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पानी और प्रकृति की धरोहरों को बचाना सबसे बड़ी चुनौती: भारती

Tue, 24 Apr 2018 02:17 AM IST
Updated Tue, 24 Apr 2018 02:17 AM IST
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पानी और प्रकृति की धरोहरों को बचाना सबसे बड़ी चुनौती: भारती
रामनगर में स्थापना दिवस मनाया - फोटो : अमर उजाला
रामनगर (नैनीताल)। उत्तराखंड में प्राकृतिक संसाधनों का भंडार है और यहां का पानी समूचे उत्तरी भारत का पोषण करता है। कल्पतरु वृक्षमित्र समिति के द्वितीय स्थापना दिवस कार्यक्रम पर मुख्य वक्ता पाणी राखो आंदोलन के प्रणेता सच्चिदानंद भारती ने कहा कि पहाड़ की नदियां ही गंगा की मां हैं। आजादी से उत्तराखंड की 360 छोटी नदी, सरिताएं, देशभर में 12 लाख ताल समाप्त हो गए हैं। 2050 तक देश और विश्व में गंभीर जल संकट पैदा हो सकता है। पहाड़ में चाल-खाल जल संरक्षण का पारंपरिक विकल्प है।
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नगरपालिका सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध पर्यावरणविद डॉ. अजय रावत ने उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा को स्लाइड शो के जरिए दिखाया। उन्होंने कहा कि राज्य के आम निवासियों का इस प्राकृतिक विरासत को बचाए रखने में बहुत बड़ा योगदान है। सचिव मितेश्वर आनंद ने कल्पतरु वृक्षमित्र की गतिविधियों के बारे में बताया। चौबट्टाखाल निवासी सुधीर सुंदरियाल, पौधरोपण में योगदान करने वाले दो दर्जन बाल वृक्षमित्रों को सम्मानित किया गया। एआरटीओ विमल पांडेय ने सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता की अपील की। अतुल मेहरोत्रा की अध्यक्षता में अनुपम शुक्ला ने संचालन किया। इस दौरान गणेश रावत, अनिल अग्रवाल, सुमित लखोटिया, हरेंद्र बरगली, हरिमान, इमरान खान, मनोज दास, विजय सिंह, कौशिक मिश्र, अजय पांडेय, रमेश बिष्ट, राजेश भट, प्रखर गुप्ता, संदीप गुप्ता, बीएस डंगवाल आदि थे।
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