वन विभाग बैकफुट पर
टाइगर रिजर्व बना तो फायदे की जगह नुकसान अधिक होने की आशंका
वन मुख्यालय को भेजा गया है पश्चिमी वृत्त की तरफ से पत्र
टाइगर रिजर्व बना तो ये होगा नुकसान
- टाइगर रिजर्व बना तो केंद्र से एक करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड मिलेगा। वर्तमान में गौला कॉर्पस समेत अन्य फंड से 1.80 करोड़ रुपये मिल रहा है। अन्य मदों से भी 2.51 करोड़ का बजट दिया जाता है। रिजर्व बनने पर यह बजट रुक जाएगा।
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- रिजर्व बना तो नंधौर में खनन बंद हो जाएगा और इससे 100 करोड़ रुपये राजस्व और दस हजार रोजगार प्रभावित होगा।
- बफर जोन बना तो सुरई में 40 करोड़ प्रभावित होगा। वनों के संरक्षण और सुधार के काम भी बंद हो जाएंगे।