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निकाय चुनाव पर प्रदेश सरकार से जवाब तलब
Updated Thu, 05 Apr 2018 02:08 AM IST
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नैनीताल। उच्च न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग की समय से निकाय चुनाव कराने की याचिका पर सरकार का जवाब तलब किया है। अगली सुनवाई 11 अप्रैल को होगी।
बुधवार को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने मामले की सुनवाई की। राज्य निर्वाचन आयोग ने याचिका दायर कर कहा था कि राज्य के 2013 में निकायों के गठन के बाद पहली बैठक चार मई को हुई थी। संविधान के अनुच्छेद 243-य के तहत राज्य में तीन मई, 2018 तक निकायों के बोर्ड का गठन होना जरूरी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले के मुताबिक अगर राज्य सरकार समय से निकायों के चुनाव नहीं कराती है तो राज्य निर्वाचन आयोग उच्च न्यायालय में वाद दायर कर सकता है। राज्य निर्वाचन आयोग की याचिका में राज्य में जल्द चुनाव कराने की मांग की गई है।
न्यायालय में राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट कि या कि चुनाव को लेकर आयोग ने मुख्य सचिव, शहरी विकास सचिव को आधिकारिक पत्र भेजे थे। इसके बावजूद सरकार की ओर से अब तक राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव कार्यक्रम उपलब्ध नहीं कराया है।
राज्य निर्वाचन आयोग के न्यायालय में पहुंचने से अब सरकार पर निकाय चुनाव समय से कराने का दबाव भी बढ़ा है। अभी तक प्रदेश सरकार निकायों के परिसीमन के मसले को नहीं सुलझा पाई है और इस कारण भी चुनाव के समय से होने पर सवाल उठ रहा है। निकायों के सीमा विस्तार का मामला भी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
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बुधवार को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने मामले की सुनवाई की। राज्य निर्वाचन आयोग ने याचिका दायर कर कहा था कि राज्य के 2013 में निकायों के गठन के बाद पहली बैठक चार मई को हुई थी। संविधान के अनुच्छेद 243-य के तहत राज्य में तीन मई, 2018 तक निकायों के बोर्ड का गठन होना जरूरी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले के मुताबिक अगर राज्य सरकार समय से निकायों के चुनाव नहीं कराती है तो राज्य निर्वाचन आयोग उच्च न्यायालय में वाद दायर कर सकता है। राज्य निर्वाचन आयोग की याचिका में राज्य में जल्द चुनाव कराने की मांग की गई है।
न्यायालय में राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट कि या कि चुनाव को लेकर आयोग ने मुख्य सचिव, शहरी विकास सचिव को आधिकारिक पत्र भेजे थे। इसके बावजूद सरकार की ओर से अब तक राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव कार्यक्रम उपलब्ध नहीं कराया है।
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राज्य निर्वाचन आयोग के न्यायालय में पहुंचने से अब सरकार पर निकाय चुनाव समय से कराने का दबाव भी बढ़ा है। अभी तक प्रदेश सरकार निकायों के परिसीमन के मसले को नहीं सुलझा पाई है और इस कारण भी चुनाव के समय से होने पर सवाल उठ रहा है। निकायों के सीमा विस्तार का मामला भी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
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